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शादी के बाद आर्थिक ज‍िम्‍मेदार‍ियों में पार्टनर का साथ कैसे न‍िभाएं? जानें 5 तरीके

शादी के बाद आपको अपने पार्टनर के साथ आर्थिक ज‍िम्‍मेदार‍ियों को साझा करने का तरीका भी पता होना चाह‍िए, जान‍िए कैसे न‍िभाएं ज‍िम्‍मेदारी 

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurPublished at: Oct 19, 2021Updated at: Oct 19, 2021
शादी के बाद आर्थिक ज‍िम्‍मेदार‍ियों में पार्टनर का साथ कैसे न‍िभाएं? जानें 5 तरीके

शादी के बाद घर की ज‍िम्‍मेदारी की ह‍िस्‍सेदारी पति और पत्‍नी पर आती है और इन्‍हीं में से एक है आर्थिक ज‍िम्‍मेदारी। आज के समय में जहां पत‍ि और पत्‍नी दोनों ही वर्किंग है तो सवाल ये उठता है क‍ि घर के खर्चे को आपस में कैसे बांटा जाए ताक‍ि क‍िसी एक पार्टनर पर आर्थ‍िक ज‍िम्‍मेदारी का बोझ न पड़े। लखनऊ के बोधिट्री इंडिया सेंटर की काउन्‍सलिंग साइकोलॉज‍िस्‍ट डॉ नेहा आनंद ने बताया क‍ि शादी के बाद आर्थ‍िक ज‍िम्‍मेदारी को साझा करने से न‍ स‍िर्फ आपका र‍िश्‍ता मजबूत होगा बल्‍क‍ि आप एक-दूसरे पर भरोसा भी कर सकेंगे। आर्थि‍क ज‍िम्‍मेदारी को बांटने के बाद भी आपकी इंकम और अकाउंट पर आपका पूरा अध‍िकार भी होना चाह‍िए। इस लेख में हम आर्थिक ज‍िम्‍मेदारी को बांटने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।

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(image source:moneycrashers.com)

1. दोनों पार्टनर इंकम का दो प्रत‍िशत हिस्‍सा सेव करें (Save 2 percent of each partner's income)

इस प्‍वॉइंट का ज‍िक्र अक्‍सर सबसे अंत में होता है पर आपको सेव‍िंग का ज‍िक्र सबसे पहले करना चाह‍िए। आपको और आपके पार्टनर को अपनी इंकम का दो प्रत‍िशत ह‍िस्‍सा न‍िकालकर कम्‍बाइन खाते में डालना चाह‍िए। पत‍ि-पत्‍नी के ज्‍वॉइंट अकाउंट से जरूरत पड़ने पर कोई भी पैसा न‍िकाल सकता है पर इसके ल‍िए आपको खर्चों के अलावा सेव‍िंग स्‍क‍ीम भी अपनानी चाह‍िए, सरकार की ओर से कई अच्‍छी स्‍कीम में आप इन्‍वेस्‍ट कर सकते हैं जैसे डाकघर योजना के तहत क‍िसान व‍िकास पत्र, एसआईपी, म्‍यूच्‍वल फंड आदि।

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2. अपने अकाउंट व कमाई पर हो आपका हक (Full right on your salary and account)

शादी के बाद आप आर्थिक ज‍िम्‍मेदार‍ियों में भले ही अपने पार्टनर का हाथ बंटा रहे हों पर आपको  अपनी कमाई और अपने अकाउंट का पूरा अध‍िकार पार्टनर को नहीं देना चाह‍िए, इसी कारण से कई कपल्‍स में लड़ाई होती है। आपकी कमाई और अकाउंट पर पहला हक आपका है उसके बाद आप पार्टनर को अपने अकाउंट का एक्‍सेस दे सकते हैं पर पैसों का ब्‍यौरा या अकाउंट को इस्‍तेमाल करने की पूर्ण छूट देना ठीक नहीं है।

3. ब‍िल्‍स के भुगतान को बांटें (Share bill payments)

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(image source:insider)

शादी के बाद आर्थ‍िक ज‍िम्‍मेदारी को बांटने के ल‍िए ब‍िल्‍स के भुगतान को आपस में बांट सकते हैं, पहले जरूरी ब‍िल्‍स को भर दें फ‍िर छोटे ब‍िल्‍स को का भुगतान पूरा करें। आप इंकम के आधार पर बि‍ल्‍स का भुगतान बांट सकते हैं या आधे महीने का ब‍िल एक पार्टनर और आधे महीने के ब‍िल्‍स दूसरे पार्टनर भरे इस तरह भी आप समय के मुताब‍िक ब‍िल्‍स का भुगतान आपस में बांट सकते हैं।

4. इंकम के आधार पर तय हो शेयर‍िंग (Share percentage based on income)

शादी के बाद आर्थ‍िक ज‍िम्‍मेदारी शेयर करने का मतलब ये नहीं है क‍ि दोनों पार्टनर बराबर का खर्च उठा पाएं, आपको ज‍िम्‍मेदारी साझा करनी है न क‍ि पैसे। ऐसा हो सकता है क‍ि आपके पार्टनर की इंकम आपसे कम या ज्‍यादा हो, उस स्‍थ‍ित‍ि में आप कुल इंकम का प्रत‍िशत शेयर करें जैसे पार्टनर के साथ बैठकर तय करें क‍ि आप अपनी इंकम का क‍ितना प्रत‍िशत घर खर्च में दे सकते हैं और उतना ही आपका पार्टनर भी दे सके, ऐसा ह‍िस्‍सा ही बांटें। 

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5. पर्सनल खर्चे का बोझ पार्टनर पर न डालें (Don't bother your partner for personal expenses)

शादी के बाद आर्थिक ज‍िम्‍मेदारी का बोझ क‍िसी एक पार्टनर पर अध‍िक नहीं पड़ना चाह‍िए, कई कपल्‍स वर्क‍िंग होने के बावजूद अपने पर्सनल खर्चे के ल‍िए पार्टनर पर न‍िर्भर होते हैं पर इससे आपके बीच मनमुटाव बढ़ सकता है, आपको अपने न‍िजी खर्चे खुद ही उठाने चाह‍िए और इंकम कम होने की स्‍थ‍िति में अपने पार्टनर से इस पर चर्चा करनी चाह‍िए।

इन आसान तरीकों से शादी के बाद क‍िसी एक पार्टनर पर आर्थिक ज‍िम्‍मेदारी का बोझ नहीं पड़ेगा और आप म‍िल-बांटकर भव‍िष्‍य के ल‍िए सेव‍िंग कर पाएंगे।

(main image source:gannett)

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