क्यों जमा होता है शरीर में पानी (वाटर रिटेंशन)? जानें शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के 8 तरीके

शरीर में अचानक से पानी का स्तर बढ़ने की समस्या को वॉटर रिंटेशन कहते हैं। घरेलू उपायों से आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं।

 
Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Apr 13, 2021Updated at: Apr 13, 2021
क्यों जमा होता है शरीर में पानी (वाटर रिटेंशन)? जानें शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के 8 तरीके

शरीर में अचानक से पानी और नमक बढ़ने की समस्या को वॉटर रिटेंशन (Water Retention) कहते हैं। वॉटर रिटेंशन की वजह से हमारे शरीर का वजन अचानक से बढ़ने लगता है। साथ ही इसके कारण टांग, पैर और एड़ियों में दर्द होने लगता है। वॉटर रिटेंशन की वजह से कई लोगों के हाथ, पैर और पेट में सूजन की शिकायत होने लगती है। इस समस्या से ग्रसित व्यक्ति के टिश्यू में असामान्य रूप से पानी भरने लगता है। वॉटर रिटेंशन की समस्या कई कारणों (Water Retention Causes) से हो सकती है। आज हम आपको इस लेख के जरिए वॉटर रिटेंशन के कारण, लक्षण (Water Retention Symptoms) और  कुछ घरेलू उपायों (Water Retention Home Remedies) के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आप इस गंभीर परेशानी से निजात पा सकें।

 

वॉटर रिटेंशन के कारण (causes of Water Retention)

  • शरीर के तरल पदार्थों को एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन नियंत्रित करने का कार्य करती है, जब इन हार्मोन में उतार-चढ़ाव होता है, तो शरीर के टिश्यूज में अधिक पानी एकत्रित होने लगता है। जिसकी वजह से वॉटर रिटेंशन की समस्या हो सकती है। 
  • एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठने की वजह वॉटर रिटेंशन की समस्या हो सकती है। खासतौर पर लंबी यात्रा के कारण यह समस्या होती है, जिसकी वजह से पैरों में सूजन आ जाती है।
  • अधिक मात्रा में नमक का सेवन करने से भी शरीर में पानी अधिक बढ़ जाता है, जिसके कारण वॉटर रिटेंशन की परेशानी हो जाती है। 
  • पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाओं में हार्मोनल बदलाव की वजह से वॉटर रिटेंशन की परेशानी हो सकती है। 
  • इसके अलावा गर्भावस्था, हृदय की कमजोरी इत्यादि कारणों से वॉटर रिटेंशन की समस्या हो सकती है।

वॉटर रिटेंशन के लक्षण (Symptoms of Water Retention)

  • पेट में सूजन होना।
  • टखने, पैर और पंजे में सूजन होना।
  • वजन में उतार-चढ़ाव
  • जोड़ों में अकड़न
  • पिंडली में सूजन
  • स्किन दबाने पर गड्डा बनना इत्यादि इसके लक्षण हो सकते हैं। 

वॉटर रिटेंशन के घरेलू इलाज ( Home Remedies for Water Retention)

घरेलू उपायों से आप वॉटर रिटेंशन की समस्या से निजात पा सकते हैं। ये घरेलू उपाय आपके लिए काफी आसान साबित हो सकते हैं। आइए जानते हैं वॉटर रिटेंशन के घरेलू उपाय? 

1. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)

सेब के सिरके का इस्तेमाल करके आप वॉटर रिटेंशन की परेशानी से निजात पा सकते हैं। वॉटर रिटेंशन की परेशानी होने पर डरने की जरूरत नहीं है। इसके लिए 1 बड़ा चम्मच सिरका लें। इसे 1 गिलास गर्म पानी में मिक्स करके पी जाएं। दिन में करीब 2 से 3 बार सेब के सिरके का पानी पीने से वॉटर रिटेंशन की परेशानी से राहत पा सकते हैं। सेब का सिरका आपके शरीर में मौजूद सोडियम को कम करता है। सोडियम की अधिकता से ही शरीर में पानी का स्तर बढ़ता है। ऐसे में वॉटर रिटेंशन की शिकायत होने पर नियमित रूप से सेब के सिरके का पानी पिया जा सकता है। 

2. लहसुन (Garlic for water Retention)

लहसुन के इस्तेमाल से भी वॉटर रिटेंशन की समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके लिए प्रतिदिन खाली पेट 2 से 3 लहसुन की कलियों को चबाएं। इसके अलावा आप इसे अपने भोजन में भी शामिल कर सकती हैं। दरअसल, लहसुन में मूत्रवर्धक का गुण मौजूद होता है, जो आपके शरीर से अतिरिक्त पानी को बाहर करने में आपकी मदद करता है। अगर आप अपने भोजन में नियमित रूप से लहसुन को शामिल करती हैं, तो इससे वॉटर रिटेंशन की परेशानी से राहत पाया जा सकता है। 

3. अदरक और शहद (Use honey and Ginger for water Retention problem)

वॉटर रिटेंशन की समस्या होने पर अदरक और शहद का सेवन करें। अदरक में मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने का गुण मौजूद होता है। साथ ही इसमें संक्रमण से बचाव का गुण भी है। इसके साथ ही अदरक मूत्रवर्धक वाले गुणों से भरपूर होता है। इसका सेवन करने के लिए 1 कप पानी में 1 चम्मच पिसा हुआ अदरक डालें। अब इस पानी को अच्छे से उबालें। गैस बंद करके पानी को कुछ देर के लिए ठंडा करें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर चाय की तरह इसका सेवन करें। इससे वॉटर रिटेंशन की समस्या के साथ-साथ वजन बढ़ने की परेशानी भी दूर हो सकती है। 

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4. कैमोमाइल का तेल 

कैमोमाइल तेल के इस्तेमाल से वॉटर रिटेंशन में होने वाली समस्या से बचाव किया जा सकता है। इस तेल में एंटीइंफ्लेमेटरी का गुण मौजूद होता है, जो मूत्रवर्धक होने के साथ-साथ शरीर की सूजन को कम करने का गुण भी रखता है। इस तेल को इस्तेमाल करने के लिए 1 बाथ टब में पानी भरेँ। इसमें कैमोमाइल तेल की 10 से 20 बूंदें डालें। इस पानी को नहाने के लिए इस्तेमाल करें। इससे आपके शरीर की सूजन तुरंत कम हो जाएगी। 

5. सिंहपर्णी (डैंडेलियन) की जड़

सिंहपर्णी एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेद की कई दवाईयों को तैयार करने के लिए किया जाता है। सिंहपर्णी में नैचुरल मूत्रवर्धक का गुण होता है, जो हमारे शरीर से अतिरिक्त पानी को बाहर निकाल सकता है। इससे वॉटर रिटेंशन की परेशानी दूर हो सकती है। इसका इस्तेमाल करने के लिए 1 कप पानी में 1 चम्मच सूखी सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर मिलाएं। इसके बाद इस पानी को 1 मिनट तक उबालें। फिर करीब 2 से 3 घंटे के लिए छोड़ दें। सिंहपर्णी का काढ़ा पीने से पहले थोड़ा नॉर्मल पानी पी लें। इसके बाद इस काढ़े को पी जाएं। दिन में करीब 2 बार इस पानी का सेवन करने से वॉटर रिंटेशन की परेशानी से राहत पा सकेंगे।

6. सेंधा नमक (rock salt bath for water Retention)

सेंधा नमक के पानी से नहाने पर वॉटर रिटेंशन की समस्या से राहत पा सकते हैं। इसके लिए 1 बाल्टी में पानी लें। इसमें 1 कप सेंधा नमक मिलाएं। इसके बाद करीब 20 से 30 मिनट तक इस पानी में रहें। नियमित रूप से सेंधा के पानी से नहाने से वॉटर रिटेंशन की परेशानी ठीक हो सकती है। सेंधा नमक में क्लोराइड और सोडियम जैसे दो प्रमुख इलेक्ट्रोलाइट मौजूद होते हैं, जो शरीर में पानी के स्तर को संतुलित करने में आपकी मदद कर सकते हैं। सेंधा नमक के पानी में कुछ देर बैठने से आपके शरीर की सारी थकान दूर हो सकती है। साथ ही यह वॉटर रिटेंशन की समस्या से छुटकारा दिला सकता है। 

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7. जीरे का पानी (Cumin water)

वॉटर रिटेंशन की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए जीरे का पानी लाभदायक साबित हो सकता है। इसके लिए 1 कप गर्म पानी में 1 चम्मच जीरा मिक्स करें। इस पानी को थोड़ी देर (4-5 मिनट) के लिए उबालें। इसके बाद पानी को ठंडा होने देँ। बाद में इसे छानकर पी जाएं। दिन में दो बार इस पानी का सेवन करने से वॉटर रिटेंशन से आराम मिल सकता है। साथ ही मोटापे की परेशानी भी दूर हो सकती है। पाचन को दुरुस्त करने में भी जीरे का पानी असरदार होता है।

8. ग्रीन टी (Green Tea)

वजन को कम करने के लिए अधिकतर लोग ग्रीन टी का सेवन करते हैं। ग्रीन टी न सिर्फ आपके शरीर का अतिरिक्त फैट कम करता है, बल्कि इससे शरीर में मौजूद अतिरिक्त पानी भी बाहर निकल सकता है। दिन में दो से तीन बार ग्रीन टी का सेवन करने से वॉटर रिटेंशन की समस्या से राहत पा सकते हैं। ग्रीन टी में मौजूद कैफीन मूत्रवर्धक का कार्य करती है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी गुण शरीर के सूजन को कम करने में मददगार हो सकता है।

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