आजकल थायराइड की समस्या महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है, खासकर 20 से 40 की उम्र के बीच। कई बार यह समस्या हल्के लक्षणों के साथ होती है, तो कई बार बिना किसी लक्षण के भी सामने आती है। वजन बढ़ना या कम होना, थकान, बाल झड़ना, मूड स्विंग, इन लक्षणों को अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है लेकिन जब बात प्रेग्नेंसी की हो, तो थायराइड का संतुलन बेहद अहम हो जाता है। जब किसी महिला को पहले से थायराइड की समस्या हो, तो यह खुशी कई सवालों और चिंताओं के साथ आने लगती है जैसे कि क्या मेरी प्रेग्नेंसी सुरक्षित रहेगी?, क्या थायराइड का असर बच्चे पर पड़ेगा? इस तरह के सवालों का जवाब जानने के लिए हमने, आनंद निकेतन में स्थित गायनिका: एवरी वुमन मैटर क्लीनिक की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन से बात की-
क्या थायराइड में प्रेग्नेंसी रिस्की हो जाती है?
डॉक्टर गुंजन मल्होत्रा सरीन बताती हैं कि थायराइड होने का मतलब यह नहीं कि प्रेग्नेंसी असंभव या बहुत खतरनाक है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना जरूर जोखिम भरा हो सकता है। जब यह हार्मोन ज्यादा यानी हाइपरथायराइडिज्म या कम यानी हाइपोथायराइडिज्म बनने लगता हैं, तो शरीर की कई प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान मां का थायराइड हार्मोन बच्चे के शुरुआती विकास, खासकर उसके दिमाग के विकास के लिए बेहद जरूरी होता है। इसलिए यदि थायराइड असंतुलित है, तो इसका असर प्रेग्नेंसी पर पड़ सकता है।
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हाइपोथायराइडिज्म का असर
अगर महिला को हाइपोथायराइडिज्म है और उसका इलाज या कंट्रोल ठीक से नहीं हो रहा, तो मिसकैरेज, समय से पहले डिलीवरी, हाई ब्लड प्रेशर और बच्चे के कम वजन के साथ जन्म लेने का खतरा बढ़ सकता है। डॉ. सरीन के अनुसार, सही समय पर दवा और नियमित जांच से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ज्यादातर महिलाएं दवा की सही खुराक के साथ हेल्दी प्रेग्नेंसी पूरी कर सकती हैं।
हाइपरथायराइडिज्म का असर
हाइपरथायराइडिज्म में दिल की धड़कन तेज होना, वजन कम होना और घबराहट जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अगर यह अनियंत्रित रहे, तो प्रीमैच्योर डिलीवरी या प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, डॉक्टर की निगरानी में दवा और नियमित थायराइड प्रोफाइल टेस्ट से स्थिति को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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क्या थायराइड के साथ प्रेग्नेंसी प्लान की जा सकती है?
डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन का कहना है कि अगर किसी महिला को पहले से थायराइड है, तो प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले TSH टेस्ट कराकर हार्मोन लेवल को कंट्र्रोल कर लेना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान भी हर 6-8 हफ्ते में थायराइड की जांच करानी पड़ सकती है, क्योंकि इस समय हार्मोन की जरूरत बदलती रहती है।
निष्कर्ष
थायराइड होने का मतलब यह नहीं कि प्रेग्नेंसी बहुत ज्यादा रिस्की है। असली जोखिम तब होता है जब समस्या की अनदेखी की जाए। नियमित जांच, सही दवा और डॉक्टर की निगरानी में ज्यादातर महिलाएं सुरक्षित और हेल्दी प्रेग्नेंसी कर सकती हैं। इसलिए घबराने की बजाय जागरूक रहना जरूरी है।
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FAQ
थायराइड की जांच कैसे होती है?
ब्लड टेस्ट के जरिए TSH, T3 और T4 की जांच की जाती है। TSH लेवल असामान्य होने पर आगे की जांच और इलाज किया जाता है।क्या थायराइड पूरी तरह ठीक हो सकता है?
ज्यादातर मामलों में थायराइड को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही दवा और नियमित मॉनिटरिंग से इसे कंट्रोल रखा जा सकता है।क्या थायराइड का असर प्रेग्नेंसी पर पड़ता है?
अगर थायराइड असंतुलित हो तो प्रेग्नेंसी पर असर पड़ सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले और दौरान नियमित जांच जरूरी है।
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Feb 23, 2026 11:24 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Feb 23, 2026 11:24 IST
Modified By : Akanksha TiwariFeb 23, 2026 11:24 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Gunjan Sarin