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थ्री पेरेंट IVF में तीन मां-बाप एकसाथ मिलकर देते हैं बच्चे को जन्म, जानें इसके बारे में जरूरी बातें

थ्री पेरेंट आईवीएफ तकनीक से माइटोकॉन्ड्रियल डिसऑर्डर की समस्या से पीड़ित कपल्स को बच्चा पैदा करने में फायदा मिलता है, जानें इसके फायदे और नुकसान।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Apr 12, 2022Updated at: Apr 12, 2022
थ्री पेरेंट IVF में तीन मां-बाप एकसाथ मिलकर देते हैं बच्चे को जन्म, जानें इसके बारे में जरूरी बातें

हर एक कपल का ये सपना होता है कि उनका एक सुंदर सा बच्चा हो। लेकिन आज के समय में खानपान और लाइफस्टाइल के कारण लोगों में कई ऐसी समस्याएं हो रही हैं जिसकी वजह से बच्चे पैदा करने में भी दिक्कत होती है। कई मेडिकल कंडीशन के कारण कुछ कपल बच्चे पैदा करने में असमर्थ होते हैं। ऐसे कपल्स के लिए आईवीएफ तकनीक बहुत उपयोगी होती है। मेडिकल साइंस की प्रगति ने कई नए तरीके खोजे हैं जिसकी सहायता से आप बच्चे पैदा करने में सफल हो सकते हैं। इसी तरह की एक एक प्रक्रिया है थ्री पेरेंट आईवीएफ (Three Parent IVF) जिसकी सहायता से काफी पेरेंट्स जो बच्चे करने में असमर्थ होते हैं या जिन्हें कुछ समस्या होती है वे संतान सुख पा सकते हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है थ्री पेरेंट आईवीएफ में एक बच्चे तीन बायोलॉजिकल माता-पिता होते हैं। भले ही आपको सुनने में ये थोड़ा अजीब लगे लेकिन ऐसा होता है। थ्री पेरेंट आईवीएफ कुछ गंभीर समस्या वाले कपल्स के लिए बहुत उपयोगी होती है। आइये विस्तार से जानते हैं क्या है थ्री पेरेंट आईवीएफ? थ्री पेरेंट आईवीएफ के फायदे और नुकसान।

क्या है थ्री पेरेंट आईवीएफ? (Three Parent IVF in Hindi)

थ्री पेरेंट आईवीएफ तकनीक की सहायता से कई ऐसे कपल्स बच्चा पैदा करने में सफल हो सकते हैं जिन्हें कुछ गंभीर समस्या होती है। बेबीसून आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटर के डायरेक्टर डॉ ज्योति बाली एमबीबीएस, एमएस (प्रसूति एवं स्त्री रोग के मुताबिक थ्री पेरेंट आईवीएफ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें माता-पिता के डीएनए और एग डोनर के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का इस्तेमाल बच्चा पैदा करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में माइटोकॉन्ड्रियल ट्रांसफर का इस्तेमाल होता है।  इस तकनीक के सहारे ऐसे कपल्स को फायदा मिलता है जो किसी तरह के जेनेटिक माइटोकॉन्ड्रियल डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं। इसके अलावा कई अन्य जेनेटिक डिसऑर्डर जिसकी वजह से बच्चे पैदा करने से परेशानी होती है उस समस्या में आप थ्री पेरेंट आईवीएफ का सहारा ले सकते हैं। इस तकनीक की सहायता से तीन लोगों के डीएनए की सामग्री का इस्तेमाल कर एक भ्रूण बनाया जाता है। जिसमें बच्चे के माता-पिता के आलावा एक डोनर शामिल होता है। थ्री पेरेंट आईवीएफ को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization) भी कहा जाता है। यह तकनीक आईवीएफ की एक एडवांस तकनीक है जिसमें इलेक्ट्रोफ्यूजन तकनीक की भी मदद ली जाती है।

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थ्री पेरेंट आईवीएफ के फायदे (Three Parent IVF Benefits in Hindi)

बच्चे के जन्म के लिए सबसे पहले मां के गर्भ में भ्रूण का निर्माण होना जरूरी होता है। इसके लिए मां की ओवरी में मौजूद एग्स और पिता के सीमन की जरूरी पड़ती है। अगर माता या पिता दोनों में से किसी एक को भी किसी तरह की माइटोकॉन्ड्रियल दिक्कत है तो उनके लिए थ्री पेरेंट आईवीएफ बहुत उपयोगी हो सकता है। थ्री-पेरेंट इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (TPIVF) में सबसे जरूरी रोल माइटोकॉन्ड्रिया का होता है। इस प्रक्रिया के द्वारा ऐसे माता-पिता को पेरेंट बनने में सहायता मिल सकती है जो सामान्य आईवीएफ की तकनीक से भी पिता या मां नहीं बन सकते हैं। थ्री पेरेंट आईवीएफ के प्रमुख फायदे इस प्रकार से हैं।

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  • माइटोकॉन्ड्रियल बीमारियां जैसे डायबिटीज मेलिटस और बहरेपन को अगली पीढ़ी में रोकने के लिए भी यह प्रक्रिया उपयोगी है। 
  • माइटोकॉन्ड्रियल बीमारियों से ग्रसित माता-पिता के लिए फायदेमंद है थ्री प्रेनेट आईवीएफ।
  • अगली पीढ़ी में आनुवंशिक बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए उपयोगी तकनीक।

थ्री पेरेंट आईवीएफ के नुकसान (Three Parent IVF Cons in Hindi)

देश में एआरटी विधेयक आने के बाद से यह प्रक्रिया लीगल हो गयी है। हालांकि इस प्रक्रिया में माइटोकॉन्ड्रिया का इस्तेमाल तकनीक के सहारे होता है इसलिए इससे जुड़े जोखिम भी हो सकते हैं। थ्री पेरेंट आईवीएफ में माइटोकॉन्ड्रिया के डीएनए और न्यूक्लियस डीएनए बीच संबंध होने की वजह से यह तय करना कि इसकी वजह से आने वाली पीढ़ी को आनुवांशिक बीमारियां होने से बचाया जा सकता है सटीक नहीं है। चूंकि यह प्रक्रिया अभी नई है इसलिए इसके बहुत ज्यादा परिणाम भी देखने को नहीं मिले हैं। चिकित्सीय फायदों की पुष्टि के लिए अभी भी रिसर्च और अध्ययन की आवश्यकता है। चूंकि यह प्रक्रिया बहुत नई है और इसके लाभ अभी तक पूरी तरह से देखने को नहीं मिले हैं इसलिए अभी इसके इस्तेमाल की जगह पर लोग बच्चे गोद लेने का आप्शन भी चुन लेते हैं।

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