Symptoms And Treatments Of Ear Tumor In Hindi: कई बार आपने ऐसा होता है कि मौसम में बदलाव होने की वजह से सर्दी-जुकाम, खांसी आदि की समस्याएं होने लगती हैं। कुछ लोगों को ठंड लगने की वजह से कान में दर्द की परेशानी भी उठानी पड़ती है। हालांकि, समय के साथ-साथ यह समस्याएं अपने आप ठीक भी हो जाती हैं। इसलिए, इसको लेकर अक्सर लोग ज्यादा परेशान नहीं होते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि अगर किसी को लंबे समय से कान में दर्द हो रहा है, तो इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए? क्यों, विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक काम में दर्द होना ईयर ट्यूमर का लक्षण भी हो सकता है। आइए, जानते हैं इसके अन्य लक्षणों और संबंधित इलाज के बारे में। इस बारे में हमने Noida स्थित Fortis Hospital में Senior Medical Oncologist डॉ. मनीष शर्मा से बातचीत की।
ईयर ट्यूमर क्या है?
ईयर ट्यूमर कान के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसमें कान का बाहरी, अंदरूनी आर बीच का हिस्सा शामिल होता है। आमतौर पर कान के ट्यूमर ज्यादा सॉफ्ट और नॉन कैंसेरियस होते हैं। लेकिन, इसकी वजह से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी तरह का ट्यूमर आपके कान में नजर आ रहा है, लेकिन कोई लक्षण उभरकर नहीं आ रहे हैं, तो ऐसी कंडीशन में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती है। हां, अगर लक्षण दिखे, तो इसकी अनदेखी करना सही नहीं है। आपको बता दें कि ईयर ट्यूमर टिश्यूज के असामान्य ग्रोथ को कहते हैं, जो कि गांठ की तरह दिखता है और ये कान में या इसके आसपास बनता है।
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ईयर ट्यूमर के लक्षण
ईयर ट्यूमर कान के किस हिस्से में हुआ है, इसी आधार पर इसके लक्षण नजर आते हैं। लेकिन, कुछ सामान्य लक्षण दिखते हैं, जैसे-
- कान के बाहरी हिस्से में उभार आना
- चक्कर आना या बैलेंस बनाने में दिक्कत होना
- कान से खून आना या किसी खास किस्म का फ्लूइड रिसना
- कान में दर्द होना
- ईयर ट्यूमर की वजह से सिर दर्द होना
- सुनने की क्षमता कमजोर होना
- कान में घाव होना, जिसकी रिकवरी में सामान्य से अधिक समय लगना
- कान के आसपास की स्किन का रंग बदल जाना और नए मस्से उभर आना
- लिम्फ नोड्स में सूजन।
- कान बजने की समस्या हो जाना
- चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
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ईयर ट्यूमर होने के कारण
कान में ट्यूमर तब होता है, जब आपका शरीर तेजी से कुछ नए सेल्स बनाने लगता है, जो कि किसी गंठ की तरह उभरने लगता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि पुरानी सेल्स भी उतनी तेजी से डेड नहीं होते हैं, जितनी तेजी से होने चाहिए। पुराने और नए सेल्स भी मिलकर ट्यूमर का निर्माण कर सकते हैं। इस तरह, ईयर ट्यूमर बनने की संभावना हो सकती है। बहरहाल, कैंसेरियस ईयर ट्यूमर की बात करें, तो जब सेल्स अनियंत्रित तरी से बढ़ती हैं, तब यह बीमारी होती है। ये सेल्स एक ही जगह में तेजी से फैल सकती हैं। जाहिर है, ऐसा होना सही नहीं है। इसलिए इसका इलाज करवाया जाना चाहिए।
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ईयर ट्यूमर का इलाज
ईयर ट्यूमर का इलाज उसके कारण और लक्षणों पर निर्भर करता है। अगर ईयर ट्यूमर नॉन-कैंसेरियस है, तो इसके इलाज की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि यह सामान्यतः किसी परेशानी का कारण नहीं होता है। वहीं, अगर ईयर ट्यूमर की वजह से सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगती है, तो डॉक्टर जरूरी ट्रीटमेंट कर सकते हैं। जैसे, ईयर ट्यूमर को रिमूव करने के बारे में सोचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसके अन्य लक्षणों पर भी गौर किया जाता है। वहीं, इस तरह के प्रोसीजर को फॉलो करने के लिए रेडिएशन की हाई डोजेज दी जाती हैं। ध्यान रखें प्रक्रिया सर्जरी नहीं कहलाती है।
कुल मिलाकर, कहने की बात ये है कि ईयर ट्यूमर घातक समस्या नहीं है। इसके बावजूद, इसके लक्षणों पर नजर रखी जानी चाहिए। अगर किसी वजह से ईयर ट्यूमर की वजह से सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगती है, तो तुरंत डॉक्टर संपर्क कर अपना इलाज करवाना चाहिए। ईयर ट्यूमर के इलाज के लिए सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी अपनाई जा सकती है।