जानें ऑड-ईवन स्‍कीम से कितना घटा प्रदूषण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 20, 2016

राजधानी दिल्ली में चली ऑड ईवन स्कीम भले ही खतम हो गई हो पर इसकी चर्चा अभी तक सभी गलियारों में सुनी जा सकती है। प्रदूषण पर रोक के लिए चलाई गई दिल्ली सरकार की इस स्कीम पर लोगों की भले ही मिलीजुली प्रतिक्रिया हो, पर एक स्टडी ने दावा किया है कि दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में कमी आई है।  

सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और इंडियास्पेंड नाम के प्राइवेट पोर्टल के डेटा पर आधारित यूएस बेस्ड स्टडी के मुताबिक, जहां पिछले महीने की तुलना में जनवरी 2016 के दौरान नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में एब्सॉल्यूट प्रदूषण लेवल में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, दिल्ली में नई स्कीम के कारण प्रदूषण के स्तरों में 'हल्की बढ़ोतरी' हुई। शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एविडेंस फॉर पॉलिसी डिजाइन ग्रुप के रिसर्चर्स की ज्वाइंट स्टडी में एक से 15 जनवरी के बीच दोपहर के समय प्रदूषकों में 'पक्के तौर पर कमी' पाई गई।राजधानी में कारों से जुड़ी ऑड-ईवन स्कीम के 15 दिनों में हवा में रेस्पिरेबल पॉल्यूटेंट्स (सांस के जरिए शरीर में जाने वाले प्रदूषक तत्वों) के वॉल्यूम में 18 फीसदी तक की कमी आई।

स्टडी के मुताबिक, ऑड-ईवन स्कीम के प्रभावी रहने के दौरान इसका असर 'काफी' अधिक था, दिल्ली के प्रदूषण और इसके आसपास के क्षेत्रों के प्रदूषण में बड़ा अंतर आया। यह स्टडी  है। एपिक-इंडिया के डायरेक्टर अनंत सुदर्शन ने कहा, 'पर्टिक्यूलेट्स (प्रदूषक कण या पीएम 2.5) में औसतन 10-13 फीसदी (कुल 24 घंटों में) और स्कीम की अवधि में (सुबह आठ से रात आठ बजे के बीच) औसतन 18 फीसदी की कमी आई।' उन्होंने कहा, 'रात आठ बजे के बाद (उम्मीद के अनुसार) कोई प्रभाव नहीं था, जिसके कारण ही कुल 24 घंटों का औसत दिन के समय के औसत से नीचे है।'


पीएम 2.5 सभी श्वसनीय प्रदूषकों में सबसे छोटा और सबसे जानलेवा कण है। दिल्ली के प्रदूषण के आंकड़ों की फरीदाबाद, गुडगांव और नोएडा के डेटा के साथ तुलना करके इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया। ऑड-ईवन स्कीम केवल दिल्ली में लागू की गई थी।

 

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