तनाव के कारण प्रभावित होते हैं आपके शरीर के ये 7 अंग, जानें किस हिस्से पर कैसे पड़ता है असर

तनाव (स्ट्रेस) सिर्फ आपके मस्तिष्क पर असर नहीं डालता बल्कि शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है, जिसका असर आपकी सेहत पर पड़ता है। जानें इनके बारे में।

Monika Agarwal
Written by: Monika AgarwalUpdated at: Sep 07, 2021 17:18 IST
तनाव के कारण प्रभावित होते हैं आपके शरीर के ये 7 अंग, जानें किस हिस्से पर कैसे पड़ता है असर

अगर आप भी स्ट्रेस अधिक लेते हैं तो आपको यह तो पता होगा कि यह आपकी मानसिक सेहत के लिए बहुत खतरनाक होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्ट्रेस लेने से आपकी शारीरिक सेहत भी खतरे में आ जाती है? अगर आप स्ट्रेस लेते हैं और उसे अपने अंदर ही दबा कर रखते हैं और किसी से अपने मन की बात साझा नहीं करते हैं। तो वह स्ट्रेस आपके शरीर के लिए एक दबाव बन जाता है। शायद आपको नहीं मालूम होगा कि हमारा शरीर भी स्ट्रेस को अलग अलग हिस्सों में स्टोर करने लगता है। जिस कारण आपको दर्द आदि का सामना करना पड़ता है। हमारे शरीर के वह हिस्से उस दर्द, तनाव, चिंता और मांसपेशियों में तनाव आदि को आसानी से व्यक्त कर देते हैं। लेकिन शरीर के कुछ और भी हिस्से हैं जो तनाव को स्टोर करते हैं।  आइए जानते हैं।

1. तनाव का कमर पर क्या पड़ता है असर

हम जिस गुस्से या भावों को बाहर नहीं निकाल पाते हैं, उसका अधिकतर हिस्सा आपकी कमर में स्टोर हो कर रह जाता है। निचले कमर के भाग में दर्द होने का स्ट्रेस भी एक मुख्य कारण हो सकता है। क्रोनिक स्ट्रेस के कारण आपके नर्वस सिस्टम का वह भाग एक्टिवेट हो जाता है जो आपकी रीढ़ की हड्डी पर अधिक प्रेशर डालता है। इसलिए अगर आप इस दर्द से छुटकारा पाना चाहते हैं तो अपने गुस्से या स्ट्रेस को दूसरों के सामने बयान करना सीखें।

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2. आपके पेट पर क्या पड़ता है असर?

हमारा पेट और हमारी आंतें हमारे डर का भाव स्टोर करती हैं। अगर आपको अचानक से कोई भाव महसूस होता है या आपको डर लगता है तो आपके पेट के हिस्से में खिंचाव महसूस होता है और कई बार दर्द भी महसूस हो सकता है। इससे पाचन तंत्र में समस्या आती है और आपको गैस, पेट फूलना और कब्ज जैसी काफी सारी पाचन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आपको अपना डर का सामना करना चाहिए या इसके बारे में किसी से बात करनी चाहिए।

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3. सिर पर पड़ता है बुरा असर

कई बार जब आप अधिक चिंता या परेशानी में होंगे तो आपका सिर बड़े जोरों से दुखने लगता होगा। इसके पीछे हम यह कारण कह सकते हैं कि आप अपनी भावनाओं से नियंत्रण खो रहे हैं और बहुत अधिक सोच रहे हैं, जिससे मस्तिष्क की नसों पर दबाव बढ़ रहा है। इसके द्वारा आपके सिर में दर्द का कारण बनती है। यह स्थिति आपकी क्रोनिक माइग्रेन का एक कारण भी बन सकता है। इसलिए आपको अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए।

4. कंधे पर भी होता है असर

अगर आपको काम या अन्य किसी चीज का अधिक प्रेशर महसूस होता है या काफी बर्डन महसूस होता है। तो आपको कंधों में दर्द महसूस हो सकता है। अधिक प्रेशर लेने से आपके कंधों और गर्दन की मांसपेशियां दुखने लग सकती हैं। हमारे शरीर का अधिक प्रेशर लेने के कारण यह रिस्पॉन्स प्राकृतिक होता है।

5. नींद भी होती है खराब

हमारी नींद भी हमारे द्वारा ली जाने वाले स्ट्रेस के कारण बहुत प्रभावित होती है। अगर आप कोई जिंदगी बदल देने वाले जज्बातों से परेशान हैं और इस कारण अधिक स्ट्रेस ले रहे हैं तो इससे आप को रात में चैन की नींद नहीं आती। ऐसा बहुत अधिक सोचने के कारण भी हो सकता है। अगर आप लंबे समय तक बिना सोए रहते हैं तो आपको इनसोम्निया (अनिद्रा) जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है।

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6. जबड़े पर तनाव का असर

बहुत से लोग जब स्ट्रेस लेते हैं तो वह अपने जबड़े पर अधिक प्रेशर डालते हैं। दरअसल जबड़े का कनेक्शन हार्ट (हृदय) से होता है और तनाव के कारण हार्ट की पंपिंग बढ़ जाती है इसलिए जबड़े में दर्द की शिकायत हो सकती है। कई बार बहुत अधिक तनाव होने पर लोग अपने नाखून खाने लगते हैं या कोई चीज दांत से चबाने लगते हैं, जिसके कारण भी जबड़े दुख सकते हैं। इससे आपकी गर्दन की मसल्स पर प्रभाव पड़ता है। आपकी इस आदत का प्रभाव आपके जबड़े और गर्दन और माथे में होने वाली झुर्रियों पर पड़ता है।

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7. आपके फेफड़ों पर भी होता है असर

बहुत से लोगों की स्ट्रेस के कारण उनके फेफड़े भी प्रभावित होते हैं। इससे हमारे डायाफ्राम में स्ट्रेस स्टोर होने लगता है। इससे छाती में कॉन्ट्रैक्शन होता है और इससे आपके फेफड़े के आसपास भी जगह नहीं बच पाती है जिस कारण वहां प्रेशर बन जाता है। यही कारण है कि कई बार अचानक तनाव की स्थिति पैदा होने पर सांस की गति बढ़ जाती है क्योंकि फेफड़ों में संकुचन बढ़ने लगता है।

तो यह थे कुछ ऐसे बॉडी पार्ट जिन पर आपके द्वारा ली जाने वाली स्ट्रेस का प्रभाव पड़ता है। इसलिए तनाव लेने से बचें और कोशिश करें कि आप हमेशा तनावमुक्त रहें।

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