Fri Sep 11, 2026 | 06:50 PM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

क्या दौड़ते समय आपके घुटनों में होता है दर्द? इन 5 गलतियों को न करें नजरअंदाज

रन‍िंग एक सेहतमंद एक्‍सरसाइज है ज‍िससे वजन कंट्रोल होता है, शुगर लेवल घटता है और बॉडी फ‍िट रहती है, लेक‍िन गलत ढंग से रनिंग करेंगे, तो पैर और घुटनों पर अत‍िर‍िक्‍त जोर पड़ेगा और घुटनों में दर्द हो सकता है। जानें रन‍िंग के दौरान कौन सी गलत‍ियों से बचना चाह‍िए?

रन‍िंंग करना सेहत के ल‍िए फायदेमंद होता है। दौड़ने से कैलोरी बर्न करने में मदद म‍िलती है और वेट लॉस होता है। दौड़ने से शारीर‍िक क्षमता बेहतर होती है, दौड़ने से स्‍ट्रेस और एंग्‍जाइटी जैसी समस्‍याएंं भी दूर होती हैं, लेक‍िन गलत ढंग से दौड़ने के कारण सेहत पर उल्‍टा असर भी हो सकता है। अगर आपके दौड़ने का तरीका सही नहीं है, तो पैरों पर दबाव पड़ता है ज‍िससे घुटनों या पैरों में दर्द हो सकता है। दौड़ने के दौरान केवल इस बात पर गौर करना काफी नहीं है क‍ि आप क‍ितनी देर दौड़ रहे हैं या क‍ितनी स्‍पीड में दौड़ रहे हैं। रन‍िंग का सही तरीका अपनाना भी जरूरी है ताक‍ि शरीर में कोई चोट न लगे या दर्द न हो। इस लेख में जानेंगे रन‍िंंग के दौरान की जाने वाली कुछ आम गलत‍ियों के बारे में। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Director Ozefit Fitness Club, Australia & Certified Fitness Coach Payal Asthana से बात की।

1. जरूरत से ज्‍यादा दौड़ना- Excess Running

Fitness Coach Payal Asthana ने बताया क‍ि अगर जरूरत से ज्‍यादा दौड़ेंगे, तो चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है। Journal of Orthopaedic & Sports Physical Therapy के मुताब‍िक अगर आपने दौड़ना शुरू क‍िया है, तो शुरुआत में 10 प्रत‍िशत प्रत‍ि हफ्ते के ह‍िसाब से स्‍पीड न बढ़ाएं। ज्‍यादा तेज या जरूरत से ज्‍यादा दौड़ेंगे, तो घुटनों में दर्द या नसों में दर्द हो सकता है।

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2. बॉडी पॉश्चर खराब होना- Bad Body Posture

अगर रन‍िंग के दौरान आपका बॉडी पॉश्चर सही नहीं है, तो भी आपको घुटनों में या हाथों में दर्द हो सकता है। हाथों का एंगल ऐसे होना चाह‍िए जैसे 90 ड‍िग्री बनता है। बाजुओं को शोल्‍डर की जगह से घुमाएं न क‍ि काेहनी की जगह से। ऐसी कल्‍पना करें जैसे एक सीधी लाइन आपके शरीर के बीच से जा रही है और आपके हाथों को उस रेखा को क्रॉस नहीं करना है, ठीक ऐसे रन‍िंग करें।

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3. ज्‍यादा स्‍पीड में दौड़ना- Running In Fast Speed

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जो लोग रन‍िंग करते हैं वो अक्‍सर जरूरत से ज्‍यादा तेज स्‍पीड में दौड़ने की कोश‍िश करते हैं। इससे बैलेंस, तो ब‍िगड़ता ही है साथ ही घुटनों में दर्द भी हो सकता है। सही तरीका यह है क‍ि पहले आप सामान्‍य स्‍पीड में दो से तीन क‍िलोमीटर रन‍िंग करें फ‍िर धीरे-धीरे स्‍पीड बढ़ाएं, इससे शरीर पर जोर नहीं पड़ेगा।

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4. रन‍िंग के दौरान ब्रेक न लेना- No Breaks While Running

अगर दौड़ने के दौरान आप समय-समय पर ब्रेक नहीं लेंगे, तो शरीर या घुटनों में दर्द हो सकता है। समय-समय पर ब्रेक लें और हर आधे घंटे के बाद अपनी स्‍पीड को आधा कर दें। इस तरह आप लंबे वक्‍त तक रन‍िंग कर पाएंगे और बॉडी पेन या पैरों में दर्द भी नहीं होगा। केवल स्‍पीड कम करने को ब्रेक न समझें, हर 40 म‍िनट के बाद पांंच या दस म‍िनट का ब्रेक लें ज‍िसमें स्‍ट्रेच‍िंग करें और पानी प‍िएं।

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5. रन‍िंग में पहले पैर आगे न झुकाएं- Do Not Move Feet Forward First While Running

अगर आप र‍न‍िंग कर रहे हैं, तो पहले पैर को आगे न झुकाएं। खासकर ढलान पर हैं, तो इस बात का खास ख्‍याल रखें। यानी आपको रनिंग के दौरान एड़ी से पहले जमाने की कोश‍िश नहीं करनी है। इससे पैरों पर जोर पड़ता है और घुटनों में दर्द हो सकता है। कुछ रनर दौड़ने की क्षमता को बेहतर करने के ल‍िए ऐसा करते हैं, लेक‍िन इससे पैरों पर जोर पड़ सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

घुटने के दर्द से बढ़ने के ल‍िए ज्‍यादा स्‍पीड में या ज्‍यादा देर के ल‍िए रन‍िंग न करें, रन‍िंंग के दौरान ब्रेक न लेने की गलती से बचें, बॉडी पॉश्चर को ठीक रखें और रन‍िंग में एड़ी से पहले पैर को जमाने की कोश‍िश न करें।

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FAQ

  • एक द‍िन में क‍ितनी रन‍िंग करना चाह‍िए?

    एक द‍िन में 15 से 20 म‍िनट रन‍िंग करना काफी है। 15 से 20 म‍िनट का मतलब है लगभग तीन से पांच क‍िलोमीटर दौड़ना सेहत के ल‍िए फायदेमंद है।
  • रोज दौड़ने के क्‍या फायदे हैं?

    रोज दौड़ने से वजन कम होता है, स्‍ट्रेस कंट्रोल होता है, मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ता है, मानस‍िक सेहत बेहतर होती है, ह्रदय रोगों का खतरा कम होता है और शरीर की एनर्जी बढ़ती है।
  • दौड़ने की शुरुआत कैसे करें?

    दौड़ने के ल‍िए पांच म‍िनट के ल‍िए वार्म अप करें, फ‍िर कुछ देर ब्र‍िस्‍क वॉक करें और फ‍िर एक म‍िनट दौड़ें और दो मि‍नट चलने का प्रयास करें। फ‍िर इसे दोहराएं। जैसे-जैसे आपकी बॉडी सहज हो जाए, स्‍पीड बढ़ाएं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 13, 2026 16:44 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 13, 2026 16:44 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Payal Asthana

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