रिएक्टिव अर्थराइटिस: 20-40 की उम्र में जोड़ों का दर्द व सूजन हो सकते हैं इस रोग का संकेत, जानें लक्षण और इलाज

रिएक्टिव अर्थराइटिस आमतौर पर 20 से 40 साल तक की उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जानते हैं इसके लक्षण, कारण और उपचार...

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Oct 22, 2021
रिएक्टिव अर्थराइटिस: 20-40 की उम्र में जोड़ों का दर्द व सूजन हो सकते हैं इस रोग का संकेत, जानें लक्षण और इलाज

जोड़ों के दर्द का एक कारण रिएक्टिव अर्थराइटिस (Reactive Arthritis) भी हो सकता है। जब किसी व्यक्ति को रिएक्टिव अर्थराइटिस होता है तो इसके कारण उसकी बॉडी के किसी भी हिस्से में संक्रमण फैल सकता है और लक्षणों के रूप में सूजन आ सकती है इसमें मूत्र मार्ग, आंतें और जननांग शामिल हैं। आज का हमारा लेख रिएक्टिव अर्थराइटिस के बारे में है। आज हम आपको अपनी इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि रिएक्टिव अर्थराइटिस होने पर व्यक्ति को क्या क्या लक्षण नजर आ सकते हैं। साथ ही इसके कारण और उपचार के बारे में भी जानेंगे। इसके लिए हमने जॉव्इंट केयर फिजियोथेरेपी एंड रेहाब सेंटर ग्रेटर नोएडा के डॉक्टर अंकुर नागर (Physiotherapist Dr. Ankur Naagar) से बात की है। पढ़ते हैं आगे...

किस हिस्से को प्रभावित कर सकती है रिएक्टिव अर्थराइटिस?

रिएक्टिव अर्थराइटिस मुख्यतौर पर घुटने में, टखने में, हाथों पैरों के जोड़ों को प्रभावित कर सकता है। वहीं इसके कारण व्यक्ति की कई हिस्सों में सूजन आ सकती है। ध्यान दें कि रिएक्टिव अर्थराइटिस कम व्यक्तियों को प्रभावित करती है ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लक्षण जितनी जल्दी आती है वह चले भी जाते हैं।

रिएक्टिव अर्थराइटिस किस उम्र के लोगों को प्रभावित करती है?

बता दें कि वैसे तो यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति में देखी जा सकती है। लेकिन सबसे ज्यादा समस्या का शिकार 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों होते हैं। इनकी महिलाओं की तुलना में पुरुष इस समस्या से ज्यादा व्यस्त हो सकते हैं। इसे़से संबंधित पूरी जानकारी के बारे में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

इसे भी पढ़ें- लड़कियों को क्यों रहता है अर्थराइटिस का ज्यादा खतरा? डॉक्टर से जानें अर्थराइटिस के सभी प्रकार और उनके लक्षण

रिएक्टिव अर्थराइटिस के कारण क्या हैं?

बता दें कि अर्थराइटिस के पीछे कुछ बैक्टीरिया जिम्मेदार होते हैं जो खाद्य पदार्थों के कारण या यौन संक्रमण के कारण शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इन बैक्टीरिया में माइडिया, साल्मोनेला, शिगेला, कैम्पिलोबैक्टर, क्लोस्ट्रीडियम डिफ्फिसिल आदि शामिल हैं। ध्यान दीजिए जो बैक्टीरिया दूषित खाने या यौन के कारण पैदा होते हैं उनके संपर्क में आने से रिएक्टिव अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है।

रिएक्टिव अर्थराइटिस के लक्षण

जब किसी व्यक्ति को रिएक्टिव अर्थराइटिस होता है, तो निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं-

1 - दस्त की समस्या होना

2 - पेशाब करते वक्त दर्द महसूस करना।

3 - रीढ़ की हड्डी में दर्द महसूस करना।

4 - आंखों के आस-पास सूजन आ जाना।

5 - मुंह में छाले निकल आना।

6 - मूत्र पथ में सूजन महसूस करना।

ध्यान दें कि इससे अलग कुछ और भी लक्षण हैं जो व्यक्ति को नजर आ सकते हैं। ऐसे में ऊपर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इसे भी पढ़ें-ं क्या एक्सरसाइज से अर्थराइटिस को कंट्रोल किया जा सकता है? जानें अर्थराइटिस में एक्सरसाइज से जुड़ी सावधानियां

रिएक्टिव अर्थराइटिस का उपचार क्या है?

1 - वाटर वॉकिंग की मदद से रिएक्टिव अर्थराइटिस को बढ़ने से रोका जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वाटर वॉकिंग यानि पानी में चलना जब व्यक्ति पानी में चलता है तो उसके जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है।

2 - वाटर एरोबिक्स के माध्यम से भी जोड़ों पर कम प्रभाव पड़ता है। इस प्रतिक्रिया में व्यक्ति का पूरा शरीर पानी में होता है केवल गर्दन और चेहरा ऊपर की तरफ होता है ऐसे में व्यक्ति के शरीर पर खासकर जोड़ों पर कम प्रभाव पड़ता है।

3 - ट्रेडमिल के माध्यम से भी अर्थराइटिस की समस्या को रोका जा सकता है। ऐसे में आप ट्रेडमिल के उपयोग से जोड़ों को मजबूत कर सकते हैं और अपने स्टैमिना के आधार पर ट्रेडमिल की स्पीड को बढ़ा या घटा सकते हैं।

4 - हमेशा ताजा घर का बना भोजन का ही सेवन करें क्योंकि ऐसे भोजन में बैक्टीरिया मौजूद नहीं हो सकते हैं।

नोट -  ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि अर्थराइटिस इस समस्या के कारण व्यक्ति को शरीर के कई हिस्सों में सूजन या दर्द का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है।

Disclaimer