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नवजात शिशु के पैर क्यों कांपते हैं? जानें कारण और बचाव के तरीके

नवजात श‍िशु के पैर कांपते हैं तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जानते हैं इस समस्‍या के कारण और बचाव के तरीके

नवजात श‍िशु के हाथ या पैर कांपना एक सामान्‍य समस्‍या नहीं है। ऐसा होने पर बच्‍चा रोता है या डर का अनुभव करता है। जन्‍म से पहले अगर मां स्‍ट्रेस में रहती है तो उसका बुरा असर बच्‍चे पर पड़ता है और जन्‍म के बाद बच्‍चे के कमजोर तंत्र‍िका तंत्र को प्रभाव‍ित करता है ज‍िसके चलते शरीर के क‍िसी अंग या पैर में कंपन जैसे लक्षण देखने को म‍िल सकते हैं। प्‍लेसेंटा के अलग होने, गर्भनाल के साथ भ्रूण के उलझने जैसे जटिलताओं के कारण भी नवजात श‍िशु के पैर में कंपन की समस्‍या हो सकती है। बच्‍चे के मस्‍त‍िष्‍क तक पर्याप्‍त ऑक्‍सीजन न पहुंचने के कारण भी ये समस्‍या हो सकती है। मांसपेश‍ियों में कमजोरी के कारण पैर में कंपन की समस्‍या हो सकती है। नवजात श‍िशुओं में ये समस्‍या आगे चलकर बढ़ सकती है इसल‍िए समय पर इलाज जरूरी है। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की।

newborn leg shiver causes

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नवजात श‍िशुओं में पैर कांपने के लक्षण (Symptoms of leg shivers in newborn)

हालांक‍ि कभी-कभी होने वाली ये समस्‍या उतनी गंभीर नहीं है। बच्‍चे की उम्र बढ़ने के साथ ये समस्‍या दूर भी हो जाती है। अगर आप ध्‍यान नहीं देंगे तो कंपकंपी की समस्‍या बढ़ सकती है और ये लक्षण समय के साथ गंभीर रूप ले सकते हैं- 

  • पैर में कंपन की समस्‍या के कारण बच्‍चे बार-बार रोते हैं।
  • अगर उनके पैर में कंपकंपी हो रही है तो उनकी नींद बार-बार खुल सकती है।
  • पैर में कंपन होने पर बच्‍चे अपने पैर को ह‍िलाते नजर आ सकते हैं।

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नवजात श‍िशुओं के पैर में कंपकंपी क्‍यों होती है? (Causes of leg shivers in newborn)

नवजात श‍िशुओं के पैर में कंपकंपी के कई कारण हो सकते हैं। नवजात श‍िशुओं में कंपकंपी या पैर में कंपन की समस्‍या सामान्‍य नहीं है, ऐसे लक्षण नजर आने पर डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए। प्रसव के समय ऑक्‍सीजन की कमी के कारण नवजात श‍िशु हाइपोक्‍स‍िया के श‍िकार जाते हैं ज‍िसके चलते मांसपेश‍ियां पूरी तरह से व‍िकस‍ित नहीं हो पातीं और पैर में कंपन की समस्‍या हो सकती है। पैर में कंपन की समस्‍या न्‍यूरोलॉज‍िकल बीमारी के कारण भी हो सकती है। अगर श‍िशु का जन्‍म समय से पहले हुआ है तो उनमें मांसपेश‍ियों में कमजोरी की समस्‍या हो सकती है ज‍िसके चलते हाथ या पैर में कंपन की समस्‍या सामने आ सकती है। ज्‍यादा देर तक एक ही तरफ सोने के कारण भी मांसपेश‍ियों पर जोर पड़ता है और कंपकंपी की समस्‍या हो सकती है।

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नवजात श‍िशु को पैर में कंपन की समस्‍या से कैसे बचाएं? (How to prevent newborn leg shivers)

newborn leg shiver

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  • आपको बता दें क‍ि नवजात श‍िशु या ज‍िन बच्‍चों की उम्र एक साल से कम है उनके ल‍िए फ‍िजि‍योथैरेपी की सलाह नहीं दी जाती है।
  • गर्भावस्‍था के दौरान ओमेगा 3 फैटी एस‍िड और सभी जरूरी न्‍यूट्र‍िएंट्स का सेवन करें।
  • पैर में कंपन की समस्‍या से नवजात श‍िशु को बचाने के ल‍िए आप बच्‍चे के पैर की माल‍िश करें। माल‍िश करने से मांसपेश‍ियों को मजबूती म‍िलती है। 
  • बच्‍चे को पैर कांपने की समस्‍या से बचाने के ल‍िए आप गुनगुने पानी से स्‍नान करवा सकते हैं, इससे बच्‍चे की मांसपेश‍ियां खुलेंगी।
  • आप बच्‍चे के हाथ और पैरों को मूवमेंट में रखें, हल्‍के हाथ से सहलाएं। इससे मांसपेश‍ियां अच्‍छी तरह से काम करती हैं और कंपन की समस्‍या नहीं होती।

पैर में कंपन की समस्‍या से बच्‍चे को बचाने के ल‍िए आप गर्भावस्‍था के समय सभी जरूरी पोषक तत्‍वों का सेवन करें और जन्‍म के बाद बच्‍चे की माल‍िश करें, अगर पैर में कंपन के लक्षण दो हफ्ते से ज्‍यादा समय के ल‍िए बने रहते हैं तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 05, 2022 15:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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