Tue Oct 13, 2026 | 05:01 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Chopra , Pediatrician and Neonatologist

नवजात शिशु को पीलिया क्‍यों होता है? डॉक्‍टर से समझें कारण, लक्षण और इलाज

श‍िशु के ब्‍लड में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने से त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ जाता है। इस स्‍थ‍िति‍ को पील‍िया कहते हैं। डॉक्‍टर से जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज।
नवजात शिशु को पीलिया क्‍यों होता है? डॉक्‍टर से समझें कारण, लक्षण और इलाजनवजात शिशु को पीलिया क्‍यों होता है? डॉक्‍टर से समझें कारण, लक्षण और इलाज

बिलीरुबिन (Bilirubin) एक पीले रंग का पदार्थ होता है, जो शरीर में पुराने रेड ब्‍लड सेल्‍स के टूटने से बनता है। जब शरीर में ब‍िलीरुब‍िन की मात्रा बढ़ जाती है, तो त्‍वचा और आंखों का सफेद ह‍िस्‍सा भी पीला द‍िखने लगता है। इसे ही पील‍िया (Jaundice) कहा जाता है। जब यह पील‍िया नवजात श‍िशुओं में होता है, तो इसे नियोनेटल जॉन्डिस (Neonatal Jaundice) कहते हैं। अब सवाल यह उठता है क‍ि यह समस्‍या श‍िशुओं में क्‍यों होती है और त्‍वचा में पीलेपन के अलावा और कौन से लक्षण नजर आते हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Abhishek Chopra, Senior Consultant- Neonatologist And Pediatrician At Cloudnine Group Of Hospitals, New Delhi से बात की।

नवजात श‍िशुओं में पील‍िया होने के कारण

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  • नवजात श‍िशु में पीलिया का मुख्य कारण है बिलीरुबिन का बढ़ना है।
  • शरीर में रेड ब्‍लड सेल्‍स का ज्‍यादा होना।
  • प्रीमेच्‍योर ड‍िलीवरी।
  • श‍िशु का क‍िसी कारण से स्‍तनपान न कर पाना।
  • शरीर में ऑक्‍सीजन की कमी।
  • मां और बच्चे का ब्लड ग्रुप अलग होना।
  • ल‍िवर की बीमारी होना।

साल 2024 में BMC Pregnancy And Childbirth में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, श‍िशुओं में पील‍िया होने के पीछे प्रीमेच्‍योर ड‍िलीवरी एक मुख्‍य कारण पाया गया। इसके अलावा 35 साल से अध‍िक उम्र की मांओं के श‍िशुओं में यह खतरा ज्‍यादा देखा गया।

ज्‍यादातर पील‍िया के केस सामान्‍य होते हैं

अक्‍सर नवजात श‍िशुओं को पील‍िया की समस्‍या होती है, यह कॉमन इसल‍िए है क्‍योंक‍ि नवजात श‍िशुओं का ल‍िवर पूरी तरह से व‍िकस‍ित नहीं होता है ज‍िसके कारण ब‍िलीरुब‍िन शरीर से बाहर नहीं न‍िकल पाता और नवजात श‍िशु को पील‍िया हो जाता है। ज्‍यादातर मामलों में नवजात श‍िशु को होने वाला पील‍िया सामान्‍य होता है और अपने आप ठीक हो जाता है, लेक‍िन जब इसका लेवल बढ़ता है, तो कुछ रेयर गंभीर मामलों में ब्रेन सेल्‍स को नुकसान हो सकता है या सुनने की क्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है।

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नवजात श‍िशुओं में पील‍िया के लक्षण

  • सबसे कॉमन लक्षण है श‍िशु की त्‍वचा का पीला पड़ना।
  • ज‍िन बच्‍चों की त्‍वचा का रंग गहरा है, उनमें पील‍िया के लक्षण समझने के ल‍िए आंख और जीभ का रंग चेक करके अंदाजा लगाया जा सकता है।
  • दूध ठीक से न पी पाना।
  • पेशाब का रंग गहरा होना।

श‍िशुओं में पील‍िया क‍ितने प्रकार का होता है?

  1. पैथोलॉज‍िकल जॉन्‍ड‍िस जन्‍म के 24 घंटे के भीतर होती है। यह तेजी से बढ़ता है इसल‍िए तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।
  2. दूसरा है फिजियोलॉजिकल पीलिया ज‍िसमें जन्‍म के दूसरे या तीसरे द‍िन पील‍िया के लक्षण नजर आते हैं।
  3. तीसरा है ब्रेस्‍टफीड‍िंग जॉन्‍ड‍िस ज‍िसमें शि‍शु को पर्याप्‍त मां का दूध न म‍िल पाने के कारण पील‍िया की संभावना बढ़ सकती है।

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नवजात श‍िशुओं में पील‍िया की जांच कैसे होती है?

टोटल सीरम ब‍िलीरुब‍िन जांच के जर‍िए पील‍िया का पता लगाया जाता है। इसमें बिलीरुबिन के स्तर के आधार पर इलाज क‍िया जाता है। जरूरत पड़ने पर सीबीसी या हीमोग्‍लोब‍िन टेस्‍ट क‍िया जाता है। साल 2024 में Global Pediatrics में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, कुछ श‍िशुओं में बिलीरुबिन का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इससे ब्रेन डैमेज जैसी गंभीर समस्या का खतरा हो सकता है। इसलिए पीलिया की समय पर पहचान जरूरी है।

नवजात श‍िशुओं में पील‍िया का इलाज कैसे होता है?

फोटोथेरेपी

अगर बि‍लीरुबि‍न का लेवल अध‍िक हो या लगातार तेजी से बढ़ रहा हो, तो डॉक्‍टर फोटोथेरेपी तकनीक की मदद लेते हैं ज‍िसमें श‍िशु को नीली रोशनी के नीचे रखा जाता है।

स्‍तनपान

हल्के पीलिया में जैसे-जैसे शि‍शु का लिवर विकसित होता है, तो पीलि‍या खुद ही ठीक हो जाता है। पील‍िया में श‍िशु को बार-बार स्‍तनपान कराना मददगार हो सकता है। इससे न‍ियम‍ित मल त्‍याग होता है और शरीर से अत‍िर‍िक्‍त ब‍िलीरुब‍िन बाहर न‍िकालने में मदद म‍िलती है।

एक्सचेंज ब्लड ट्रांसफ्यूजन

अगर फोटोथेरेपी से बिलीरुबिन का लेवल कम नहीं होता है, तो डॉक्टर एक्सचेंज ब्लड ट्रांसफ्यूजन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में श‍िशु के शरीर से ब्‍लड की कुछ मात्रा को निकालकर उसकी जगह ताजा ब्‍लड दिया जाता है। हालांक‍ि, कम मामलों में इसकी जरूरत पड़ती है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

Mayo Clinic के मुताब‍िक, जन्‍म के 24 से 48 घंटों के बीच बिलीरुबिन की जांच की जा सकती है।
अगर बच्चे की त्वचा का पीलापन बढ़ रहा हो।

  • आंखें ज्यादा पीली दिखें।
  • बच्चा बहुत सुस्त हो।
  • जगाने में मुश्किल हो। दूध ठीक से न पी रहा हो

न‍िष्‍कर्ष:

नवजात श‍िशु में पीलिया का मुख्य कारण है बिलीरुबिन का बढ़ना। पील‍िया में श‍िशु की त्‍वचा, आंख और जीभ का रंग पीला द‍िख सकता है। नवजात श‍िशु को पील‍िया होने पर फोटोथेरेपी की मदद ली जाती है। गंभीर और रेयर केस में एक्सचेंज ब्लड ट्रांसफ्यूजन की भी जरूरत होती है। सामान्‍य मामले कुछ समय में ठीक हो जाते हैं, इस दौरान डॉक्‍टर श‍िशु को न‍ियम‍ित स्‍तनपान कराने की सलाह देते हैं। अगर श‍िशु की त्‍वचा पर पीलीपन बढ़े, सुस्‍ती हो, तो डॉक्‍टर से सलाह लेना चाह‍िए।

source: magnific

FAQ

  • क‍िन श‍िशुओं को पील‍िया का खतरा हो सकता है?

    जि‍न श‍िशुओं का जन्‍म समय से पहले हो जाता है या जो ठीक से स्‍तनपान नहीं कर पाते हैं, उनमें पील‍िया होने की संभावना ज्‍यादा हो सकती है।
  • नवजात श‍िशुओं में पील‍िया क‍ितने समय तक रहता है?

    आमतौर पर नवजात श‍िशुओं में पीलिया दो हफ्तों में ठीक हो जाता है।

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    Aug 25, 2026 13:04 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Aug 25, 2026 13:04 IST

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