बिलीरुबिन एक पीले रंग का पदार्थ है जो ब्लड में पाया जाता है। ये पुराने रेड ब्लड सेल्स के ब्रेक डाउन होने से बनता है। बिलीरुबिन को लिवर प्रोसेस करने के बाद पित्त (बाइल) के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है। जब लिवर बिलीरुबिन को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता या रेड ब्लड सेल्स तेजी से टूटने लगते हैं, तो शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। ब्लड रिपोर्ट में बिलीरुबीन का बढ़ा हुआ स्तर, तो नजर आता है, लेकिन यह नहीं पता चलता कि इसके पीछे क्या कारण है? कुछ संभावित कारणों में फैटी लिवर, दवाओं का असर, हेपेटाइटिस, पित्त में पथरी, पित्त की नली में रुकावट, हीमोलिटिक एनीमिया (रेड ब्लड सेल्स का तेजी से टूटना) और गिल्बर्ट सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक समस्याएं हो सकती हैं। आइए अन्य कारणों को विस्तार से समझते हैं और जानेंगे कि बिलीरुबिन के हाई लेवल से कैसे बचें? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Naveen Polavarapu, Senior Consultant Gastroenterologist, Liver Specialist & Advanced Therapeutic Endoscopist & Endosonologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
बिलीरुबिन की नॉर्मल रेंज क्या है?
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बिलीरुबिन का सामान्य स्तर एक वयस्क में 0.1 से 1.2 mg/dL के बीच होना चाहिए। अगर बिलीरुबिन का स्तर 2.6 से 3 या उससे अधिक है, तो यह पीलिया (Jaundice) की स्थिति हो सकती है। पित्त (बाइल) का काम होता है खाने को पचाना। अगर शरीर स्वस्थ है, तो बिलीरुबिन स्टूल या पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाएगा, लेकिन जब शरीर में कोई समस्या होती है, तो बिलीरुबिन का स्तर बढ़ सकता है।
टोटल और डायरेक्ट बिलीरुबिन में अंतर
| टोटल बिलीरुबिन | डायरेक्ट बिलीरुबिन | बीमारियां |
| ज्यादा | ज्यादा | पित्त की पथरी, हेपेटाइटिस, सिरोसिस |
| ज्यादा | थोड़ा अधिक या सामान्य | गिल्बर्ट सिंड्रोम, हीमोलिटिक एनीमिया |
Harvard Medical School में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, लैब रिपोर्ट में बिलीरुबिन की दो रीडिंग होती है- टोटल बिलीरुबिन और डायरेक्ट बिलीरुबिन।
- अगर टोटल बिलीरुबिन और डायरेक्ट बिलीरुबिन, दोनों का स्तर अधिक है, तो इसके पीछे पित्त की पथरी या लिवर की बीमारी जैसे हेपेटाइटिस या सिरोसिस हो सकता है।
- अगर टोटल बिलीरुबिन बढ़ा हुआ है, लेकिन डायरेक्ट बिलीरुबिन सामान्य है या थोड़ा ही बढ़ा है, तो इसके पीछे गिल्बर्ट सिंड्रोम या हीमोलिटिक एनीमिया हो सकता है।
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नवजात शिशुओं में भी बढ़ सकता है बिलीरुबिन
बिलीरुबिन का लेवल बढ़ने से नवजात शिशुओं को पीलिया हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जन्म के समय बच्चे का लिवर पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता और वह बिलीरुबिन को शरीर से बाहर निकालने में सक्षम नहीं होता।
Mayo Clinic के मुताबिक, एक खास उपकरण से शिशु के शरीर पर रोशनी डालकर बिलीरुबिन के स्तर का अनुमान लगाया है। इसके अलावा, शिशु की एड़ी से ब्लड सैंपल लेकर बिलीरुबिन की जांच की जाती है। नवजात शिशुओं में पीलिया के इलाज के लिए अक्सर फोटोथेरेपी की मदद ली जाती है।
बिलीरुबिन बढ़ने के पीछे के मुख्य कारण
- ज्यादातर मामलों में वायरल हेपेटाइटिस जैसे ए और ई के कारण बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। इसकी शुरुआत बुखार से होती है। इसके अलावा भूख न लगना, आंखों या त्वचा में पीलापन भी नजर आ सकता है।
- ब्लड के जरिए फैलने वाले वायरल हेपेटाइटिस जैसे बी और सी होने के कारण भी बिलीरुबिन बढ़ सकता है।
- लंबे समय तक अल्कोहल का सेवन या अचानक ज्यादा मात्रा में अल्कोहल का सेवन करने से लिवर को नुकसान पहुंचता है और बिलीरुबिन का स्तर बढ़ सकता है।
- कुछ ओवर-द-काउंटर हर्बल या एलोपैथिक दवाओं का सेवन करने से भी बिलीरुबिन का स्तर बढ़ सकता है इसलिए किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह के बगैर दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
- कुछ आनुवंशिक बीमारियां, ऑटोइम्यून और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के कारण भी बिलीरुबिन बढ़ सकता है।
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बिलीरुबिन बढ़ने पर शरीर में दिखने वाले शुरुआती लक्षण
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अगर शरीर में बिलीरुबिन बढ़ने लगे और लिवर में खराबी हो, तो ये लक्षण नजर आ सकते हैं-
- आंखों और त्वचा में पीलापन।
- भूख अचानक कम हो जाना।
- वजन घटना।
- पैरों में सूजन आना।
- उल्टी आना।
- स्टूल में ब्लड आना।
- बेहोशी या चक्कर आना।
बिलीरुबिन की जांच कैसे होती है?
बिलीरुबिन की जांच के लिए लिवर फंक्शन टेस्ट नाम का ब्लड टेस्ट किया जाता है। वहीं दूसरी ओर, लिवर की बीमारी का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है।
बिलीरुबिन को कंट्रोल करने के लिए डाइट टिप्स
- बिलीरुबिन का स्तर ज्यादा है, तो हाई फैट या हाई प्रोटीन डाइट लेने के बजाय लीन प्रोटीन का सेवन करें जैसे सोया और ओट्स। इससे डाइजेशन में दिक्कत नहीं होगी।
- एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल और सब्जियां खाएं ताकि शरीर में फ्री रेडिकल्स का विकास न हो। डाइट में पालक, ब्रोकली, संतरा, कीवी, अनार, बेरीज को डाइट में शामिल कर सकते हैं।
- हेल्दी फैट के विकल्प जैसे बादाम और अखरोट, चिया सीड्स वगैरह खा सकते हैं।
- अधिक नमक और चीनी की मात्रा को कंट्रोल करें और पर्याप्त पानी का सेवन करें।
- धूम्रपान और रेड मीट से परहेज करें।
बिलीरुबिन को कंट्रोल करने के टिप्स
- ऐसा कोई एक खाद्य पदार्थ या घरेलू उपाय नहीं है, जो हर स्थिति में बिलीरुबिन को सुरक्षित तरीके से कम कर सके। इसके लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं और लंबे समय तक भूखे रहने से बचें।
- अगर बिलीरुबिन वायरल हेपेटाइटिस के कारण बढ़ा हुआ है, तो इसे कंट्रोल किया जा सकता है। हेपेटाइटिस ए और ई, दूषित भोजन या पानी का सेवन करने से होता है। साफ-सफाई और हाइजीन का ख्याल रखकर, वैक्सीन लेकर बिलीरुबीन को कंट्रोल कर सकते हैं।
- अल्कोहल का सेवन न करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी दवाएं बंद न करें और न ही कोई सप्लीमेंट लें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
- अगर आंखों या त्वचा में पीलापन
- पेशाब का रंग गहरा होना
- मल का रंग हल्का पड़ना
- बुखार
- पेट दर्द
- उल्टी या असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखाई दें, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।
बिलीरुबिन का इलाज उसके बढ़ने के कारण पर निर्भर करता है। इसलिए जांच कराने में देरी न करें और लिवर को साफ रखने वाले घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें।
निष्कर्ष:
बिलीरुबिन एक पीले रंग जबका पदार्थ है जो ब्लड में मौजूद होता है। ये पुराने रेड ब्लड सेल्स के टूटने से बनता है। जब रेड ब्लड सेल्स तेजी से टूटने लगते हैं या लिवर बिलीरुबिन को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता है, तो इसका लेवल तेजी से बढ़ने लगता है। एक सामान्य वयस्क में बिलीरुबिन का स्तर 0.1 से 1.2 mg/dL के बीच होना चाहिए। बिलीरुबिन के बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे फैटी लिवर की समस्या, दवाओं का असर, हेपेटाइटिस, पित्त में पथरी, पित्त की नली में रुकावट, हीमोलिटिक एनीमिया, गिल्बर्ट सिंड्रोम वगैरह। अगर आंखों या त्वचा में पीलापन, पेशाब का रंग गहरा, बुखार, पेट दर्द, उल्टी, थकान जैसे लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से संपर्क करें। बिलीरुबिन को कंट्रोल करने के लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं और लंबे समय तक भूखे रहने से बचें। खुद से किसी दवा का सेवन न करें और अल्कोहल से परहेज करें। बिलीरुबिन को कंट्रोल करने के लिए लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल और सब्जियां का सेवन करें। ज्यादा चीनी, नमक से बचें। धूम्रपान, रेड मीट, हाई फैट या प्रोटीन से भी परहेज करें।
image credit: magnific, healthians, science.org
FAQ
क्या बिना पीलिया के भी बिलीरुबिन बढ़ सकता है?
हां, हर बार बिलीरुबिन का स्तर ज्यादा होने की वजह से पीलिया नहीं होता। इसका ज्यादा स्तर लिवर की समस्या जैसे फैटी लिवर, सिरोसिस की वजह भी बन सकती है।क्या खाली पेट रहने से बिलीरुबिन बढ़ सकता है?
हां, कुछ लोगों में लो कैलोरी इनटेक, लंबे समय तक भूखा रहने या डिहाइड्रेशन से बिलीरुबिन का लेवल बढ़ सकता है। अक्सर, यह स्थिति गिल्बर्ट सिंड्रोम के मरीजों में देखी जाती है।
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Oct 13, 2026 14:24 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Naveen Polavarapu
