Tue Oct 13, 2026 | 03:05 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sharad Malhotra , Senior Consultant & Director – Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy

कागज में रखकर खाते हैं समोसा या रोटी? डॉक्टर से जानें यह आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक

समोसा, वडा पाव, पकौड़े या जलेबी गर्म-गर्म कागज पर रखकर खाते समय लोगों को महसूस ही नहीं होता है कि ये सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। किताबों और कॉपियों के फाड़े हुए पन्नों की स्याही फूड्स में जाकर पेट को नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टर ने कागज में रखकर खाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से समझाया है। 
कागज में रखकर खाते हैं समोसा या रोटी? डॉक्टर से जानें यह आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाककागज में रखकर खाते हैं समोसा या रोटी? डॉक्टर से जानें यह आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक

अगर आप भी कॉपी या किताब के पन्नों पर समोसा, पकौड़ा या जलेबी रखकर खाते हैं या गर्म-गर्म रोटियां लपेटकर ले जाते हैं, तो यह सेहत को नुकसान हो सकता है। कभी-कभार लोग घरों में तेल सोखने के लिए भी कॉपी-किताब के पन्ने इस्तेमाल कर लेते हैं। ऐसा करने पर कागज पर लगी स्याही और केमिकल उस खाने में मिल जाता है, जो बाद में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है। इस बारे में Dr. Sharad Malhotra, Senior Consultant & Director, Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy, Aakash Healthcare, Delhi ने बताया कि कागज की छपाई और स्याही खाने के अंदर चली जाती हैं। हालांकि, इससे होने वाले नुकसान के बारे में कहना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

कागज में समोसा या पकौड़े रखने से क्या खतरा है?

Dr. Sharad Malhotra ने कहा, “किताब-कॉपी के कागज और उसमें पेन की स्याही के रंग, पिगमेंट, बाइंडर और अन्य केमिकल्स हो सकते हैं। हालांकि, हर कागज पर लिखी गई स्याही एक जैसी नहीं होती, तो यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि हर तरह के छपे हुए कागज से खाने में कितनी मात्रा में कौन सा पदार्थ पहुंचेगा। अगर कुछ गर्म चीजें जैसे समोसा, जलेबी या वड़ा पाव सीधे कागज पर रख दिए जाए, तो सेहत को नुकसान होने का आशंका ज्यादा बढ़ जाती है।”

  • कागज में खाना रखने से पेट दर्द, मतली या खाना न पचने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • कागज में कई तरह के बैक्टीरिया जमा होते हैं, जो फूड में मिलकर दस्त जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं।
  • बच्चों और बुजुर्गों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, तो उन्हें पेट से जुड़ी परेशानियां होने का रिस्क ज्यादा रहता है।

भारत सरकार की सलाह

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी कहा है कि खाना रखने, ढकने या लपेटने के लिए अखबार या इसी तरह के कागज का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होना चाहिए। तले हुए भोजन से अतिरिक्त तेल सोखने के लिए न्यूजपेपर या ऐसे कागज का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ऐसे कागजों में कई केमिकल्स और भारी धातुएं होती हैं, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा हो सकते हैं।

food item wrapped in printed paperfood item wrapped in printed paper

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डॉक्टर से आम पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या गर्म रोटी को कागज में लपेटने से कैंसर की संभावना हो सकती है?

Dr. Sharad Malhotra कहते हैं, “रोटी को सीधे कागज में नहीं लपेटना चाहिए। हालांकि, रोटी में बहुत तेल नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक गर्म रोटी कागज में रहती है और जो लोग लगातार ऐसा करते हैं, उन्हें पाचन से जुड़ी समस्याएं होने का रिस्क हो सकता है, क्योंकि कागज पर भी बैक्टीरिया जमा होते हैं। अक्सर लोग मानते हैं कि ऐसा करने से कैंसर हो सकता है, लेकिन कैंसर होने का सिर्फ यह कारण नहीं हो सकता है। मैं लोगों को कागज में लपेटकर खाना लेकर जाने की सलाह नहीं देता हूं।”

2. प्रेग्नेंट महिलाओं को कागज में रखकर खाना देना सही है?

Dr. Sharad Malhotra ने बताया कि प्रेग्नेंट महिलाओं को कागज में रखकर गर्म या तैलीय चीजें नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इसके केमिकल्स सीधे महिला के गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए प्रेग्नेंसी में महिलाओं को खास तौर पर कागज में रखकर गर्म या तेल से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।

3. क्या बच्चों को कागज में रखकर खाने देने से दस्त की समस्या हो सकती है?

Dr. Sharad Malhotra ने कहा, “कॉपी या किताब के कागज कई हाथों से गुजरते हैं। कई बार इन्हें कबाड़ की जगह पर रखा जाता है, जो धूल-मिट्टी से भरी होती है। ऐसे में उस कागज पर रखकर खाना खाने से पेट से जुड़े इंफेक्शन हो सकते हैं। बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, ऐसे में गंदे और धूल भरे कागज से बच्चों के पेट से जुड़े इंफेक्शन हो सकते हैं। इसमें दस्त या उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।”

खाना पैक करने के बेहतर विकल्प कौन से हैं?

Dr. Sharad Malhotra ने बताया कि खाने को सुरक्षित रखने के लिए इन आदतों को अपनाया जा सकता है।

  • घर पर गर्म रोटी, समोसा और पकौड़े रखने के लिए साफ स्टील की प्लेट का इस्तेमाल करें।
  • बाहर से खाना खरीदते समय FSSAI अप्रूव पैकेजिंग पेपर में ही लें।
  • तले हुए खाने के नीचे कागज रखने के बजाय सही ऑयल-अब्जॉर्बिंग पेपर का इस्तेमाल करें।
  • खाना रखने के लिए प्लास्टिक का कंटेनर सोच-समझकर इस्तेमाल करें। प्लास्टिक का वही कंटेनर इस्तेमाल करें, जिसमें खाना गर्म रखा जा सकता है।
  • खाने को ढककर रखें, ताकि उसमें धूल, मिट्टी और गंदगी न जाए।

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निष्कर्ष
किताब या कॉपी के कागजों में समोसा, पकौड़े या जलेबी जैसी चीजें रखकर न खाएं और रोटी पैक करते हुए भी किताबों के कागज फाड़कर पैक न करें। इससे पेट से जुड़ी समस्याएं होने का रिस्क बढ़ सकता है। कागज में पैकिंग करने के बजाय फूड-ग्रेड पैकेजिंग का इस्तेमाल करें।

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FAQ

  • क्या सादे सफेद कागज का इस्तेमाल सुरक्षित है?

    यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। सादे सफेद कागज को चमकीला और सफेद बनाने के लिए ब्लीचिंग एजेंट्स और फ्लोरोसेंट केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। गर्म भोजन रखने पर ये केमिकल्स खाने में मिल सकते हैं। इसलिए हमेशा सिर्फ फूड-ग्रेड पेपर का ही इस्तेमाल करें।
  • क्या रीसायकल किए गए पेपर बैग या भूरे लिफाफों में खाना रखना सही है?

    साधारण रीसायकल पेपर सुरक्षित नहीं होता। इसे बनाने के दौरान पुराने कार्डबोर्ड, केमिकल्स और प्रिंटेड कचरे का इस्तेमाल होता है, जिनमें मिनरल ऑयल्स और भारी धातुएं मौजूद हो सकती हैं। अगर भूरे लिफाफे पर फूड ग्रेड सर्टिफाइड लिखा हो, तो ही सुरक्षित है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 13, 2026 13:28 IST

    Published By : Aneesh Rawat
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