भारतीय खाने में घी को शामिल किया जाता है। इसको लोग सब्जियों या दालों में डालकर या रोटी पर लगाकर खाते हैं। इसका सेवन करने से स्वास्थ्य को दुरुस्त करने और शरीर को पोषण देने में मदद मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार, घृत यानी घी का खास महत्व है, लेकिन घी को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल आते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि घी खाने से शरीर में गर्मी बढ़ती है, लेकिन क्या वाकई में ऐसा है और घी की तासीर क्या है? आइए इस बारे में सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से जानें।
ज्यादा घी खाने से शरीर में गर्मी बढ़ती है?
डॉ. श्रेय शर्मा कहते हैं, "नहीं, घी खाने से शरीर में गर्मी नहीं बढ़ती है। घी की तासीर ठंडी होती है। इसका अर्थ है कि यह शरीर में पित्त दोष को बैलेंस रखने में सहायक माना जाता है।"
वात, पित्त और कफ को बैलेंस रखने के लिए घी की भूमिका
डॉ. श्रेय शर्मा का कहना है कि आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को शरीर के तीन दोष माना जाता है। इन तीनों का बैलेंस शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी बताया जाता है। अलग-अलग दोषों को बैलेंस करने के लिए अलग-अलग फूड्स का महत्व होता है।
वात दोष: आयुर्वेद के अनुसार, वात को शांत करने के लिए तेल को अच्छा माना जाता है।
पित्त दोष: शरीर में पित्त दोष को बैलेंस करने के लिए घृत यानी घी को फायदेमंद माना जाता है।
कफ दोष: कफ को बैलेंस करने के लिए शहद को अच्छा माना जाता है।
साल 2024 में Journal Ayurveda and Integrative Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, सामान्य घी वात और पित्त दोष को शांत करता है लेकिन कफ को बढ़ा सकता है। वहीं, गाय और बकरी का घी वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित रखने में बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि इनकी तासीर ठंडी होती है।
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does eating too much ghee increase body heat 1
पित्त दोष में फायदेमंद है घी
डॉ. श्रेय शर्मा बताती हैं, पित्त दोष को बैलेंस करने के लिए घी का सेवन करना फायदेमंद होता है। इसको एक अच्छी औषधि माना जाता है, साथ ही इसको आयुर्वेद में गुरु यानी भारी गुण वाला माना जाता है। ऐसे में इसके सेवन के लिए पाचन और पाचन अग्नि का मजबूत होना जरूरी है।
पित्त प्रकृति का संबंध शरीर की गर्मी और पाचन से जोड़ा जाता है। ऐसे में घी की ठंडी तासीर पित्त को बैलेंस रखने के लिए फायदेमंद होती है।
साल 2025 में Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, आयुर्वेद में गाय का घी (गोगोघृत) वात और पित्त दोष को शांत करने के लिए सबसे अच्छी औषधि माना गया है। मीठे स्वाद और ठंडी तासीर (शीत वीर्य) होने के कारण यह शरीर के बढ़े हुए पित्त को नियंत्रित करता है और तेल की तरह जलन पैदा करने के बजाय शरीर को ठंडक देता है, जिससे आंखों की जलन और पित्त के कारण होने वाले दर्द में राहत मिलती है। यह पाचन अग्नि को मजबूत बनाकर पाचन सुधारता है और इसमें मौजूद योगवाही गुण औषधियों के पोषक तत्वों को शरीर की सेल्स तक पहुंचाते हैं। इसके नियमित सेवन से स्मरण शक्ति (याददाश्त), आंखों की रोशनी, त्वचा की कोमलता और इम्यूनिटी बढ़ती है।
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घी का सेवन करते समय पाचन अग्नि का ध्यान रखें
आयुर्वेद के अनुसार, पाचन अग्नि यानी पाचन शक्ति को बहुत महत्व दिया जाता है। पाचन शक्ति के कमजोर होने पर घी का अधिक सेवन करने पर कुछ लोगों को भारीपन या पेट से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
भारतीय खानपान में घी का खास महत्व है, जो सेहत को दुरुस्त रखता है और पोषण देता है। घी खाने से शरीर में गर्मी नहीं बढ़ती है, बल्कि इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर के पित्त दोष को संतुलित करने में बेहद सहायक है। आयुर्वेद में वात के लिए तेल, कफ के लिए शहद और पित्त दोष को शांत करने के लिए घी को एक औषधि माना गया है। हालांकि, घी की तासीर भारी होने के कारण इसका सेवन करते समय अपनी पाचन अग्नि (पाचन शक्ति) का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि भारीपन या पेट की समस्याओं से बचा जा सके।
घी को स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसके अलावा, इसका सेवन करने से किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
घी खाने के क्या फायदे हैं?
घी खाने से पाचन को दुरुस्त करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, ब्रेन को हेल्दी रखने, जोड़ों के दर्द को कम करने, स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।1 दिन में कितना घी खाना चाहिए?
1 दिन में एक वयस्क को 5 से 10 ग्राम में तक घी का सेवन किया जा सकता है। इससे स्वास्थ्य को दुरुस्त करने में मदद मिल सकती है।
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Nov 05, 2026 21:59 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Shrey Sharma
