Sun Nov 1, 2026 | 08:46 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kiran Gupta , Yoga, Naturopathy Consultant & Nutrition & Dietician

क्या पित्त दोष वाले लोग तांबे का पानी पी सकते हैं? जानें नुकसान

पित्त दोष वाले लोगों के लिए तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसकी गर्म तासीर के कारण उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन करने पर यह एसिडिटी, स्किन से जुड़ी समस्याएं और लिवर पर दबाव जैसी दिक्कतें बढ़ा सकता है।
क्या पित्त दोष वाले लोग तांबे का पानी पी सकते हैं? जानें नुकसानक्या पित्त दोष वाले लोग तांबे का पानी पी सकते हैं? जानें नुकसान

कई लोग पित्त दोष के असंतुलित होने की समस्या से परेशान रहते हैं। इसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में अक्सर लोगों को अपने खान-पान का खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, तले-भुने फूड्स और अधिक मसालेदार फूड्स को खाने से बचने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में रखा पानी (ताम्र जल) पीना बहुत फायदेमंद माना गया है। इसे पीने से शरीर के तीनों दोष (वात, पित्त और कफ दोष) संतुलित रहते हैं, लेकिन क्या पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए यह सही है? आइए इस बारे में शालीमार बाग, नई दिल्ली के महर्षि आयुर्वेद अस्पताल की सीनियर आयुर्वेदिक कंसल्टेंट डॉ. भावना मावर और मेवाड़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं प्राकृतिक चिकित्सालय बापू नगर, जयपुर की वरिष्ठ चिकित्सक योग, प्राकृतिक चिकित्सा पोषण और आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. किरण गुप्ता से।

तांबे के पानी की तासीर क्या है?

आयुर्वेद के अनुसार तांबे की तासीर उष्ण (गर्म) होती है। यह पानी को कीटाणु-रहित करता है, पाचन को मजबूत करता है, वजन घटाने में मदद करता है और खून को साफ करता है। आम व्यक्ति के लिए सुबह खाली पेट तांबे के लोटे में रखा गुनगुना पानी अमृत समान है।

क्या पित्त दोष वाले लोग तांबे का पानी पी सकते हैं?

डॉ. किरण गुप्ता के अनुसार, पित्त दोष की समस्या से पीड़ित लोगों को तांबे के बर्तन में रखे पानी का सेवन करने से बचना चाहिए, खासकर गलत तरीके से। तांबे के बर्तन में रखे पानी की तासीर गर्म होती है। ऐसे में इसका सेवन करने से व्यक्ति के शरीर में गर्मी और बढ़ सकती है, जो पित्त दोष के कारण पहले से ज्यादा होती है।

डॉ. भावना मावर का कहना है, पित्त दोष की तासीर भी उष्ण और तीक्ष्ण होती है। पित्त वाले लोगों में पहले से ही शरीर में गर्मी ज्यादा होती है। ऐसे में उन्हें जलन, एसिडिटी, मुंह में छाले, गुस्सा जल्दी आना, त्वचा पर दाने और बाल झड़ने जैसी समस्याएं जल्दी होती हैं।

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अगर पित्त प्रकृति वाला व्यक्ति रोज और ज्यादा मात्रा में तांबे के बर्तन में रखा पानी पिएगा, तो यह परेशानी और भी बढ़ सकती है। तांबे की उष्णता से पित्त और ज्यादा बढ़ जाएगा।

डॉ. भावना बताती हैं, पित्त दोष वाले तांबे का पानी पी सकते हैं, लेकिन रोज नहीं और बहुत कम मात्रा में। अगर आपको पहले से ही एसिडिटी, जलन या स्किन प्रॉब्लम है, तो तांबे के पानी से बचें और चांदी या मिट्टी के बर्तन का पानी पिएं।

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पित्त वालों को क्या नुकसान हो सकते हैं?

पित्त दोष की स्थिति में अगर व्यक्ति तांबे के बर्तन में रखे पानी का सेवन करता है, तो उनको कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। जैसे-

1. एसिडिटी और जलन

गर्म तासीर वाले इस पानी का सेवन करने से व्यक्ति को पेट और सीने में जलन, खट्टी डकारें बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

2. पेट खराब होना

अगर पानी 8 घंटे से ज्यादा रखा हो या बर्तन साफ न हो तो कॉपर की अधिकता से व्यक्ति को उल्टी-दस्त हो सकते हैं।

साल 2004 में Environmental Health Perspective में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, पीने के पानी में तांबे (कॉपर) की मात्रा बढ़ने से मतली (nausea), पेट दर्द और उल्टी जैसी पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इन लक्षणों का खतरा तांबे की मात्रा (Concentration), समय और लिंग पर निर्भर करता है।

3. स्किन से जुड़ी समस्याएं

पित्त दोष वाले लोग अगर अधिक मात्रा में तांबे के पानी का सेवन करते हैं, तो व्यक्ति को मुंहासे और शरीर में गर्मी से फोड़े-फुंसी बढ़ने जैसी स्किन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।।

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4. लिवर पर प्रेशर

पित्त दोष के अधिक होने की स्थिति में तांबे के बर्तन में रखे पानी का सेवन करने से व्यक्ति के शरीर में लगातार बहुत ज्यादा तांबा जाने से लिवर पर असर पड़ता है।

क्या पित्त वाले लोग तांबे का पानी बिल्कुल न पिएं?

डॉ. भावना बताती हैं, पित्त दोष वाले लोगों को तांबे के बर्तन में रखे पानी का सेवन करना बिल्कुल मना नहीं है, पर तरीका सही रखना बेहद जरूरी है।

  • पानी को तांबे के बर्तन में सिर्फ 6-8 घंटे रखें, 12 घंटे से ज्यादा नहीं।
  • रोज 1 गिलास से ज्यादा न पिएं। 2-3 लीटर पीना पित्त वालों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • गर्मियों में तांबे का पानी न पिएं। सर्दियों में सीमित मात्रा में पी सकते हैं।
  • पानी कभी भी खट्टा या गर्म करके तांबे के बर्तन में न रखें।

पित्त वाले लोगों के लिए बेहतर विकल्प क्या है?

डॉ. भावना बताती हैं कि आयुर्वेद कहता है पित्त वालों के लिए चांदी या मिट्टी के घड़े का पानी सबसे अच्छा है। चांदी की तासीर शीतल होती है, जो पित्त को शांत करती है। मिट्टी के घड़े का पानी भी स्वाभाविक रूप से ठंडा और पित्त-नाशक होता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार तांबे के पानी की तासीर गर्म होती है, इसलिए जिन लोगों की प्रकृति पित्त प्रधान होती है या जिन्हें एसिडिटी, जलन व त्वचा की समस्याएं रहती हैं, उन्हें तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से बचना चाहिए।

अगर पित्त प्रकृति वाले लोग इसे पीना चाहें भी, तो गर्मियों में इससे पूरी तरह परहेज करें, पानी को 6-8 घंटे से ज्यादा न रखें और दिन में सिर्फ एक गिलास ही पिएं। पित्त दोष को शांत करने के लिए चांदी के बर्तन या मिट्टी के घड़े का ठंडा पानी पीना सबसे सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प माना गया है। ध्यान रहे, कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • पित्त दोष असंतुलन के लक्षण क्या हैं?

    पित्त दोष के असंतुलित होने पर व्यक्ति को पाचन से जुड़ी समस्या होने, शरीर में गर्मी बढ़ने, पसीने से बदबू आने, अधिक पसीना आने, स्किन से जुड़ी समस्याएं होने, अधिक भूख या प्यास लगने, आंखों में जलन और सिरदर्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • पित्त दोष बढ़ने पर क्या खाएं?

    पित्त दोष का स्तर बढ़ने पर व्यक्ति को जौ, गेहूं, ओट्स, तरबूज, खरबूज, अनार, अंगूर, नाशपाती, नारियल पानी, मूंग दाल, मसूर दाल, गाय का दूध, घी और सौंफ के पानी का सेवन किया जा सकता है। यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। 

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 01, 2026 19:02 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr Kiran Gupta