आयुर्वेद के अनुसार अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर में वात, पित्त और कफ जैसे त्रिदोष को बैलेंस रखना फायदेमंद होता है। इन्हीं में से एक पित्त दोष के बढ़ने के कारण व्यक्ति को एसिडिटी, सीने में जलन, ज्यादा गर्मी लगने, पसीना आने, पाचन से जुड़ी समस्या होने, मुंह में कड़वा स्वाद होने, दस्त, बार-बार जी मिचलाने, सिर चकराने और स्किन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में इससे बचने के लिए कुछ फूड्स का सेवन करने से बचना चाहिए। आइए इस बारे में मेवाड़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं प्राकृतिक चिकित्सालय बापू नगर, जयपुर की वरिष्ठ चिकित्सक योग, प्राकृतिक चिकित्सा पोषण और आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. किरण गुप्ता से जानें।
पित्त असंतुलन में किन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए?
डॉ. किरण गुप्ता के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को बार-बार एसिडिटी या पेट में जलन की परेशानी होती है, तो अपने खान-पान पर ध्यान देना फायदेमंद हो सकता है। आयुर्वेद में पित्त को बढ़ाने वाले खाने और एसिडिटी बढ़ाने वाले फूड्स हमेशा एक जैसे नहीं होते हैं, इसलिए अपनी परेशानी के अनुसार खाने का चुनाव करना चाहिए।
अधिक मसालेदार खाने
अधिक मिर्च और ज्यादा तीखे मसाले से कुछ लोगों को पेट या सीने में जलन होने की समस्या हो सकती है। इसके कारण पित्त के असंतुलित होने की समस्या हो सकती है।
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तले-भुने और ज्यादा फैट वाले खाने खाएं
पकौड़े, समोसे और बहुत अधिक तेल वाले फूड्स खाने से कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की परेशानी बढ़ा सकते हैं, जो पित्त दोष के असंतुलित होने की समस्या हो सकती है।
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ज्यादा खट्टा खाना न खाएं
पित्त के असंतुलित होने पर व्यक्ति को खट्टे फलों के सेवन से बचना चाहिए। इस दौरान नींबू, संतरा और टमाटर जैसी चीजें कुछ लोगों में जलन बढ़ा सकती हैं। इन्हें पूरी तरह बंद करने के बजाय अपने लक्षणों पर ध्यान दें।
चाय और कॉफी
शरीर में पित्त के असंतुलित होने पर व्यक्ति को चाय और कॉफी जैसी कैफीन युक्त ड्रिंक्स का सेवन करने से बचना चाहिए। इनमें मौजूद कैफीन कुछ लोगों में एसिडिटी या सीने की जलन को बढ़ा सकता है।
स्मोकिंग और अल्कोहल से बचें
शरीर में पित्त के असंतुलित होने पर व्यक्ति को स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करने से बचना चाहिए। इनके कारण व्यक्ति को पाचन से जुड़ी समस्याओं और एसिड रिफ्लक्स को बढ़ सकती हैं।
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ज्यादा मीठे और पैकेट वाले फूड्स को खाने से बचें
शरीर में पित्त के असंतुलित होने पर व्यक्ति को अधिक मीठी और पैकेट वाले फूड्स का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके कारण पित्त की स्थिति और बिगड़ सकती है।
हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह के फूड से बचना जरूरी नहीं है। भोजन और लक्षणों का रिकॉर्ड रखने से यह पहचानने में मदद मिल सकती है कि कौन-सी चीज आपको ज्यादा परेशान करती है।
एसिडिटी और जलन कम करने वाले फूड्स
डॉ. किरण गुप्ता का कहना है, एसिडिटी या जलन को कम करने और शरीर में पित्त दोष को बैलेंस करने के लिए कुछ फूड्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इनसे स्वास्थ्य को दुरुस्त करने में मदद मिलती है।
- दलिया और ओट्स जैसे साबुत अनाज
- मूंग दाल की खिचड़ी
- केला
- खीरा
- लौकी और तोरी
- सेब, संतरे और अनानास जैसे फल
- ब्रोकली और गाजर जैसी सब्जियां
इसके अलावा, पित्त दोष को बैलेंस रखने के लिए खाना समय से खाएं और ज्यादा मात्रा में न खाएं। रात को खाना सोने से कम से कम 3 घंटे पहले कर लें।
पित्त दोष को संतुलित रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करना चाहिए?
डॉ. किरण गुप्ता के अनुसार, पित्त दोष को बैलेंस रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें। इससे स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में भी मदद मिलती है।
- पर्याप्त नींद लें
- नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी करें
- स्ट्रेस को मैनेज करें
- टाइम से खाना खाएं
- पर्याप्त पानी पिएं
- खाने के बाद तुरंत न लेटें
- ज्यादा तला-भुना खाना न खाएं
- मसालेदार खाना खाने से बचें
पित्त के असंतुलित होने की समस्या से बचने के लिए खान-पान पर ध्यान देना जरूरी होता है।
साल 2024 में Cureus में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, पित्त दोष (Pitta dosha) के असंतुलन से शरीर में सूजन, हार्मोनल गड़बड़ी और अत्यधिक शारीरिक गर्मी बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। पित्त को शांत करने और बैलेंस रखने के लिए फूड्स में ठंडक देने वाले फूड्स (cooling foods) को शामिल किया जा सकता है।
डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
पेट में एसिडिटी और जलन होने की समस्या आम बात है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने वाली परेशानी को नजरअंदाज न करें। इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति को बार-बार सीने में जलन होने या रात को बार-बार नींद खुलने, खाना निगलने में परेशानी, लगातार उल्टी होने, बिना किसी कारण के वजन कम होने और खून की उल्टी होने जैसी समस्याएं होती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
पित्त दोष को बैलेंस रखने के लिए खान-पान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। इस दौरान व्यक्ति को बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना खाना, खट्टे फूड्स और मीठी या पैकेज्ड फूड्स को खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, अल्कोहल और स्मोकिंग का सेवन करने से बचें। इसके अलावा, टाइम से खाना खाएं, पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस कम करने जैसी आदतों को अपनाएं।
ध्यान रहे, अगर किसी व्यक्ति को पेट या सीने में जलन बार-बार होती है, तो सिर्फ खान-पान में बदलाव पर निर्भर न रहें। ऐसे में टाइम से डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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FAQ
पित्त बढ़ने पर कौन सी बीमारी होती है?
पित्त का स्तर बढ़ने पर व्यक्ति को एसिडिटी, अल्सर, पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं, स्किन से जुड़ी समस्याएं, सिरदर्द, चक्कर आने और जोड़ों में सूजन आने जैसी समस्याएं हो सकती है।पित्त कितने दिन में ठीक होता है?
पित्त का ठीक होना इसकी स्थिति पर निर्भर करता है। इसके कारण व्यक्ति को शरीर पर चकत्ते और ज्यादा पित्त की समस्या हो सकती है।
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Oct 18, 2026 16:45 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Kiran Gupta
