Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

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रोज सुबह खाली पेट 1 चम्मच घी खाने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं? आयुर्वेदाचार्य से जानें

रोज खाली पेट एक चम्मच घी खाने से पाचन बेहतर होता है, स्किन में निखार आता है और शरीर को एनर्जी मिलती है, लेकिन ज्यादा मात्रा नुकसानदायक भी हो सकती है।

भारतीय रसोई में सदियों से इस्तेमाल होने वाला देसी घी केवल स्वाद बढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि यह शरीर को अंदर से पोषण देने में भी अहम भूमिका निभाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं, ऐसे में खाली पेट घी खाने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ा है। सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, घी का सेवन यदि सही मात्रा और सही तरीके से किया जाए तो यह शरीर की अग्नि को मजबूत करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और स्किन में नेचुरल निखार लाने में मदद कर सकता है।

रोज सुबह खाली पेट 1 चम्मच घी खाने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि घी को सीधे खाने और पानी में मिलाकर लेने के फायदे अलग-अलग होते हैं। गुनगुने पानी के साथ घी लेने से शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है और शरीर की ड्राईनेस कम होती है। वहीं सीधे घी खाने से स्निग्धता बढ़ती है, शरीर को एनर्जी मिलती है और सप्त धातुओं का पोषण होता है।

1. पानी में मिलाकर घी खाने से क्या होता है?

आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि जब घी को गुनगुने पानी में मिलाकर खाली पेट लिया जाता है, तो यह शरीर में डिटॉक्स की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। पानी के साथ घी लेने से शरीर की रुक्षता यानी ड्राईनेस कम होती है। यह आंतों को चिकनाई देता है, जिससे मल त्याग बेहतर होता है और शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगते हैं। पानी और घी का संयोजन शरीर में स्थिरता बढ़ाने का काम करता है और अंदरूनी संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। खासकर बदलते मौसम में यह शरीर को हाइड्रेट और एनर्जेटिक बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

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2. सीधे 1 चम्मच घी खाने से क्या फायदे मिलते हैं?

अगर कोई व्यक्ति रोज सुबह खाली पेट केवल 1 चम्मच घी खाता है, तो इसके भी कई आयुर्वेदिक लाभ बताए गए हैं। आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, घी शरीर में स्निग्धता बढ़ाता है, यानी शरीर को अंदर से पोषण और चिकनाई प्रदान करता है। यह पाचन अग्नि को मजबूत करता है, जिससे भोजन बेहतर तरीके से पचता है। घी को ओजवर्धक भी माना जाता है। ओज का संबंध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी से होता है। नियमित और संतुलित मात्रा में घी खाने से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत हो सकती है। इसके अलावा घी त्वचा को पोषण देकर नेचुरल ग्लो बढ़ाने में भी मदद करता है। आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि घी सप्त धातुओं के पोषण में सहायक होता है, जिससे शरीर मजबूत और संतुलित बना रहता है।

What happens if we consume ghee on an empty stomach

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डॉक्टर की सलाह

आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, सुबह खाली पेट 1 चम्मच देसी घी लेना पर्याप्त माना जाता है। आप इसे सीधे खा सकते हैं या गुनगुने पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं लेकिन यदि आपको पहले से पाचन संबंधी समस्या, मोटापा या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी दिक्कतें हैं, तो किसी आयुर्वेद एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर लें। विशेष रूप से जिन लोगों की अग्नि कमजोर होती है, उन्हें सीमित मात्रा में ही घी लेना चाहिए। कम अग्नि वाले व्यक्ति को अधिक घी देने से पाचन तंत्र धीमा पड़ सकता है। इसलिए घी का सेवन हमेशा शरीर की प्रकृति, पाचन क्षमता और जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए।

निष्कर्ष

संतुलित मात्रा में लिया गया घी शरीर को एनर्जी, पोषण और मजबूती देने का काम कर सकता है। यही कारण है कि आयुर्वेद में घी को अमृत समान माना गया है लेकिन इसे हमेशा शरीर की स्थिति के अनुसार ही लेना चाहिए।

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FAQ

  • क्या घी वजन बढ़ाता है?

    जरूरत से ज्यादा घी खाने पर वजन बढ़ सकता है, लेकिन सीमित मात्रा में यह शरीर को हेल्दी फैट देता है।
  • रोज कितना घी खाना सही माना जाता है?

    आमतौर पर 1 से 2 चम्मच घी पर्याप्त माना जाता है, लेकिन यह व्यक्ति की अग्नि और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
  • क्या घी इम्यूनिटी बढ़ाता है?

    आयुर्वेद के अनुसार घी ओजवर्धक होता है, जिससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत हो सकती है।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 07, 2026 17:17 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • May 07, 2026 17:17 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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