केरल में स्क्रब टाइफस बुखार का कहर, 4 दिन में हुई 2 मरीजों की मौत, जानें इस बीमारी के बारे में

कोरोनावायरस महामारी के बीच उत्तर प्रदेश और दिल्ली में संक्रामक बुखार Scrub Typhus के मामले तेजी से फैल रहे हैं, जानें इस बीमारी के बारे में।

 
Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Jun 13, 2022 13:08 IST
केरल में स्क्रब टाइफस बुखार का कहर, 4 दिन में हुई 2 मरीजों की मौत, जानें इस बीमारी के बारे में

देश में एक तरफ कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों के नए मामले रोजाना आ रहे हैं वहीं एक और बीमारी ने लोगों की चिंता को बढ़ा दिया है। केरल में एक रहस्यमयी बुखार स्क्रब टाइफस (Scrub Typhus in Hindi) का के कारण बीते 4 दिनों में 2 मरीजों की मौत हो गयी है। स्क्रब टाइफस एक बुखार है जो चूहा, छूछून्दर गिलहरी आदि से इंसानों में फैलता है। यह बुखार काफी गंभीर और जानलेवा माना जाता है। इससे पहले यह बीमारी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में देखी गयी जिसके बाद मथुरा जिले में भी इसके कुछ मामले आये थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मिस्ट्री फीवर की वजह से अबतक 100 लोगों की जान भी जा चुकी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बीमारी पहाड़ों में पाए जाने वाले एक खास किस्म के कीड़े के काटने से हो रही है। स्क्रब टाइफस की बीमारी में लोगों को तेज बुखार आता है जिसके बाद रोगी की स्थिति गंभीर हो जाती है। स्क्रब टाइफस नामक यह मिस्ट्री फीवर अब उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद और मथुरा समेत कई जगहों पर पहुंच चुका है। दिल्ली सरकार की तरफ से भी लोगों को इसके लक्षण दिखने पर जांच कराने की सलाह दी गयी है। कोरोनावायरस के कहर के बीच इस बीमारी के आने से लोगों की चिंता बढ़ गयी है। आइये दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ सुरंजीत चटर्जी से जानते हैं स्क्रब टाइफस के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में।

क्या है स्क्रब टाइफस? (What is Scrub Typhus?)

स्क्रब टाइफस एक जीवाणुजनित संक्रमण है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। इस बीमारी को बुश टाइफस के नाम से भी जाना जाता है। इस बीमारी के लक्षण चिकनगुनिया के लक्षणों से मिलते जुलते हैं और इसके लक्षण गंभीर होने पर मरीज की मौत भी हो जाती है। दिल्ली में इसके एकाध मामले आते रहते हैं लेकिन ज्यादा संख्या में इसके मामले पहली बार देखे जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लार्वा माइट्स के काटने से यह बीमारी लोगों में फैलती है। एक आंकड़े के मुताबिक यह बीमारी दुनियाभर में हर साल लगभग 1 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है।

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कैसे फैलती है स्क्रब टाइफस की बीमारी (What Causes Scrub Typhus?)

स्क्रब टाइफस संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से लोगों में फैलती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस कीड़े के काटने पर लगभग 50 प्रतिशत लोगों के शरीर पर निशान भी देखे जा सकते हैं लेकिन वहीं 50 प्रतिशत लोगों में इसके निशान देखने को नहीं मिलते हैं। इन माइट्स के काटने के निशान सबसे ज्यादा कमर, कांख, प्राइवेट पार्ट्स और गर्दन पर देखने को मिलते हैं। लार्वा माइट्स के काटने के निशान गोल और काले रंग का होता है। इनके काटने से मरीज को हाई फीवर की समस्या होती है। जिसमें जांच के बाद ही स्क्रब टाइफस का पता लगाया जाता है। इस बीमारी में समय से इलाज होने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है अन्यथा देर होने पर मरीजों को अपनी जान से हाथ ढोना पड़ सकता है।

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स्क्रब टाइफस के लक्षण (Signs and Symptoms of Scrub Typhus)

इस बीमारी में लार्वा माइट्स के काटने के लगभग 10 दिनों के बाद मरीज को समस्या होनी शुरू होती है। शुरुआत में मरीज को तेज बुखार और ठंड लगनी शुरू होती है। स्क्रब टाइफस में मरीज को वायरल संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है इसके लक्षण भी बढ़ने लगते हैं। स्क्रब टाइफस की समस्या में दिखने वाले प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं। 

  • तेज बुखार और ठंड लगना
  • शरीर में दर्द
  • सिरदर्द
  • मांसपेशियों में तेज दर्द 
  • बाइट की जगह पर एस्चर पैच
  • भ्रम और कोमा
  • मानसिक स्थिति का ठीक न होना
  • बढ़े हुए लिम्फ नोड्स
  • गंभीर मामलों में ब्लीडिंग या ऑर्गन फेलियर

स्क्रब टाइफस का इलाज और बचाव (Treatment and Prevention of Scrub Typhus)

इस बीमारी के लक्षण दिखने पर चिकित्सक मरीज को खून के जांच की सलाह देते हैं। खून की जांच के बाद मरीज की स्थिति के हिसाब से उसका इलाज किया जाता है। इस बीमारी के लक्षण दिखने पर जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है मरीज को उतना ही फायदा मिलता है। इलाज शुरू होने में देरी होने पर मरीज को कई गंभीर समस्याएं होने लगती है। स्क्रब टाइफस की स्थिति गंभीर होने पर मरीज के लिवर और फेफड़ों पर इसका असर होता है। इस बीमारी में एंटीबायोटिक्स से इलाज किया जाता है। इस गंभीर बीमारी से बचाव के लिए अभी तक कोई भी वैक्सीन नहीं बनी है। झाडी-जंगल और मुख्यतः पहाड़ों में पाए जाने वाले लार्वा माइट्स के काटने से बचना ही एकमात्र बचाव का उपाय है। इसके अलावा आप बीमारी लोगों से दूरी बनाकर खुद को इस बीमारी से संक्रमित होने से बचा सकते हैं। स्क्रब टाइफस से बचने के लिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

  • स्क्रब टाइफस से संक्रमित मरीजों से दूरी बनाकर रखें।
  • अपने आसपास सफाई बनाएं और गंदगी न जमा होने दें।
  • लार्वा माइट्स को खत्म करने के लिए कीटनाशक का इस्तेमाल करें।
  • बाहर निकलते समय हाथ-पैर ढककर चलें।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में बाहर टहलते समय पूरे बदन को ढकें।
  • समय-समय पर अपने हाथों को धोते रहें।
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नेशनल हेल्थ पोर्टल के अनुसार देश के कई हिस्सों में स्क्रब टाइफस की बीमारी आम है। फिलहाल उत्तर प्रदेश के बार दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में इस बीमारी से बचाव के लिए सतर्कता बरती जा रही है। असम में स्क्रब टाइफस के मामले देखे जाने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने की सलाह दी गयी है। वहीं दिल्ली में सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस बीमारी के लक्षण दिखने पर घबराने के बजाय लोग अपनी जांच जरूर कराएं। उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अलावा स्क्रब टाइफस के मामले जम्मू, नागालैंड समेत पूरे उप हिमालयन बेल्ट में देखे जाते हैं। 2003 और 2007 के बीच हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल में भी इस बीमारी का कहर देखने को मिला था। खासकर बरसात के दौरान इस बीमारी का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में खुद को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए आप साफ-सफाई के साथ-साथ संक्रमित मरीजों से दूरी जरूर बनाएं।

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