रिश्‍ते को कमजोर करती है पार्टनर से दूरी, इन 5 तरीकों से आएं करीब

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 12, 2018
Quick Bites

  • युवा जोड़े की यही तमन्ना होती है कि वे हमेशा साथ-साथ रहें
  • कई बार उनका यह सपना अधूरा रह जाता है।
  • कई बार पति-पत्नी को दो अलग शहरों या देशों में रहना पड़ता है।

शादी के बंधन में बंधने वाले हर युवा जोड़े की यही तमन्ना होती है कि वे हमेशा साथ-साथ रहें पर आधुनिक जीवनशैली की बढ़ती जटिलताओं की वजह से कई बार उनका यह सपना अधूरा रह जाता है। प्राफेशनल डिमांड के कारण कई बार पति-पत्नी को दो अलग शहरों या देशों में रहना पड़ता है। कभी उच्च शिक्षा तो कभी कोई विशेष तकनीकी प्रशिक्षण या तरक्की का कोई बड़ा अवसर...या फिर निजी जीवन से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण जि़म्मेदारी। ऐसे ही कई कारणों से आजकल कुछ दंपतियों को लंबे समय तक एक-दूसरे से दूर रहना पड़ता है। यह मामला व्यक्तिगत पसंद, निर्णय लेने की आज़ादी या किसी मजबूरी से जुड़ा हो सकता है। कुछ लोग इसे करियर के लिए अच्छा मानते हैं तो कई दंपतियों के अनुसार इससे रिश्ते में दूरियां बढऩे लगती हैं।

क्या हैं चुनौतियां

व्यक्तिगत आज़ादी के समर्थकों को यह धारणा थोड़ी आकर्षक लग सकती है पर इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं। कृतिका पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह कहती हैं, 'हमारी अरेंज्ड मैरिज है। हमें शादी के पहले ही इस बात का जानकारी थी, अपनी जॉब की वजह से हम दोनों को एक-दूसरे से अलग रहना पड़ेगा और इसके लिए हम दोनों मानसिक रूप से तैयार भी थे लेकिन अब शादी के बाद अलग-अलग शहरों में रहने के कारण हम दोनों को बहुत अकेलापन महसूस होता है।

वैसे तो छुट्टियों में हम हमेशा साथ ही रहते हैं लेकिन एक-दूसरे को अच्छी तरह समझ पाने के लिहाज़ से यह अवधि बहुत कम होती है। जब मैं दूसरे कप्लस से अपनी तुलना करती हूं तो मुझे ऐसा लगता है कि शादी के दो साल बाद भी हमारे बीच उतनी अच्छी अंडरस्टैंडिंग विकसित नहीं हो पाई है। फिर भी अपनी तरफ से हम दोनों की यही कोशिश होती है कि बातचीत के ज़रिये हम एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें।

विश्वास जीतना मुश्किल

किसी भी शादी को कामयाब बनाने के लिए पति-पत्नी के बीच प्यार के साथ विश्वास का होना भी बहुत ज़रूरी है। ऐसे रिश्ते में दंपतियों के लिए एक-दूसरे का भरोसा जीत पाना बहुत मुश्किल होता है। एक सीए. फर्म में कार्यरत रम्या कहती हैं, 'मेरे पति मर्चेंट नेवी में जॉब करते हैं। वे शिप के साथ अलग-अलग देशों में घूम रहे होते हैं। कई बार मोबाइल का नेटवर्क नहीं मिलता, ऐसे में उनसे हफ्तों बात नहीं हो पाती। इससे कभी-कभी मुझे डिप्रेशन भी होने लगता है।

फिर पत्नी से इतनी दूर रहने वाले पति को लेकर अकसर मेरे मन में कई तरह की शंकाएं उठती हैं। कई बार उन्हें लेकर मैं कुछ ज़्यादा ही पज़ेसिव हो जाती हूं, जिससे वह नाराज़ हो जाते हैं। हां, यह बात अलग है कि जब वह छुट्टियों में घर आते हैं तो शादी के दस साल बाद भी हमारे रिश्ते में किसी नवविवाहित जोड़े जैसी ताज़गी बनी रहती है।    

असहज है यह

समय के साथ पति-पत्नी के रिश्ते में आने वाले इस बदलाव के बारे में मनोवैज्ञानिक सलाहकार विचित्रा दर्गन आनंद कहती हैं, 'एक ही घर में हमेशा साथ रहे बिना एक-दूसरे के व्यक्तित्व, व्यवहार और आदतों को समझ पाना बहुत मुश्किल है। मनोविज्ञान की दृष्टि से ऐसा रिश्ता बहुत असहज है। अच्छी सेहत के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि पति-पत्नी साथ रहते हुए एक-दूसरे की भावनात्मक और शारीरिक ज़रूरते पूरी कर सकें लेकिन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में ऐसा संभव नहीं होता।

अधूरी यौन इच्छाओं की वजह से व्यक्ति में तनाव और कुंठा जैसी नकारात्मक भावनाएं पनपने लगती हैं। इससे  व्यक्ति को डिप्रेशन, स्ट्रेस और हाइपरटेंशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे रिश्तों की वजह से ही लोग विवाहेतर संबंधों की ओर आकर्षित होते हैं। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि मामला तलाक तक पहुंच जाता है। समस्याओं से बचने के लिए दंपतियों को सचेत ढंग से एक-दूसरे के साथ बातचीत करनी चाहिए।

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दूरी से बढ़ती दिक्कतें

एक-दूसरे से दूर रहने वाले दंपतियों को कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सौम्या दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज में लेक्चरर हैं और उनके पति सुबोध साइंटिस्ट हैं। अपनी रिसर्च की वजह से उन्हें तीन वर्षों के लिए अमेरिका जाना पड़ा। सौम्या बताती हैं, 'यहां अकेलेपन की वजह से मैं बहुत तनावग्रस्त रहने लगी थी। दो महीने की छुट्टी लेकर मैं भी उनके पास अमेरिका चली गई पर मैं मानसिक रूप से बहुत परेशान थी। वह बेहद अनिश्चितता भरा दौर था।

हम दोनों के लिए लंबे समय तक अलग रह पाना बहुत मुश्किल था। अपनी जॉब और बुज़ुर्ग सास की वजह से मेरा यहां रहना ज़रूरी था। अकसर हम विडियो कॉल के ज़रिये बात करते थे, फिर भी हमें बहुत अकेलापन महसूस होता था। फिर इस सच्चाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि रिश्ते की मज़बूती के लिए पति-पत्नी का साथ रहना ज़रूरी है। इसी वजह से मेरे पति ने वहां जॉब करने का इरादा छोड़ दिया और रिसर्च खत्म होते ही इंडिया लौट आए।

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परिवार की जि़म्मेदारी

ऐसे दंपतियों के रिश्ते को बेहतर बनाने में उनके परिवार के करीबी सदस्यों, जैसे-माता-पिता और भाई-बहनों की भी अहम भूमिका होती है। कई बार परिवार के सदस्य अनजाने में ही पति-पत्नी के बीच गलतफहमी पैदा कर देते हैं, जिससे लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप वाले दंपतियों के आपसी संबंध तनावपूर्ण हो जाते हैं। इस संदर्भ में बैंक में कार्यरत मयूरी कहती हैं, 'मेरे बड़े भाई अपनी कंपनी के किसी प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका गए थे। भाभी सरकारी जॉब में हैं, इसलिए वह भतीजे के साथ यहीं हमारे साथ थीं।

उस दौरान हम लोग भाभी का पूरा खयाल रखते थे। छुट्टियों में जब भी भइया यहां आते तो मेरी मम्मी पहले ही भाभी से कह देतीं कि तुम दोनों हफ्ते भर के लिए कहीं घूमने चले जाना। जब तक भइया यहां रहते, तब हमारी यही कोशिश होती थी कि घर के सारे काम हम खुद ही कर लें ताकि भाभी को पति और बच्चे के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताने का मौका मिले।     

कुल मिलाकर कुछ समय के लिए एक-दूसरे से दूर रहना, चाहे किसी दंपती की पसंद हो या मजबूरी, अगर पॉजि़टिव सोच के साथ  एक-दूसरे की भावनाओं का खयाल रखा जाए तो यह रिश्ता खुशनुमा बना रहेगा।

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