महाराष्ट्र में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, दलाल से लेकर डॉक्टर तक इस नेटवर्क में शामिल

महाराष्ट्र पुलिस ने एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो महाराष्ट्र सहित कई राज्यों और विदेश में था। आइए जानते हैं इस पूरे मामले के बारे में।
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महाराष्ट्र में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, दलाल से लेकर डॉक्टर तक इस नेटवर्क में शामिल

किडनी हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है, जो हमारी बॉडी को फिल्टर करके ब्लड से खराब और ज्यादा तरल पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। शरीर के पानी, लवण और मिनरल्स को संतुलित बनाए रखता है, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और हार्मोन को संतुलित रखता है। हम सभी के शरीर में दो किडनी होती है, लेकिन एक बार में सिर्फ एक ही किडनी काम करती है। लेकिन, क्या हो अगर आपकी मर्जी और जानकारी के बिना धोखे में कोई आपके शरीर से किडनी निकाल ले। जी हैं. महाराष्ट्र में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें एक अवैध और बड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार को इस किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ किया, जो महाराष्ट्र के बाहर भी एक्टिव था और कई राज्यों और विदेश से जुड़े लोगों को निशाना बना रहा था।


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कैसे पकड़ा गया यह रैकेट?

मिली जानकारी के मुताबिक यह मामला तब सामने आया जब चंद्रपुर के एक किसान रोशन कुळे ने पुलिस को शिकायत दी और बताया कि वह कर्ज की वजन से इतना परेशान हो गया कि उसे अपनी किडनी बेचनी पड़ी। पुलिस ने इस शिकायत को हल्के में न लेते हुए SIT टीम बनाए, जिसे इस पूरे रैकेट के बारे में पता लगाने के लिए लगाया गया। रोशन कुले ने इस रैकेट पर आरोप लगाया था कि उसे कर्ज देने वालों से बचने के लिए कंबोडिया में अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर किया गया था।

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चंद्रपुर के पुलिस सुपरिटेंडेंट मुम्मका सुदर्शन ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने इस नेटवर्क में दो मुख्य लोगों की पहचान की है, जिसमें नई दिल्ली के डॉ. रविंदर पाल सिंह और तमिलनाडु के त्रिची में स्टार किम्स अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. राजारत्नम गोविंदस्वामी शामिल हैं।

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विदेश तक किडनी बेचने का फैला जाल

पुलिस ने इस मामले की जांच करते हुए पता लगाया कि कुछ लोगों को भारत से कंबोडिया लाया गया और वहां उनकी किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट की गई। पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि यह रैकेट सिर्फ विदेश तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि भारत के अंदर भी अवैध ट्रांसप्लांट किए गए थे। इस मामले में पुलिस ने अब तक कई आरोपियों की पहचान की है, जिसमें रामकृष्ण नाम का एक व्यक्ति पकड़ा गया है, जो खुद को डॉक्टर बताता है, लेकिन वह डॉक्टर नहीं है। पुलिस को पूछताछ में पता लगाया कि उसने खुद भी अपनी किडनी बेच रखी है क्योंकि वह भी कर्ज में था। इसके अलावा भी कई लोग इस मामले में शामिल हैं, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है।

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किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पैसे कैसे ले रहे थे?

पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए बताया कि यह रैकेट किडनी ट्रांसप्लांट कराने वालों से काफी ज्यादा पैसे लेते हैं। जिन लोगों को किडनी चाहिए थी उनसे 50 लाख से 80 लाख तक रुपये लिए जाते थे। लेकिन, जिन लोगों ने अपनी किडनी दी उन्हें सिर्फ 5 से 8 लाख तक ही रुपये दिए जाते थे। बाकी पैसे रैकेट के अन्य सदस्यों, डॉक्टरों और अस्पताल को बांट दिए जाते थे। 

Image Credit: Freepik

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  • Jan 02, 2026 11:28 IST

    Published By : Katyayani Tiwari

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