Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

क्‍या अरोमाथेरेपी बच्‍चोंं के ल‍िए सुरक्ष‍ित है? डॉक्‍टर से जानें

अरोमाथेरेपी में पौधों से न‍िकाले गए सुगंधि‍त तेल का इस्‍तेमाल अन‍िद्रा, स्‍ट्रेस जैसी समस्‍याओं को दूर करने के ल‍िए क‍िया जाता है। जानें यह बच्‍चों के ल‍िए सुरक्ष‍ित है या नहीं?

अरोमाथेरेपी एक प्राकृतिक उपचार पद्धति है जिसमें एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल शरीर और मन को आराम देने के लिए किया जाता है। इन ऑयल की खुशबू को सूंघने या त्वचा पर लगाने से तनाव कम करने, मूड बेहतर बनाने और कुछ छोटी स्वास्थ्य समस्याओं में राहत पाने में मदद मिल सकती है। अरोमाथेरेपी में ऑयल्‍स का इस्‍तेमाल डिफ्यूजर, मसाज, स्नान या भाप के जरिए किया जा सकता है। कुछ लोग मानते हैं अरोमाथेरेपी बच्‍चों के ल‍िए सुरक्षि‍त है, वहीं कुछ को लगता है ऐसा नहीं है। अरोमाथेरेपी बच्‍चों के ल‍िए सुरक्ष‍ित है या नहीं, इसका जवाब जानने के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

बच्‍चों के ल‍िए पूरी तरह से सुरक्ष‍ित नहीं है अरोमाथेरेपी

बच्चों की सूंघने की क्षमता बड़ों की तुलना में ज्यादा अच्‍छी होती है इसलिए वे एसेंशियल ऑयल की खुशबू और उनके असर को जल्दी महसूस करते हैं। साथ ही, छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता इसलिए हवा में फैलाए गए तेज और गाढ़े एसेंशियल ऑयल (डिफ्यूजर के जरिए) उनके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। छोटे बच्चों के आसपास एसेंशियल ऑयल का इस्‍तेमाल करते समय सावधानी बहुत जरूरी है। 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इन्हें इस्तेमाल करने का सबसे सुरक्षित तरीका आमतौर पर इन्हें कमरे में डिफ्यूजर या वेपोराइजर के जरिए हल्की खुशबू के रूप में इस्तेमाल करना माना जाता है। एक्‍सपर्ट की गाइडेंस लेकर ऑयल्‍स का इस्‍तेमाल बच्‍चों में तनाव कम करने या अन‍िद्रा को दूर करने के ल‍िए क‍िया जा सकता है, लेक‍िन सीमि‍त इस्‍तेमाल ही सुरक्ष‍ित होता है।

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अरोमाथेरेपी के नुकसान

प‍िपरमिंट, यूकेलिप्टस और रोजमेरी जैसे ऑयल्‍स सांस की नलियों और म्यूकस मेम्ब्रेन में जलन पैदा कर सकते हैं और कुछ बच्चों में सांस लेने की गति को धीमी कर सकते हैं। इसी वजह से विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इन ऑयल को शिशुओं और छोटे बच्चों के बहुत पास डिफ्यूज न करें और न ही उनके चेहरे के आसपास लगाएं। बच्चों और शिशुओं की त्वचा भी बड़ों की तुलना में बहुत नाजुक होती है। इसलिए दो साल से कम उम्र के बच्चों की त्वचा पर एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खासकर नवजात शिशु गलत तरीके से या ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किए गए एसेंशियल ऑयल के दुष्प्रभाव को सहन नहीं कर पाते।

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बच्‍चों के ल‍िए अरोमाथेरेपी की जरूरत कब पड़ती है?

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बच्‍चों में ये समस्‍याएं होने पर एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है-

  • खुजली, खासकर कीड़े के काटने से होने वाली खुजली
  • त्वचा पर रैशेज
  • छोटे कट या खरोंच
  • चोट के निशान (ब्रूज)
  • त्वचा से जुड़ी अन्य छोटी समस्याएं

ध्यान रखें क‍ि एसेंशियल ऑयल को सीधे त्वचा पर लगाने से पहले किसी कैरियर ऑयल में मिलाना बेहतर होता है, ताकि जलन या एलर्जी का खतरा कम हो।

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बच्चों के लिए सुरक्षित हैं ये एसेंशियल ऑयल

International Federation Of Aromatherapists के मुताब‍िक, कुछ एसेंशियल ऑयल दो साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों के आसपास इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इन्हें त्वचा पर लगाने, डिफ्यूजर में इस्तेमाल करने या खुशबू के रूप में सूंघने के लिए सुरक्षित माना जाता है जैसे-

  • सीडरवुड
  • जर्मन कैमोमाइल
  • लैवेंडर
  • मैंडरिन
  • नेरोली
  • सैंडलवुड
  • टी ट्री ऑयल

ध्यान रखें क‍ि बच्चों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है, इसलिए किसी भी एसेंशियल ऑयल को सीधे लगाने से पहले उसे किसी कैरियर ऑयल (जैसे नारियल या बादाम तेल) में मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।

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बच्‍चों के ल‍िए सुरक्ष‍ित नहीं हैं ये एसेंश‍ियल ऑयल

कुछ एसेंशियल ऑयल बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते। इनके इस्तेमाल से बच्चों को सांस लेने में परेशानी, एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बच्चों के आसपास इन ऑयल का इस्‍तेमाल करने से बचना चाहिए-

  • यूकेलिप्टस ऑयल
  • फेनेल
  • लेमनग्रास
  • प‍िपरमिंट
  • रोजमेरी

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फोटोटॉक्सिक एसेंशियल ऑयल से बच्‍चोंं को बचाएं

बच्‍चों को फोटोटॉक्सिक एसेंशियल से दूर रखना चाह‍िए। ये ऐसे ऑयल होते हैं जो त्‍वचा पर लगाने के बाद धूप के संपर्क में आने के कारण फोटोटॉक्सिक रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। यह र‍िएक्‍शन गंभीर होता है और इसका असर लंबे समय तक रहता है। तेज सनबर्न, छाले, सूजन, त्‍वचा के रंग में बदलाव जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। फोटोटॉक्सिक एसेंशियल ऑयल में शामिल हैं:

  • बर्गामोट
  • लाइम
  • बिटर ऑरेंज
  • लेमन
  • ग्रेपफ्रूट

न‍िष्कर्ष:

बच्‍चों के ल‍िए अरोमाथेरेपी का इस्‍तेमाल पूरी तरह से सुरक्ष‍ित नहीं होता है। अगर बच्‍चे की उम्र दो साल से कम है, तो अरोमाथेरेपी का इस्‍तेमाल केवल एक्‍सपर्ट की गाइडेंस में ही करें। 6 साल से ज्यादा उम्र के बच्‍चों के ल‍िए भी अरोमाथेरेपी का सीम‍ित इस्‍तेमाल ही क‍िया जाना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 10, 2026 14:11 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 10, 2026 14:11 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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