मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी, जानें इसका महत्व और स्वादिष्ट खिचड़ी बनाने की रेसिपी

आपको पता है मकर संक्रांति पर खासतौर पर खिचड़ी क्यों बनाई जाती है? अगर नहीं तो जानें इस दिन खिचड़ी बनाने और खाने का क्या है महत्व।

Vishal Singh
स्वस्थ आहारWritten by: Vishal SinghPublished at: Jan 08, 2020Updated at: Jan 12, 2021
मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी, जानें इसका महत्व और स्वादिष्ट खिचड़ी बनाने की रेसिपी

14 जनवरी 2021 को मकर संक्रांति का पर्व है। देश के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति कई तरह से मनाई जाती है और मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति को दान के पर्व के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब सूरज धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, तो मकर संक्रांति मनाया जाता है। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है इसलिए आमतौर पर लोग इस दिन स्नान करने सूर्य को अर्घ्य देते हैं और दान करते हैं। एक और चीज इस पर्व के साथ विशेष रूप से जुड़ी हुई है और वो है खिचड़ी। खिचड़ी उत्तर भारत में खाई जाने वाली एक विशेष डिश है, जिसे चावल, दाल और मसालों के मिश्रण से बनाते हैं। मकर संक्रांति पर वैसे तो अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग परंपरा है लेकिन मकर संक्रांति के पर्व पर खिचड़ी बनाने का एक अलग ही महत्व होता है। इसलिए कई लोग मकर संक्रांति को 'खिचड़ी त्योहार' भी कहते हैं।

makar sankranti

आपको हम बताते हैं कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने का महत्व आखिर क्यों है। खिचड़ी को मकर संक्रांति पर इसलिए बनाया जाता है क्योंकि चावल को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और काली दाल को शनि का प्रतीक। दूसरी ओर हरी सब्जियां बुध से संबंध रखती है। ऐसा माना जाता है कि खिचड़ी की गरमाहट इंसान को मंगल और सूर्य से जोड़ती है। इस दिन खिचड़ी खाने से राशि में ग्रहों की स्थिती मजबूत होती है।

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मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी की जगह पर कुछ लोग दही, पापड़, घी, और आचार का मिश्रण भी खाया जाता है। इन दिन खिचड़ी का दान भी किया जाता है। माना जाता है कि खिलजी के आक्रमण के वक्त नाथ योगियों को भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इस वजह से योगी अक्सर भूखे रह जाते थे और लगातार कमजोर हो रहे थे। जिसके बाद योगियों की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए बाबा गोरखनाथ ने इसका समाधान निकालते हुए दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी। यह भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ काफी स्वादिष्ट भी माना गया था। इसके साथ ही शरीर को तुरंत उर्जा भी मिलती थी। नाथ योगियों को यह व्यंजन काफी पसंद आया। बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा।

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खिचड़ी बनाने के लिए वैसे तो लोग चावल, काली दाल, नमन, मटर और हल्दी और हरी सब्जियों का इस्तेमाल करके बनाते हैं। बड़े ही आसानी से तैयार होने वाली खिचड़ी वैसे तो कई तरह से बनाई जाती है। इसे हर कोई अपने तरीके से स्वादिष्ट बनाने की कोशिश करता है। खिचड़ी में वैसे तो कई चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन खिचड़ी के लिए मुख्य चीजें होती हैं चावल, आधा कटोरी दाल, एक आलू इसके अलावा आप इसमें अपनी पसंद के अनुसार मटर, हरी सब्जियां, हींग जीरा आदि भी डाल सकते हैं। इसके साथ आप अपने स्वाद अनुसार मसालों का इस्तेमाल करें। 

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खिचड़ी बनाने की रेसिपी 

  • सबसे पहले चावल और दाल को अच्छे से साफ करके धो लें
  • इसके बाद आप कूकर में घी को अच्छे से गरम कर लें और जीरे से तड़का लगाएं, इसमें हल्दी और हींग डालकर अच्छे से पका लें
  • इसमें अब आप आलू, मटर, शिमला मिर्च, टमाटर और गोभी अपने मुताबिक डाल लें। इसके साथ ही आप चावल-दाल को डाल कर मिल लें। 
  • सभी को अच्छे से मिलाने के बाद इनमें अपने स्वाद अनुसार मसालें डाल दें और कूकर को बंद करके पकने दें। 
  • कुछ देर पकने के बाद आप इसे परोस सकते हैं और इसके साथ आप दही या आचार का सेवन भी कर सकते हैं। 

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