कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी के दुष्प्रभाव

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jun 11, 2021
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी के दुष्प्रभाव

कैंसर (Cancer) की बीमारी में इलाज के कारण मरीजों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, इस स्थिति को इम्यूनोसप्रेस्ड होना कहते हैं। इस स्थिति में इम्यूनोथेरेपी बेहद फायदेमंद होती है। कैंसर की कोशिकाओं के खिलाफ शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इम्यूनोथेरेपी की जाती है, इसे बायोलॉजिक थेरेपी भी कहा जाता है। कुछ मामलों में चिकित्सक कैंसर के इलाज में सिर्फ इम्यूनोथेरेपी की सलाह देते हैं या फिर कैंसर के इलाज में होने वाली कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी के साथ भी इसे किया जाता है। इम्यूनोथेरेपी कई तरह की होती है और शरीर में इसके अलग-अलग कार्य भी होते हैं। इम्यूनोथेरेपी में शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है। कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने के लिए शरीर के इम्यून सिस्टम का बेहतर होना जरूरी होता है। इम्यूनोथेरेपी के बाद शरीर को कुछ दुष्प्रभावों (Immunotherapy Side Effects) से भी गुजरना पड़ता है जिसके बारे में पहले से जान लेना मरीजों के इलाज को बेहतर बना सकता है।

कितने प्रकार की होती है इम्यूनोथेरेपी? (Types of Immunotherapy for Cancer)

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कैंसर के इलाज में इम्यूनोथेरेपी एक अहम भूमिका निभाती है। इम्यूनोथेरेपी कैंसर की कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट करने के लिए आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करती है। कुछ प्रकार की इम्यूनोथेरेपी से शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता भी बढ़ जाती है। इम्यूनोथेरेपी के निम्नलिखित प्रकार होते हैं।

  • इम्यून चेकपॉइंट इन्हिबिटर्स (Immune Checkpoint Inhibitors)
  • टी सेल ट्रांसफर थेरेपी (T-Cell Transfer Therapy)
  • मोनोक्लोनल एंटीबाडी (Monoclonal Antibodies)
  • उपचार टीके (Treatment Vaccines)
  • इम्यून सिस्टम  मॉड्यूलर (Immune System Modulators)

इम्यूनोथेरेपी के दुष्प्रभाव (Immunotherapy Side Effects in Cancer Treatment)

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इम्यूनोथेरेपी में शरीर की इम्यूनिटी को बेहतर करने के लिए कुछ केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है। इन केमिकल्स को बॉयोलॉजिकल रिस्पांस मॉडीफायर कहते हैं और ये पहले से भी हमारे शरीर में मौजूद होते हैं। लेकिन कैंसर की समस्या में शरीर में इनकी कमी हो जाती है जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। हालांकि इम्यूनोथेरेपी शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने में बेहद उपयोगी मानी जाती है और कैंसर के इलाज में इसका बेहद लाभ भी मिलता है। अलग-अलग तरीके की इम्यूनोथेरेपी के अलग-अलग दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इम्यूनोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स मरीजों में उनके उपचार, कैंसर की स्थिति और स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर बदलते रहते हैं। लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हैं जिन्हें जान लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इम्यूनोथेरेपी से होने वाले कुछ प्रमुख दुष्प्रभाव इस प्रकार से हैं।

1. सिरदर्द (Headache)

लगभग सही कैंसर के मरीजों को सिरदर्द की समस्या होती ही है। ये समस्या कैंसर के उपचार में चल रही दवाईयों की वजह से ही हो सकती है। कैंसर की समस्या में होने वाले सिरदर्द कई तरह के होते हैं। इनमें माइग्रेन, क्लस्टर सिरदर्द और टेंशन की वजह से होने वाला सिरदर्द शामिल होता है। कैंसर के इलाज में इम्यूनोथेरेपी की वजह से भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है। यह समस्या काफी लंबे वक्त के लिए भी होती है। इम्यूनोथेरेपी के बाद अगर आपको भी सिरदर्द की समस्या हो रही है तो अपने चिकित्सक से इस बारे में परामर्श जरूर लें।

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2. स्किन से जुड़ी दिक्कतें (Skin Reactions)

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इम्यूनोथेरेपी के बाद किसी भी व्यक्ति में होने वाले प्रमुख दुष्प्रभावों में स्किन से जुड़ा रिएक्शन भी प्रमुख है। इम्यूनोथेरेपी के बाद बहुत से लोगों को त्वचा की लाली, सूखापन, ब्लिस्टरिंग आदि हो सकता है। इसकी वजह से शरीर की त्वचा और उंगलियां सूरज की रोशनी के प्रति संवेदशील भी हो सकती हैं। नाखूनों के चारों ओर सूजन भी इम्यूनोथेरेपी की वजह से होती है। अगर आपको भी इम्यूनोथेरेपी के बाद ऐसी समस्याएं महसूस हो रही हों तो इसका खुद से इलाज बिल्कुल भी न करें। ऐसी स्थिति में अपने चिकित्सक से परामर्श करने के बाद ही किसी भी दवा का सेवन करें।

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3. सांस लेने में दिक्कत (Shortness of Breath)

फेफड़ों के सूजन से जुड़ी एक समस्या न्यूमोनिटिस विषाक्त पदार्थों, एलर्जी या किसी भी उपचार की वजह से उत्पन्न दुष्प्रभावों के कारण होती है। इम्यूनोथेरेपी में न्यूमोनिटिस एक प्रभावी दुष्प्रभाव माना जाता है। इम्यूनोथेरेपी के बाद व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। अगर आपको भी इम्यूनोथेरेपी के बाद ऐसी समस्या होती है तो अपने चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही आगे का इलाज कराना चाहिए।

4. डायरिया (Diarrhea)

फेफड़ों के कैंसर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और हार्मोन से जुड़े कैंसर के मरीजों को डायरिया की समस्या होती ही है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के लक्षण ही दस्त और पेट से जुड़ी समस्याएं होती हैं। ऐसी स्थितियों से गुजरने वाले लोगों में इम्यूनोथेरेपी के बाद भी डायरिया की समस्या हो सकती है। यह समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए।

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5. वजन बढ़ना (Weight Gain)

कैंसर के इलाज के बाद और इम्यूनोथेरेपी के बाद वजन बढ़ने की समस्या होती है। कुछ एंटीसेन्सर दवाएं शरीर में पानी और फैट की मात्रा बढाने का काम करती हैं जिसकी वजह से वजन बढ़ जाता है। हालांकि कैंसर के इलाज के दौरान कई लोगों का वजन कम भी हो सकता है लेकिन इम्यूनोथेरेपी के बाद होने वाले प्रमुख दुष्प्रभावों में वजन बढ़ने की समस्या है। वजन बढ़ने की समस्या में चिकित्सक मरीज को विशेष डाइट का पालन करने की सलाह देते हैं।

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6. खांसी (Cough and Congestion)

इम्यूनोथेरेपी अंगों की सूजन का कारण बन सकती है। सूजन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है, जिसमें फेफड़ों (निमोनिया), यकृत (हेपेटाइटिस), बड़ी आंत (कोलाइटिस / दस्त), और थायराइड ग्रंथि शामिल है। खांसी और सांस लेने में दिक्कत, इम्यूनोथेरेपी का एक आम दुष्प्रभाव है। यदि आपको भी इम्यूनोथेरेपी के बाद खांसी और कफ की समस्या से जूझना पड़ रहा है तो अपने चिकित्सक से बात करने के बाद इसका उचित उपचार जरूर किया जाना चाहिए।

7. बुखार और कमजोरी (Fever and Weakness)

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कैंसर के इलाज के दौरान या इम्यूनोथेरेपी के बाद कुछ लोगों में बुखार और कमजोरी की समस्या जरूर देखी जाती है। कैंसर के इलाज के दौरान शरीर में कमजोरी होना आम बात है। इम्यूनोथेरेपी के बाद कई लोग दस्त, बुखार, खांसी और कमजोरी का अनुभव कर सकते हैं। कुछ इम्यूनोथेरेपी दवाएं बुखार, चक्कर आना और थकान का कारण बन सकती हैं। अधिकांश बुखार ठंड रात में देखे जाते हैं, जिससे सोने में कठिनाई होती है। यह कुछ दिनों तक चल सकता है और उपचार समाप्त होने के बाद भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपको स्वस्थ आहार लेना चाहिए और तुरंत इस दुष्प्रभाव के बारे में अपने चिकित्सक से बातचीत कर सलाह लेनी चाहिए।

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तो ये एक्सपर्ट्स द्वारा बताये गए कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी के कारण होने वाले कुछ प्रमुख दुष्प्रभाव हैं। अगर आपको भी इम्यूनोथेरेपी के बाद इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो खुद को हाइड्रेट जरूर रखें, ऐसी स्थिति में शरीर में पानी की कमी बिल्कुल भी नही होनी चाहिए। अधिक समस्या होने पर अपने चिकित्सक से संपर्क जरूर करें। हमें उम्मीद है कि आपको ये जानकारी पसंद आयी होगी, अगर आपके इस मुद्दे पर कोई सवाल हैं तो उन्हें आप कमेंट बॉक्स में लिखकर हम तक भेज सकते हैं।

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