Smile For Happy Stomach: खुश रहने से हो सकती हैं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्‍याएं दूर, शोध में हुआ खुलासा

खुश रहना न केवल आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद है, बल्कि खुश रहने से आंत स्‍वास्‍यि को भी बढ़ावा मिलता है। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Jun 12, 2020Updated at: Jul 09, 2020
Smile For Happy Stomach: खुश रहने से हो सकती हैं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्‍याएं दूर, शोध में हुआ खुलासा

कहते हैं, 'मन स्‍वस्‍थ तो तन स्‍वस्‍थ' ये कहावत बिलकुल सही है क्‍योंकि जब आप खुश होते हैं, तो आपकी मानसिक और शारीरिक परेशानियां दोनों कम होती हैं। खुश रहने को आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर काफी सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। खुश रहने से तनाव को कम करने, डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने के साथ-साथ आंत स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में भी मदद मिलती है। खुश रहना  आंत में रोगजनक बैक्टीरिया को रोककर आपके पेट को स्वस्थ रख सकता है। ऐसा हाल में हुए एक अध्‍ययन में खुलासा हुआ है। आइए इस बारे में अधिक जानने के लिए लेख को आगे पढ़े। 

खुश रहने और पेट के स्‍वास्‍थ्‍य के बीच संबंध 

Happiness And Stomach Health

जर्नल 'सेल होस्ट एंड माइक्रोब' में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि खुशी पेट में रोगजनक बैक्टीरिया को रोकने में मदद करती है, जो आंत के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मददगार है। यह सब सेरोटोनिन रसायन के कारण होता है, जो हमारे खुश होने या खुशी महसूस करने पर मस्तिष्क द्वारा रिलीज होता है। सेरोटोनिन रोगजनक बैक्टीरिया को आंत से दूर रखने के लिए जिम्मेदार होता है, यही कारण है कि जब आप खुश होते हैं, तो आपको गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्‍याओं यानि पेट संबंधी समस्‍याओं से परेशान होने की बहुत अधिक संभावना नहीं होती है। यह शोध पेट की बीमारियों और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्‍याओं के इलाज में एक सफलता है। 

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आंत स्‍वास्‍थ्‍य पर कैसे प्रभाव डालता है सेरोटोनिन?

Happy Mind Happy Tummy

खुश रहना गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्‍याओं को दूर करने का यह सबसे आसान उपाय है। ऐसा इसलिए होता है कि हमारे पेट में लाखों जीवाणु रहते हैं। जिसमें अधिकांश आंत बैक्टीरिया अच्छे होते हैं और उनमें से कुछ रोगजनक होते हैं, जो पेट को परेशान करते हैं और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन का कारण बनते हैं। सेरोटोनिन मस्तिष्क रसायन है, जो किसी व्यक्ति खुश होने पर रिलीज होता है और शोध में पाया गया है कि सेरोटोनिन दिमाग और पेट के बीच एक सकारात्मक संबंध स्थापित करता है। 

शोधकर्ताओं ने आंत के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रोगजनक बैक्टीरिया पर सेरोटोनिन के प्रभाव की जांच की । यह शोध प्रयोगशालाओं में किया गया था जिसमें शोधकर्ताओं ने विभिन्न आंत बैक्टीरिया और उनके कार्यों का विश्लेषण किया था। उन्होंने उन्हें सेरोटोनिन के साथ प्रतिक्रिया दी, यह देखने के लिए कि क्या यह उन्हें प्रभावित करता है।

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यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर से अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता वैनेसा स्पेरांडियो ने कहा,  "हालांकि सेरोटोनिन पर शोध का अधिकांश हिस्सा मस्तिष्क में इसके प्रभावों पर केंद्रित है, इस न्यूरोट्रांसमीटर मे लगभग 90%-एक रासायनिक, जो तंत्रिका कोशिकाओं का उपयोग प्रत्येक के साथ संवाद करने के लिए करते हैं। अन्य-गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रेक्‍ट संबंधी मार्ग में उत्पन्न होता है। "

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