Hypercalcemia: ज्यादा कैल्शियम लेने से हो सकते हैं आप इस बीमारी के शिकार, जानें कारण, लक्षण और उपाय

हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए अगर आप कैल्शियम का सेवन करते हैं तो, इसे लेकर थोड़ा सजग रहें। ज्यादा लेने से हाइपरकैल्सीमिया हो सकता है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Aug 16, 2021Updated at: Aug 16, 2021
Hypercalcemia: ज्यादा कैल्शियम लेने से हो सकते हैं आप इस बीमारी के शिकार, जानें कारण, लक्षण और उपाय

कैल्शियम (calcium), हड्डियों, दांतों और दिल की बीमारियों से बचे रहने के लिए बेहद जरूरी है।  कैल्शियम की कमी के कारण ज्यादातर लोग जोड़ों में दर्द, घबराहट और खराब नाखून की समस्या से परेशान रहते हैं। पर क्या कभी आपने कैल्शियम की अधिकता से होने वाली बीमारी के बारे में सुना है। जी हां, अगर कोई व्यक्ति अत्यधिक कैल्शियम का सेवन करता है तो, वो  हाइपरकैल्सीमिया (hypercalcemia) नामक बीमारी का शिकार हो सकता है। हाइपरकैल्सीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके खून में कैल्शियम की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है और ये शरीर के कई अंगों को प्रभावित करने लगती है। इसी बारे में हमने फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, नई दिल्ली के डॉ. संजय कुमार गुडवानी (Dr. Sanjay Kumar Gudwani) निदेशक, ईएनटी  से भी बात की और विस्तार से हाइपरकैल्सीमिया के कारण, लक्षण और उपायों के बारे में जाना। 

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Image credit: The Foodstate Company

क्या है हाइपरकैल्सीमिया-What is Hypercalcemia? 

कैल्शियम हमारे शरीर में विभिन्न स्थानों पर पाया जाने वाला खनिज है। पर जब आपके खून में सामान्य से अधिक कैल्शियम होता है, तो डॉक्टर इसे हाइपरकैल्सीमिया कहते हैं। यह एक गंभीर स्थिति है। हाइपरकैल्सीमिया के  मामले ज्यादातर हाइपर थायराइडिज्म के मामलों में नजर आते हैं, जहां पैराथायराइड ग्रंथि ज्यादा एक्टिव हो जाती है। ये स्थिति उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती जाती है, जिससे हड्डियों में कमजोरी, किडनी में पथरी, दिल की बीमारियां और यहां तक कि कैंसर आदि भी हो सकता है। 

हाइपरकैल्सीमिया का कारण- Hypercalcemia causes

1.  पैराथायरायड हार्मोन के कारण (Parathyroidism)

पैराथायरायड, थायरॉइड के पास गर्दन में स्थित चार मटर के आकार की ग्रंथियां है जहां से  पैराथायरायड हार्मोन (पीटीएच) का उत्पादन होता है। पीटीएच शरीर में कैल्शियम के सही संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। पर जब ये हार्मोन अंसतुलित हो जाता है तो, शरीर में कैल्शियम का लेवल बिगड़ने लगता है। जिससे हाइपरकैल्सीमिया हो जाता है।

2. ज्यादा कैल्शियम के सेवन से

दरअसल, एक उम्र के बाद लोगों के शरीर में कैल्शियम की कमी के लक्षण नजर आने लगते हैं। ऐसे में कई बार लोग लगातार कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ कैल्शियम के सप्लीमेंट्स भी लेने लगते हैं, जिससे ब्लड में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है और हाइपरकैल्सीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

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3. ज्यादा मात्रा में विटामिन डी लेने से

विटामिन डी ज्यादा मात्रा में लेने से भी शरीर में कैल्शियम का संतुलन बिगड़ जाता है। दरअसल,  सप्लीमेंट के रूप में बहुत अधिक विटामिन डी या कैल्शियम लेना आपके शरीर में कैल्शियम के स्तर को बढ़ा सकता है। ऐसे में आपकी हड्डियां आपके रक्त में कैल्शियम छोड़ती हैं जो कि खून में मिलने लगता है और कैल्शियम की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है। इसके अलावा कुछ एंटासिड्स यानी कि एसिडिटी की दवा भी शरीर में कैल्शियम का लेवल बढ़ा देती है।।

4. फेफड़ों के रोग और कैंसर

फेफड़े के कई गंभीर रोग हैं जो आपके विटामिन डी के स्तर को बढ़ा सकते हैं। दरअसल, जब कैल्शियम का अवशोषण अधिक होता है, जिससे आपके खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है। खासकर कुछ कैंसर, विशेष जैसे फेफड़ों का कैंसर, स्तन कैंसर और ब्लड कैंसर आदि, जो कि हाइपरकैल्सीमिया का खतरा पैदा कर सकता है।

 5. डिहाइड्रेशन 

डिहाइड्रेशन आमतौर पर हाइपरकैल्सीमिया के हल्के लक्षणों का कारण बनता है। आपके आपके शरीर में पानी की कमी होती है तो, डिहाइड्रेशन आपके कैल्शियम के स्तर को बढ़ाता है। दरअसल, पानी की कमी के कारण हमारा किडनी सही से काम नहीं कर पाता और किडनी कम कैल्शियम का उत्सर्जन करते हैं और अधिक विटामिन डी को सक्रिय करते हैं, जो कैल्शियम के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस तरह शरीर का संतुलन बिगड़ता है और हाइपरकैल्सीमिया का खतरा पैदा कर सकता है।

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हाइपरकैल्सीमिया के लक्षण-Hypercalcemia symptoms

  • भूख ना लगना
  • बार-बार प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • उल्टी और चक्कर आना
  • मसल्स क्रैंप्स बढ़ जाना
  • शरीर में अकड़न
  • पेट में दर्द
  • डिप्रेशन
  • थकान
  • याददाश्त कमजोर होना

हालांकि ये हाइपरकैल्सीमिया के शुरुआती लक्षण ही हैं। ये समय के साथ गंभीर हो सकते हैं और उसके बाद आपको कुछ गंभीर लक्षणों से भी गुजरना पड़ सकता है। जैसे कि 

  • -किडनी में दिक्कतों का बढ़ना जैसे कि किडनी फेलियर 
  • -हड्डियां कमजोर हो जाना
  • -पुरानी कब्ज की समस्या
  • -पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियां

हाइपरकैल्सीमिया की जांच और इलाज-Hypercalcemia treatment

हाइपरकैल्सीमिया को 3 भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है और इसके लेवल को चेक करके ही बताया जाता है कि शरीर हाइपरकैल्सीमिया कितना गंभीर जैसे कि 

हल्का हाइपरकैल्सीमिया : 10.5 से 11.9 mg/dL

मध्यम  हाइपरकैल्सीमिया: 12.0 से 13.9 mg/dL

गंभीर हाइपरकैल्सीमिया: 14.0 से 16.0 mg/dL

हाइपरकैल्सीमिया के अधिकांश मामलों का नियमित टेस्ट करने पर ही पता चलता है कि व्यक्ति की स्थिति क्या है।  पैराथायरायड  हार्मोन्स (Parathyroidism) को मापने के लिए संवेदनशील और विशिष्ट इम्यूनोकेमिलुमिनोमेट्रिक एसेज़ (immunochemiluminometric assays) का उपयोग किया जाना चाहिए।  इसे कैल्शियम के उच्च स्तर, कम फॉस्फोरस के स्तरों के साथ हाई पीटीएच लेवल को देख कर चेक किया जाता है। कैंसर के कारण ये स्थिति आने पर इमेजिंग स्टडी की जाती है। स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए मैमोग्राम का उपयोग किया जाता है और गुर्दे के कैंसर का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन किया जाता है। पैराथायरायड ग्रंथियों की जांच अल्ट्रासाउंड और एमआरआई के साथ की जाती है।

हाइपरकैल्सीमिया के इलाज की बात करें तो, इन तमाम स्थितियों को देख कर ही डॉक्टर इसका इलाज करते हैं। ऐसे में

  • -कैंसर होने पर कैंसर का इलाज जारी रहता है।
  • -उल्टी और पेशाब के माध्यम से खोए हुए तरल पदार्थ के लिए डॉक्टर ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्युशन दे सकते हैं। 
  • -हड्डी कमजोर होने पर इसे टूटने से रोकने के लिए दवाएं दी जाती हैं।
  • -किडनी खराब होने पर डायलिसिस की मदद ली जा सकती है।

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हाइपरकैल्सीमिया से बचाव के उपाय-Can hypercalcaemia be prevented?

क्या हाइपरकैल्सीमिया को रोका जा सकता है? इस प्रश्न के उत्तर में डॉ. संजय कुमार कहते हैं कि नहीं, सभी प्रकार के हाइपरकैल्सीमिया को रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, आईट्रोजेनिक हाइपरकैल्सीमिया को रोकने के लिए कैल्शियम की खुराक, विटामिन डी की खुराक और एंटासिड के अत्यधिक उपयोग से बचा जाना चाहिए। किडनी में पथरी वाले रोगियों और उच्च जोखिम वाली दवाओं का उपयोग करने वालों के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। साथ शरीर में कैल्शियम के स्तर को बढ़ने से रोकने के लिए आप कई टिप्स की मदद ले सकते हैं। जैसे कि 

  • -कभी भी अपने मन से और बिना डॉक्टर के बताए कैल्शिम सप्लीमेंट्स ना लें।
  • -शरीर में पानी की कमी ना होने दें और इसके लिए नियमित रूप से तरल पदार्थ और पानी से भरपूर फलों और सब्जियों का सेवन करें।
  • -योग और एक्सरसाइज करें जिससे आपकी हड्डियां मजबूत रहें और आपको बाहर से कैल्शियम की जरूरत ना हो।
  • -कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ लें। जैसे कि दूध,  दही, पनीर,  टोफू, तिल, पालक, संतरा और मछली।
  • -एक एक्टिव लाइफस्टाइल फॉलो करें।
  • -विटामिन डी के लिए सप्लीमेंट्स ना लें। इसके लिए सुबह 10 बजे से पहले वाली धूप में थोड़ी देर बैठ जाएं या टहल लें। 

कैल्शियम की अधिकता से जुड़ी इस बीमारी से बचने के लिए हमेशा याद रखें कि ओवर-द-काउंटर सप्लीमेंट्स सहित कोई भी दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर से जांच करवाएं और सलाह लें।

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