Children's Day Special: बच्चों के आंखों व दिमाग पर स्क्रीन गैजेट्स कैसे असर करते हैं? बता रहे हैं 4 एक्सपर्ट्स

इस Children's Day पर Onlymyhealth आपके लिए लाया है विशेष लेख, जिसमें 4 एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि बच्चों को स्क्रीन गैजेट्स देना कितना सही या गलत है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Nov 13, 2020
Children's Day Special: बच्चों के आंखों व दिमाग पर स्क्रीन गैजेट्स कैसे असर करते हैं? बता रहे हैं 4 एक्सपर्ट्स

कोविड-19 महामारी के कारण स्कूल मार्च से ही बंद पड़े हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लासेज का कॉन्सेप्ट ही महामारी से बचाव करते हुए पढ़ाई जारी रखने का एकमात्र विकल्प बचा है। नर्सरी से लेकर कॉलेज छात्रों तक, आजकल सभी बच्चे अपनी ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। इस ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों को स्कूल की पढ़ाई पूरी करने में जरूर मदद की है, लेकिन देखा जा रहा है इसका असर बहुत सारे बच्चों की आंखों पर पड़ रहा है। ऑनलाइन क्लासेज की वजह से बच्चे दिनभर घर के अंदर रहते हैं, जिससे वो फिजिकल एक्टिविटीज नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा एक और बड़ी समस्या है स्क्रीन के सामने घंटों बैठकर पढ़ना। पढ़ाई के बाद भी आजकल ज्यादातर बच्चे टीवी, लैपटॉप या मोबाइल पर टाइम पास करते हैं। ऐसे में बच्चों के स्क्रीन गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल से उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों की आंखों पर बढ़ते इसी बोझ और इसके उनके मस्तिष्क पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए ओनलीमायहेल्थ ने इस बाल दिवस (Children's Day 2020) पर 4 एक्सपर्ट्स का एक खास पैनल डिस्कशन आयोजित किया है, जिसमें एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि बच्चों के लिए स्क्रीन गैजेट्स का इस्तेमाल कितना खतरनाक है और इससे बचाव के लिए मां-बाप क्या कर सकते हैं। इस डिस्कशन में हमारे साथ 4 मेहमान जुड़े हैं, जिनका परिचय इस प्रकार है-

  • डॉ. राहिल चौधरी (Eye7 Eye Centre)
  • रूपा पाई (बच्चों की किताबों की प्रसिद्ध लेखिका)
  • रश्मि वाधवा (साइकोलॉजिस्ट)
  • रिचा वर्मा  (लोकप्रिय मॉम ब्लॉगर)
children using laptop

डॉ. राहिल से जानें स्क्रीन वाले गैजेट्स बच्चों की आंखों पर कैसे असर डालते हैं?

डॉ. राहिल बताते हैं, "आई फटीग (आंखों की थकान) दरअसल कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का ही दूसरा नाम है। कंप्यूटर या मोबाइल पर ज्यादा समय तक काम करने या पढ़ाई के दौरान आपकी आंखें कम झपकती हैं, जिसके कारण आंखों में रूखापन आ जाता है। इसके अलावा लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन को बहुत पास से देखने पर आंखों की मसल्स पर बहुत ज्यादा स्ट्रेस पड़ता है, जिसके कारण आंखें जल्दी थक जाती हैं। इसे ही आई फटीग या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहते हैं।
अगर आप स्क्रीन वाले गैजेट्स पर देर तक काम करते हैं, तो आपको 20-20-20 रूल फॉलो करना चाहिए। इस 20-20-20 रूल का मतलब है कि स्क्रीन वाले गैजेट्स पर पढ़ाई करते समय या कम करते समय आपको हर 20 मिनट बाद अपनी नजर हटानी है, 20 फीट दूर की किसी चीज को देखना है और 20 बार अपनी पलकें झपकानी हैं। इससे आपकी आंखों की नमी बनी रहेगी और आंखों में रूखापन नहीं आएगी।

इसके साथ ही आपको स्क्रीन से निकलने वाले ग्लेयर से बचने के लिए आंखों पर एंटी ग्लेयर चश्मा पहनना चाहिए या अपने गैजेट की स्क्रीन पर एंटी-ग्लेयर कांच लगाना चाहिए।

स्क्रीन की ब्लू लाइट आंखों को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

डॉ. राहिल बताते हैं कि स्क्रीन वाले गैजेट्स से हाई फ्रीक्वेंसी ब्लू लाइट निकलती हैं, जो आंखों से टकराकर सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी पैदा करती हैं। इसकी वजह से नींद लाने वाला खास हार्मोन मेलाटोनिन (Melatonin) कम बनता है और व्यक्ति को नींद नहीं आती है या देर से आती है। इसके कारण वो अगली सुबह फ्रेश नहीं फील करते हैं और थके रहते हैं। ये समस्या यंगस्टर्स में काफी बढ़ गई है क्योंकि ज्यादातर यंगस्टर्स रात में मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। इसके अलावा इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • आंखों में नमी बनाए रखने के लिए आई लुब्रिकेंट्स का प्रयोग हर 3-4 घंटे में करें। इन्हें आप बिना डॉक्टर की सलाह के भी केमिस्ट की शॉप से खरीदकर इस्तेमाल कर सकते हैं, बस इतना ध्यान रखें कि आई लुब्रिकेंट्स किसी अच्छे ब्रांड के हों।
  • लैपटॉप से बेहतर है कि डेस्कटॉप का इस्तेमाल करें, ताकि आंखों और स्क्रीन के बीच ज्यादा दूरी बनी रहे।

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बच्चों के मां-बाप इन बातों का रखें ध्यान

  • बच्चों के विकास की उम्र (8 साल से कम) में बच्चों को 1-2 घंटे से ज्यादा लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल न करने दें।
  • बच्चों को बाहर जाकर खेलने के लिए प्रेरित करें।
  • बहुत पास से स्क्रीन वाले गैजेट्स को इस्तेमाल करने से मना करें।
eye fatigue

स्क्रीन पर ज्यादा टाइम बिताने से प्रभावित होता है मस्तिष्क का विकास: रश्मि वाधवा

साइकोलॉजिस्ट रश्मि वाधवा ने बताया कि मोबाइल और लैपटॉप पर ज्यादा देर समय बिताना सिर्फ आंखों के लिए ही नहीं, बल्कि ब्रेन के लिए भी नुकसानदायक है। बच्चा जब विकसित हो रहा होता है, तो 10 साल की उम्र तक उसके मस्तिष्क का भी विकास होता रहता है। इस दौरान नई स्किल्स और नई चीजें सीखते जाने से उसके मस्तिष्क की वायरिंग उसी अनुसार हो जाती है, जो वो देखता या सुनता है। ऐसे में अगर बच्चा ज्यादातर समय स्क्रीन गैजेट्स पर बिता रहा है, मोबाइल गेम्स खेल रहा है, वीडियोज देख रहा है, तो उसके मस्तिष्क की कई क्षमताएं अविकसित रह जाती हैं, जिसका असर उसके जीवन पर आगे चलकर पड़ता है।

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स्क्रीन टाइम घटाने का बेहतर विकल्प हैं ऑडियो बुक्स

बच्चों की कई किताबें लिखने वाली मशहूर लेखिका रूपा पाई बताती हैं कि हर बच्चे का मन टेक्स्ट पढ़ने में लगे, ये जरूरी नहीं है। इसलिए ऐसे बच्चे जिन्हें नॉलेज चाहिए, लेकिन बुक्स पढ़ने में मन नहीं लगता, उनके लिए ऑडियो बुक्स एक अच्छा विकल्प हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य बच्चों तक नॉलेज पहुंचाने का होना चाहिए। इसी विषय पर साइकोलॉजिस्ट रश्मि वाधवा ने बताया कि ऑडियो बुक्स बच्चों के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती हैं क्योंकि बच्चे एक बार में नहीं सीखते हैं और ऑडियो बुक्स में एक ही विषय को कई अलग-अलग तरीकों से अलग-अलग लोग कम समय में समझा सकते हैं। इसलिए अगर एकेडमिक किताबें ऑडियो बुक्स में बदल दी जाएं, तो शायद बच्चों की आंखों को भी आराम मिलेगा और उन्हें सीखने में भी मदद मिलेगी।

children listening music

बच्चों का स्क्रीन टाइम घटाने के लिए रेगुलेशन है जरूरी: रिचा वर्मा

ब्लॉगर रिचा वर्मा बताती हैं कि बच्चों का स्क्रीन टाइम घटाने के लिए रेगुलेशन बहुत जरूरी है। सबसे जरूरी है टीवी और मोबाइल के प्रयोग पर रोकथाम लगाने की। आप बच्चों को उतनी देर के लिए ही गैजेट का इस्तेमाल करने के लिए दें, जितनी देर उन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। क्लासेज के अलावा बाकी के समय में गैजेट्स के लिए इस्तेमाल के लिए उनकी स्क्रीन को ऑटोलॉक मोड में सेट कर सकते हैं, जिससे एक निश्चित समय बाद स्क्रीन अपने आप बंद हो जाएगी। आप बच्चों को अलग-अलग एक्टिविटीज में बिजी रख सकते हैं।

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साल में 1 बार जरूर कराएं बच्चों का आई चेकअप: डॉ. राहिल

डॉ. राहिल बताते हैं कि डेवलपिंग एज (8-10 साल की उम्र तक) बच्चों का हर साल आई चेकअप कराते रहना चाहिए, ताकि अगर उनके विजन में कोई समस्या है, तो उसे ठीक किया जा सके। ऐसा न करने पर इस बात की आशंका होती है कि बच्चे की आंखों का समुचित विकास न हो और उसे जीवनभर कम दिखने की समस्या बनी रहे। टीवी अगर 3-4 मीटर की दूरी से देखा जाए, तो आंखों के लिए नुकसानदायक नहीं है।

बच्चों को इन दिनों इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है

  • प्रदूषण की वजह से एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस
  • स्क्रीन गैजेट्स की वजह से ड्राई आईज की समस्या

इस तरह कुछ बातों का ध्यान रखकर, बच्चों के स्क्रीन गैजेट्स के इस्तेमाल के समय को कम करके और उन्हें पढ़ाई के दौरान आंखों को झपकाने, आई लुब्रिकेंट्स के सही इस्तेमाल की ट्रेनिंग देकर आप बच्चों की आंखों को खराब होने से बचा सकते हैं।

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