खुद से कैसे जानें कि आप डिप्रेशन में हैं या नहीं? डॉक्टर के बताए इन 3 लक्षणों पर दें ध्यान

कोरोनावायरस की वजह से मानसिक रोग बढ़ रहे हैं। यहां बताए गए उपयों को अपनाकर आप अपने डिप्रेशन से बाहर निकल सकते हैं।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiUpdated at: May 13, 2021 09:58 IST
खुद से कैसे जानें कि आप डिप्रेशन में हैं या नहीं? डॉक्टर के बताए इन 3 लक्षणों पर दें ध्यान

कोरोना वायरस ने दुनिया को सोशल डिस्टेंसिंग के मार्फत एक दूसरे अलग कर दिया है। लोग घरों में सिकुड़ गए हैं। कोरोना से बचते-बचते शरीर तो बच रहा है पर मन नहीं बच पा रहा है। लंबे समय से लोगों से दूर रहना और कोरोना के डर ने लोगों को मानसिक रूप से कमजोर किया है। यही वजह है कि कोरोना के इन सालों में मानसिक बीमारियां बढ़ी हैं। उन्हीं मानसिक बीमारियों का हिस्सा डिप्रेशन। डिप्रेशन एक ऐसी अवस्था है जहां व्यक्ति नाउम्मीदी में जी रहा होता है। उसे लगता है कि दुनिया में अब उसके लिए कुछ अच्छा बचा ही नहीं है। गुरुग्राम के अवेकनिंग रिहैब में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रज्ञा मलिक का कहना है कि कोरोना के समय में लोगों में पैनिक अटैक्स और एंग्जाइटी बढ़ी है। पैनिक अटैक और एंग्जाइटी के बाद अगली स्टेज डिप्रेशन की होती है। यह एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसका समय पर इलाज होना जरूरी है। 

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डिप्रेशन को ऐसे पहचानें

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक डिप्रेशन एक कॉमन मेंटल डिसऑर्डर है जो दुनियाभर में 264 मिलियन लोगों को प्रभावित कर रहा है। डॉक्टर प्रज्ञा मलिक का कहना है कि डिप्रेशन दिमाग की एक स्टेज है। कोई व्यक्ति अगर दो सप्ताह तक दुखी है तो वह डिप्रेसिव इंसान कहलाता है। उसका इंटरेस्ट खत्म होने लगता है। नींद पूरी न होना। भूख कम लगना। सोकर उठने पर थकान महसूस करना। आत्महत्या के बारे में सोचना। यह सभी बहुत ही कॉमन लक्षण हैं जो डिप्रेसिव इंसान में देखने को लगती हैं। उन्होंने बताया कि कोई डिप्रेशन में है या आप खुद डिप्रेशन में हैं, इसकी पहचान निम्न लक्षणों को देखकर कर सकते हैं। 

असहाय (helpless) महसूस करना

जो व्यक्ति डिप्रेशन को झेल रहा होता है उसे ऐसा लगता है कि उसकी कोई मदद नहीं कर पाएगा, ऐसे में वो खुद को असहाय महसूस करता है। इस कंडीशन को हेल्पलेसनेस कहते हैं। डॉक्टर प्रज्ञा का कहना है कि हमारे पास जब पेशेंट आते हैं तब वे इस तरह के लक्षण बताते हैं। ऐेसे व्यक्ति काम को करने से पहले गिवअप कर देते हैं। उन्हें हर छोटे काम में गुस्सा आता है। ऐसे लोगों में आत्मविश्वास की कमी होती है। कोई भी काम करने के लिए खुद को तैयार नहीं कर पाते और काम न करने के बहाने ढूढ़ते हैं।

निराशा (hopelessness) महसूस करना

होपलेसनेस में इंसान को अपना भविष्य अंधेरे में दिखाई देता है। उसे लगता है कि वो आगे आने वाले समय में कुछ नहीं कर पाएगा। दूसरा कोई अन्य व्यक्ति भी उसकी मदद नही कर सकता। वह व्यक्ति भविष्य को लेकर होप खत्म कर देता है। जिससे उसकी एनर्जी कम होने लगती  है।

नाकाबिल (worthlessness) महसूस करना

इस कंडीशन में पेशेंट कहता है कि मैं ये काम करने के लायक ही नहीं हूं। वह कहता है कि मेरे अंदर वो क्षमता नहीं है जो मैं ये काम कर सकूं। वह खुद को कुछ भी नहीं मानता। डिप्रेशन के इस लक्षण में इंसान  खुद को सबसे ज्यादा नाकाबिल महसूस करने लगता है। वह यह सोचता है कि मैं अच्छा इंसान नहीं हूं। सभी को मुझसे घृणा करनी चाहिए। वह यह सोचता है कि वह किसी के काम का नहीं है। वह खुद की ही क्वालिटी पर शक करने लगता है। 

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डॉक्टर की जरूरत कब पड़ती है?

डॉक्टर प्रज्ञा मलिक का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लगातार दो हफ्ते तक होपलेस, हेल्पलेस और वर्थलेस महसूस कर रहा है तब उसे डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इस वक्त मरीज का ट्रीटमेंट बहुत जरूरी है। 

डिप्रेशन के कारण

हर व्यक्ति में डिप्रेशन के कारण अलग-अलग होते हैं। हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग हैं। किसी व्यक्ति के ट्रिगर पर निर्भर करता है। लेकिन मनोवैज्ञानिकों ने जो आम कारण डिप्रेशन के मरीजों में देखे हैं वे निम्न हैं। 

  • आनुवांशिक कारण
  • लंबे समय तक तनाव में रहना
  • न्यूरोट्रांसमीटर में बदलाव
  • किसी प्रिय को खो देना
  • किसी बात का दुख
  • बच्चों में नंबर को लेकर दुख
  • लंबे समय तक ड्रग्स लेना

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इलाज (Treatment Of Depression)

डॉक्टर प्रज्ञा मलिक का कहना है कि हर व्यक्ति के लक्षण अलग होते हैं इसलिए हर व्यक्ति के लिए इलाज अलग है। सभी के लिए कोई एक इलाज नहीं है। लेकिन जो कॉमन लक्षण आते हैं उनके लिए निम्न इलाज के तरीके अपनाते हैं। 

  • अगर किसी पेशेंट में सुसाइड विचार हैं तो वहां पर सबसे पहले उस मरीज की दवाएं चलती हैं। फिर आगे का इलाज होता है। ये दवाएं कुछ समय के लिए होती हैं। इन दवाओं से मरीज को कोई नुकसान नहीं होता है। ये दवाएं दिमाग में न्यूरोकैमिलक को संतुलित करती हैं। डॉक्टर का कहना है कि मरीज की दवाओं के बाद उसके बिहेवियर उसकी सोच पर काम किया जाता है।  
  • मरीज की कॉग्नेटिव बिहेवियर थेरेपी की जाती है।
  • मोटिवेशनल थेरेपी भी की जाती है। 
  • पेशेंट के लिए सपोर्ट करते हैं। 
  • पेशेंट के ट्रिगर को समझते हैं, फिर उसका इलाज करते हैं।
  • मरीज की कोपिंग स्किल्स को डेवलेप करते हैं। किसी व्यक्ति को डिप्रेशन तब होता है जब वह उस कंडीशन से बाहर नहीं निकल पाता है। तो पेशेंट को किसी भी सिचुएशन से डील करना सिखाते हैं। 

कोरोना वायरस के डिप्रेशन से कैसे बचें

डॉक्टर प्रज्ञा मलिक का कहना है कि पैनिक अटैक और एंग्जाइटी के बाद डिप्रेशन की कंडीशन आती है। वे बताती हैं कि अभी उनके पास पैनिक अटैक और एंग्जाइटी के मामले ज्यादा आ रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही वे यह भी कहती हैं कि पोस्ट कोविड लोगों को सबसे ज्यादा मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना होगा। यहां हम कुछ तरीके बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप कोरोना वायरस के डिप्रेशन से बाहर निकल सकते हैं।

किसी प्रोफेशनल की मदद लें

अगर आप दो हफ्ते से ज्यादा दुखी हैं। आत्महत्या के ख्याल आ रहे हैं तो बिना देर किए किसी मनोचिकित्सक से मिलें। इससे समय रहते आपको मदद मिल सकेगी। मनोचिकित्सक से बात करने से घबराएं नहीं, क्योंकि भारत में मनोरोगों को मनोरोग से ज्यादा भूत-बाधा माना जाता है। तो उससे बाहर निकलें और अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें। 

छोटे कामों में खुशी ढूढ़ें

जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तब उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता। उसका किसी चीज में इंटरेस्ट नहीं रहता है। वह हमेशा दुखी रहता है, लेकिन अगर आप थोड़ी देर के लिए खुद की मदद करना चाहते हैं तो कुछ काम करें। वो काम करें जिसे करने में आपको अच्छा लगता है। अब वो काम कुछ भी हो सकता है। इससे आपको खुशी मिलेगी

एक्सरसाइज

खुद को एक्सरसाइज के लिए प्रेरित करें। डिप्रेशन से बाहर निकलने में सबसे ज्यादा आप खुद की मदद कर सकते हैं। सबसे ज्यादा आप खुद को जानते हैं। इसलिए अपने शरीर को जकड़ने मत दीजिए। एक्सरसाइज के कुछ तरीके निकालिए और शरीर को फिजिकली फिट रखने की कोशिश कीजिए। 

अवसाद एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिससे भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जूझ रही है। कोरोना वायरस के लक्षण ऊपरी तौर पर दिख जाते हैं लेकिन डिप्रेशन दिमागी स्टेज है, जो किसी को दिखाई नहीं देती। अगर आप भी अपने डिप्रेशन को पहचानना चाहते हैं तो ऊपर बताए गए लक्षणों पर ध्यान दें। समय रहते डॉक्टर की मदद लें। 

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