Thu Oct 22, 2026 | 02:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी क्यों हो सकता है संक्रमण? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर ही आगे की रिकवरी करने की सलाह दी जाती है। घर पर रहकर कई बार मरीज को इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। ऐसा क्यों होता है और मरीज के किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? जानने के लिए पढ़ें ये लेख।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी क्यों हो सकता है संक्रमण? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाजअस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी क्यों हो सकता है संक्रमण? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अस्पताल में जरूरी रिकवरी होने के बाद डॉक्टर मरीज को घर जाने की परमिशन दे देते हैं, लेकिन साथ ही उन्हें सर्जरी में हुए घावों को संक्रमण से बचाव की सलाह भी देते हैं। सर्जरी के दौरान शरीर में चीरा लगाए जाने का घाव जल्दी ठीक नहीं होता। ऐसे में घर पर मरीज को इंफेक्शन से बचाव की सलाह दी जाती है। International Infection Prevention Week के मौके पर इस बारे में हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि कई बार घाव में संक्रमण के लक्षण अस्पताल से घर आने के कुछ दिन बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में घाव के आसपास लालिमा, दर्द या सूजन बढ़ सकती है। कुछ मरीजों को बुखार भी हो सकता है या पस भी निकल सकती है। इसलिए मरीज को इंफेक्शन से जुड़े लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए और समय पर डॉक्टर से फॉलो-अप लेते रहना चाहिए।

घर आने के बाद क्यों रहता है इंफेक्शन का रिस्क?

Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के मुताबिक, सर्जरी के बाद घाव वाली जगह पर होने वाले संक्रमण को सर्जिकल साइट इंफेक्शन (SSI) कहते हैं। हालांकि यह इंफेक्शन स्किन के अंदर ही रहता है, लेकिन कुछ मामलों में अंदर के टिश्यू या अंगों तक पहुंचकर गंभीर नुकसान कर सकता है। इसलिए अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घाव को संक्रमण से बचाने के लिए मरीज का ध्यान रखना चाहिए।

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “दरअसल, अगर घर पर मरीज साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान नहीं रखता व डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही तरीके से घाव साफ नहीं करता, तो सर्जरी वाली जगह की स्किन या आस-पास के टिश्यू को नुकसान पहुंचने लगता है। इससे मरीज को बुखार भी आ सकता है। कई बार मरीज को दूसरी समस्या जैसे डायबिटीज है, तो घाव भरने में समय लग सकता है। अगर कोई मोटापे से ग्रस्त है, इम्यून सिस्टम कमजोर है या स्मोकिंग करता है, तो भी इंफेक्शन होने का रिस्क बढ़ सकता है। आमतौर पर सर्जरी के प्रकार, मरीज की सेहत और घाव की सही देखभाल न होने पर इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है।”

infection after dischargeinfection after discharge

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सर्जरी के बाद संक्रमण के लक्षण

Dr. Vineeta Singh Tandon ने कहा कि सर्जरी के बाद शुरुआती दिनों में घाव की जगह पर दर्द या सूजन रह सकती है। अगर मरीज को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

  • घाव के आसपास लालिमा बढ़ना - अगर सर्जरी वाली जगह की स्किन पहले से ज्यादा लाल दिख रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • दर्द और सूजन बढ़ना - कई बार मरीज को महसूस होता है कि घाव के आस-पास सूजन ज्यादा हो गई है और उसमें दर्द बढ़ रहा है, तो यह इंफेक्शन का लक्षण है।
  • घाव से पस निकलना - अगर घाव से पीला या हरा डिस्चार्ज, पस या बदबूदार तरल पदार्थ निकले, तो ये संक्रमण के संकेत हो सकते हैं।
  • बुखार आना - घर आकर मरीज को अगर लगातार बुखार रहता है या टूट-टूटकर बुखार आता है, तो ये इंफेक्शन का रिस्क है।
  • घाव का खुलने लगना - अगर मरहम पट्टी करते हुए मरीज को लगे कि उसका घाव सिकुड़ने के बजाय खुलने लगा, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

घर पर घाव की देखभाल कैसे करें?

Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि सर्जरी के बाद घर पर की जाने वाली देखभाल रिकवरी का जरूरी हिस्सा होता है। डॉक्टर ने जो भी निर्देश दिए होते हैं, उनका ध्यान से पालन करना चाहिए।

  • घाव या पट्टी छूने से पहले हाथ साफ जरूर करें। घाव पर पट्टी करने के बाद साबुन और पानी से हाथ धोएं।
  • मरीज के घाव को बिना वजह न छुएं।
  • ड्रेसिंग कब बदलनी है, घाव को पानी से साफ कर सकते हैं या नहीं और नहाते समय क्या सावधानी रखनी है? इन सभी की जानकारी डॉक्टर से जरूर लें।
  • घाव पर खुद से कोई क्रीम न लगाएं। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीसेप्टिक, पाउडर, तेल या दूसरी चीजों का इस्तेमाल न करें।
  • अगर दवा या एंटीबायोटिक दी गई है, तो उसकी सही डोज समय पर लें। खुद से दवा बंद न करें और न ही कोई दवा शुरू करें।
  • डॉक्टर से रेगुलर फॉलो-अप जरूर लें।

डॉक्टर से कौन से सवाल करने चाहिए?

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं कि अस्पताल से छुट्टी लेने से पहले ये बातें जरूर पूछनी चाहिए।

  • ड्रेसिंग कैसे करनी है और कितने दिनों में पट्टी को बदलना है?
  • कौन-सी दवा कब लेनी है?
  • फॉलो-अप के लिए कब डॉक्टर से मिलना है?
  • घाव में किस तरह के बदलाव होने पर डॉक्टर से तुरंत मिलना जरूरी है?
  • अगर किसी मरीज को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो उसकी देखभाल कैसे करनी है?

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निष्कर्ष
मरीज को इंफेक्शन से बचाना बहुत जरूरी है, ताकि उसकी रिकवरी तेजी से हो सके। इसके लिए मरीज के आस-पास के लोगों को साफ-सफाई और हाइजीन का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर मरीज को किसी भी तरह की समस्या होती है और असामान्य बदलाव महसूस होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

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FAQ

  •  क्या डायबिटीज या कैंसर के मरीजों को डिस्चार्ज के बाद इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है?

    हाई ब्लड शुगर, कैंसर के इलाज या स्टेरॉयड ले रहे मरीजों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है। ऐसे मरीजों में सामान्य बैक्टीरिया भी गंभीर और तेजी से फैलने वाला इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं।
  • क्या डिस्चार्ज के बाद परिजनों या विजिटर्स के मिलने-जुलने से भी इंफेक्शन हो सकता है?

    डिस्चार्ज के शुरुआती 10 से 15 दिनों तक मरीज की इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है। रिश्तेदारों या पड़ोसियों के बार-बार मिलने आने, हाथ मिलाने या गले मिलने से बाहर के वायरस और बैक्टीरिया आसानी से मरीज में ट्रांसमिट हो सकते हैं। रिकवरी के शुरुआती दिनों में विजिटर्स की संख्या सीमित रखनी चाहिए और सभी को मास्क पहनने व सैनिटाइज करने की सलाह देनी चाहिए।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 22, 2026 13:10 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon