Fri Oct 16, 2026 | 07:35 PM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

बुखार ठीक होने के 2-3 महीने बाद क्यों झड़ते हैं बाल? डॉक्टर से जानें वजह

बुखार के बाद दो से तीन महीने बाद लोगों को बाल झड़ने की समस्या होने लगती है और यह समस्या कुछ महीनों तक बनी रह सकती है। इस वजह से कई बार मरीजों को लगता है कि अब बाल झड़ते ही रहेंगे, लेकिन ऐसा नहीं होता। यह समस्या कुछ समय के लिए ही रहती है, लेकिन इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है।
बुखार ठीक होने के 2-3 महीने बाद क्यों झड़ते हैं बाल? डॉक्टर से जानें वजहबुखार ठीक होने के 2-3 महीने बाद क्यों झड़ते हैं बाल? डॉक्टर से जानें वजह

बुखार उतरने या ठीक होने के कुछ दिन तक कमजोरी धीरे-धीरे ठीक होने लगती है, लेकिन कुछ महीनों बाद अचानक बाल झड़ने लगते हैं। कभी नहाते समय, कंघी करते हुए या तकिए पर पहले से ज्यादा बाल दिखने लगते हैं, तो चिंता होने लगती है। कई लोगों को समझ नहीं आता कि बुखार के बाद रिकवरी तो होना शुरू हो गई है, लेकिन बाल क्यों झड़ने लगे हैं। इस बारे में दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित Advanced Skin Clinic की Founder, Aesthetic Physician, Cosmetologist And Skin Specialist डॉ. करुणा मल्होत्रा ने बताया कि तेज बुखार का असर बालों पर तुरंत दिखें, यह जरूरी नहीं है। कई बार बुखार ठीक होने के बाद जब व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है, तो बाल झड़ने लगते हैं। हालांकि, यह कुछ समय के लिए होता है और मेडिकल भाषा में इसे टेलोजन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium) कहा जाता है।

बुखार ठीक होने के बाद बाल क्यों झड़ते हैं?

Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “बालों की ग्रोथ एक निश्चित चक्र के अनुसार होती है। इसमें बाल बढ़ते हैं, कुछ समय के लिए आराम की अवस्था में जाते हैं और फिर झड़ जाते हैं। सामान्य तौर पर रोज कुछ बाल झड़ना स्वाभाविक है, लेकिन जब शरीर को तेज बुखार का कारण इंफेक्शन हो दाता है, तो इससे बालों की ग्रोथ का चक्र प्रभावित हो सकता है। इस दौरान बाल बढ़ने के बजाय आराम की अवस्था में चले जाते हैं और फिर कुछ समय बाद ये एक साथ झड़ने लगते हैं।”

Cleveland Clinic के अनुसार, तेज बुखार ठीक होने के बाद दो से तीन महीने के अंतराल में बाल झड़ने की समस्या हो सकती है। यह टेलोजन एफ्लुवियम के कारणों में से एक हो सकता है, लेकिन इसमें बाल कुछ समय के लिए झड़ते हैं।

टेलोजन एफ्लुवियम क्या है?

Cleveland Clinic के मुताबिक, यह समस्या बालों के झड़ने की एक आम वजह है। इसमें सिर के कई हिस्सों से बाल सामान्य से ज्यादा झड़ने लगते हैं। इसे सिर्फ एक जगह बाल कम होने के बजाय पूरे सिर में बालों का घनापन घटने के रूप में देखा जा सकता है। इस कंडीशन में हेयर फॉलिकल्स समय से पहले आराम की अवस्था में चले जाते हैं। इसके बाद बाल झड़ने लगते हैं और सिर के बाल पहले से पतले दिखाई दे सकते हैं। इसका कारण तेज बुखार के अलावा, गंभीर बीमारी और पोषण की कमी भी हो सकते हैं।

hair fall after feverhair fall after fever

यह भी पढ़ें- क्‍या बालों के झड़ने का कारण है DHT हार्मोन? एक्‍सपर्ट से समझें दोनों का संबंध

क्या डेंगू के बाद भी बाल झड़ सकते हैं?

Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “मेरे पास कई बार खासतौर पर महिलाएं आती है, जो बताती है कि डेंगू ठीक होने के दो से तीन महीने बाद बाल झड़ना शुरू हो गए हैं। उन्हें बालों के गुच्छे नहाते हुए और कंघी करते हुए बहुत ज्यादा महसूस होते हैं। अगर डेंगू जैसी गंभीर बीमारी के बाद कुछ लोगों को बाल झड़ने की परेशानी होती है, तो इसका कारण डेंगू के दौरान तेज बुखार और शारीरिक तनाव हो सकता है। इस वजह से कई बार बालों की ग्रोथ का नॉर्मल साइकिल प्रभावित हो सकता है।”

उन्होंने कहा, “कई बार डेंगू ठीक होने के कुछ महीने बाद मरीजों को बाल झड़ने की समस्या हो सकती है। अगर इसका कारण टेलोजन एफ्लुवियम है, तो बालों का झड़ना आमतौर पर धीरे-धीरे कम हो सकता है और नए बाल आने लगते हैं। हालांकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डेंगू के बाद जरूरी नहीं है कि हर मरीज के ही बाल झड़ने लगे। अगर बाल बहुत तेजी से गिर रहे हैं या सिर पर खाली पैच बन रहे हैं, तो इसकी सलाह डॉक्टर से लेनी चाहिए।”

क्या हार्मोन भी बाल झड़ने का कारण बन सकता है?

Dr. Karuna Malhotra ने बताया कि बुखार के बाद शरीर पर स्ट्रेस पड़ सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने के कारण भी बालों की ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है। मरीज बीमारी के कारण स्ट्रेस में आ जाता है और तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ने लगता है। हालांकि, इसकी कोई रिसर्च मौजूद नहीं है, लेकिन बुखार के बाद स्ट्रेस, खान-पान में बदलाव और कमजोरी का असर बालों पर असर डाल सकता है।

बुखार के बाद बाल झड़ना कब तक बंद हो सकता है?

Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “अगर बाल झड़ने की वजह टेलोजन एफ्लुवियम है, तो यह आमतौर पर अस्थायी समस्या होती है। ट्रिगर खत्म होने के बाद बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम हो सकता है, लेकिन हर व्यक्ति में ठीक होने का समय अलग हो सकता है। कई बार लोगों के बाल वापस या घनापन आने में थोड़ा समय लग सकता है। ऐसे समय में बालों को जोर से खींचने, बार-बार हेयर ट्रीटमेंट देने या बिना सलाह के हेयर फॉल की दवाएं लेने से बचना चाहिए।”

Cleveland Clinic के अनुसार, इस स्थिति में बालों का झड़ना अक्सर 3 से 6 महीने के भीतर कम होने लगते हैं और इसके बाद नए बालों की ग्रोथ नजर आ सकती है। इस दौरान मरीजों को बैलेंस्ड डाइट जैसे आयरन, विटामिन या थायराइड से जुड़ी समस्या हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेकर सलाह लेनी चाहिए।

डॉक्टर की सलाह

Dr. Karuna Malhotra सलाह देती हैं कि बुखार के कुछ महीने बाद बाल झड़ने का कारण हमेशा तेज बुखार नहीं होता। अगर बाल लगातार झड़ रहे हैं, समस्या छह महीने से ज्यादा बनी हुई है, सिर पर पैच बन रहे हैं या स्कैल्प पर खुजली, लालिमा और दर्द जैसे लक्षण हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

यह भी पढ़ें- रात में बालों में तेल लगाकर सोना सही या गलत? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें

निष्कर्ष
बुखार के बाद कुछ समय तक बाल झड़ना चिंता की बात नहीं होती और कई बार बुखार ठीक होने के दो से तीन महीने बाद बाल झड़ने लगते हैं। अगर बाल झड़ने के बाद कुछ समय बाद दोबारा बाल आने लग सकते हैं, लेकिन अगर बालों का घनापन लगातार कम होता रहे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी हो जाता है।

All Image Credit: Magnific 

FAQ

  • बालों का झड़ना कितना सामान्य है और कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

    रोजाना 50 से 100 बाल गिरना सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर 6 महीने से अधिक समय तक लगातार बाल झड़ते रहें, सिर पर गंजेपन के पैच दिखने लगें, या स्कैल्प में खुजली व डैंड्रफ बहुत बढ़ जाए, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 
  • क्या बालों को रोजाना शैम्पू करने से हेयर फॉल बढ़ जाता है?

    शैम्पू करने से सिर्फ वही बाल गिरते हैं जो पहले से ही अपनी जड़ छोड़ चुके होते हैं। हालांकि, केमिकल युक्त शैम्पू के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से स्कैल्प ड्राई हो सकता है। हफ्ते में दो से तीन बार सल्फेट-फ्री माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करना सबसे बेहतर है। 

Read Next

→ बाल धोने के बाद भी स्कैल्प ऑयली रहता है? इन 6 गलतियों की वजह से हो सकती है समस्या

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 16, 2026 17:41 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Karuna Malhotra