कुछ लोगों को ज्यादा काम किए बगैर भी थकान और कमजोरी महसूस होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे एनीमिया, थायराइड, डायबिटीज, विटामिन की कमी, संक्रमण, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट, नींद से जुड़ी समस्याएं, डिप्रेशन या एंग्जाइटी जैसी भावनात्मक समस्याएं भी कमजोरी और थकान का कारण बन सकती हैं। Dr. Kamalesh A, Senior Consultant Physician At Yashoda Hospitals, Secunderabad ने बताया कि भले ही व्यक्ति ने अधिक काम न किया हो, लेकिन नींद पूरी न होना, शरीर में पानी की कमी, सही डाइट न लेना, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी भी थकान और कमजोरी की वजह हो सकती है। आइए इन कारणों को विस्तार से समझते हैं।
Mayo Clinic के मुताबिक, थकान और कमजोरी के पीछे क्रॉनिक किडनी डिजीज, हार्ट डिजीज, हेपेटाइटिस ए, बी और सी, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, लिवर की बीमारी, पार्किंसन रोग, रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।
एनीमिया, थायराइड, डायबिटीज

- एनीमिया में हीमोग्लोबिन कम होने के कारण थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
- हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड हार्मोन कम होने के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है जिसके कारण थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
- डायबिटिक मरीजों को अक्सर ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है। कई बार जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो कमजोरी बढ़ सकती है। वजन ज्यादा होने के कारण भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है।
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दवाओं का साइड इफेक्ट
कुछ ऐसी दवाएं भी होती हैं जिसके कारण व्यक्ति को अधिक नींद आती है, थकान और हाई डोज के कारण कमजोरी महसूस होती है। इनमें कुछ एलर्जी मेडिसिन और नींद की दवाएं शामिल हैं। कई बार खाली पेट दवाएं लेने के कारण या गलत डोज लेने से भी दवा लेने के बाद थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
साल 2013 में European Journal Of Pharmacology में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं लेने से कुछ लोगों को थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसका असर अलग हो सकता है। ये दवाएं दिमाग को प्रभावित कर सकती हैं, जिसकी वजह से सुस्ती, थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है।
विटामिन्स की कमी बन सकती है थकान की वजह
कुछ पोषक तत्व और विटामिन्स ऐसे होते हैं जिनकी कमी होने पर शरीर में थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। जैसे विटामिन बी12, फोलेट, विटामिन डी। हालांकि, थकान या कमजोरी होने पर सीधे सप्लीमेंट्स का सेवन न शुरू करें, पहले जांच कराना जरूरी है।
इंफेक्शन और थकान का कनेक्शन
कई ऐसे इंफेक्शन हैं जो शरीर में प्रवेश करने के बाद थकान और कमजोरी का कारण बन सकते हैं जैसे वायरल इंफेक्शन, फ्लू, बुखार वगैरह। इंफेक्शन में अक्सर मरीजों को भूख कम लगना, सुस्ती, बॉडी पेन महसूस हो सकता है। कई बार इंफेक्शन ठीक होने के बाद कुछ समय तक कमजोरी बनी रह सकती है। इस दौरान हेल्दी डाइट लेने की सलाह दी जाती है।
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नींद की कमी
शरीर की एनर्जी को बढ़ाने के लिए नींद जरूरी है। जब हम किसी कारणवश कम होते हैं या नींद पूरी नहीं हो पाती है, तो सुस्ती, कमजोरी, चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण नजर आते हैं।
डिप्रेशन और एंग्जाइटी
डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी मानसिक समस्याओं का बुरा असर केवल मन नहीं बल्कि शरीर पर भी पड़ सकता है। डिप्रेशन और एंग्जाइटी के कारण व्यक्ति की भूख, नींद, लाइफस्टाइल खराब हो सकती है। इस वजह से व्यक्ति को थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
कमजोरी और थकान को कैसे दूर करें?
National Health Service, UK के मुताबिक, कमजोरी और थकान से बचने के लिए धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन न करें, सोने से पहले एक्सरसाइज, कैफीन या किसी भी को खाने से बचें। यहां, तक कि सोने से पहले स्मार्टफोन और स्क्रीन का इस्तेमाल भी नहीं करने की सलाह दी गई है।
- प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी12 युक्त चीजों का सेवन करें। अंडा, पालक, दही जैसे विकल्पों को डाइट में शामिल करें।
- जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स के लिए फल और सब्जियां खाएं।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और लो कैलोरी डाइट लेने से बचें।
- स्ट्रेस से बचने के लिए डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन की मदद लें।
- काम के बीच छोटे ब्रेक लें।
- लगातार बैठे रहने से बचें और रोजाना हल्की वॉक करें।
शरीर में हो रहे इन बदलावों पर गौर करें
अगर कमजोरी इतनी ज्यादा है कि चलने, बोलने, सामान उठाने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। अपने लक्षणों का रिकॉर्ड भी रखें। इसमें अनिद्रा, डाइट, ली जा रही दवाएं और वजन कम होना, बुखार, चक्कर, दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में परेशानी या मूड में बदलाव जैसी समस्याओं को नोट करें और इन पर गौर करें।
थकान और कमजोरी में ये जांच हो सकती हैं
लक्षणों के आधार पर डॉक्टर शारीरिक जांच के साथ कुछ ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इनमें विटामिन लेवल की जांच, थायराइड टेस्ट, ब्लड शुगर लेवल टेस्ट और हीमोग्लोबिन टेस्ट शामिल हो सकते हैं।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
अगर थकान के साथ सीने में दर्द, बहुत ज्यादा सांस फूलना, बेहोशी, भ्रम, अचानक शरीर के एक तरफ कमजोरी या असामान्य ब्लीडिंग हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
इसके अलावा एनीमिया, थायरॉयड की समस्या, डायबिटीज, विटामिन की कमी, संक्रमण, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट, नींद से जुड़ी समस्याएं और डिप्रेशन या एंग्जायटी जैसी भावनात्मक समस्याएं भी कमजोरी और थकान का कारण बन सकती हैं। चलने, बोलने, सामान उठाने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होने पर गौर करें। डॉक्टर विटामिन टेस्ट, थायराइड, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। थकान के अलावा सीने में दर्द, ज्यादा सांस फूलना, बेहोशी, भ्रम जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। थकान और कमजोरी से बचने के लिए प्रोटीन, आयरन युक्त फूड्स को डाइट में शामिल करें, मेडिटेशन और योग की मदद लें, डिहाइड्रेशन से बचें, काम के बीच ब्रेक लें और लगातार बैठे रहने की आदत से बचें।
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FAQ
सुबह उठते ही कमजोरी क्यों महसूस होती है?
नींद पूरी न होने, डिहाइड्रेशन, देर रात भोजन, जैसे कारणों के चलते सुबह कमजोरी महसूस हो सकती है।क्या थकान होने पर अधिक चाय-काॅफी का सेवन सही है?
चाय और कॉफी में कैफीन होता है जिससे कुछ समय तक सतर्कता महसूस होती है, लेकिन इससे थकान का इलाज नहीं होता। ज्यादा कैफीन नींद को खराब कर सकता है।
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Sep 18, 2026 14:30 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Kamalesh A