Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना किसके लिए फायदेमंद है और किसके लिए नहीं?

आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना हर किसी के लिए सही नहीं होता है, यह व्यक्ति की प्रकृति, मौसम और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। गर्मी, बीमारी या कमजोरी में दोपहर के समय सीमित झपकी फायदेमंद हो सकती है, जबकि हेल्दी व्यक्तियों को कफ दोष बढ़ने से बचने के लिए इससे बचना चाहिए। 

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग दोपहर में थोड़ी देर की झपकी लेना पसंद करते हैं। दोपहर की थोड़ी देर की नींद कुछ लोगों को इतनी पसंद होती है कि मौका मिलते ही वह झपकी ले लेते हैं। कई लोगों का मानना है कि दोपहर में थोड़ी देर की नैप सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। आयुर्वेद में भी दोपहर में सोने को लेकर अलग राय देखने को मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना हर किसी के लिए सही नहीं होता है। यह व्यक्ति की प्रकृति, मौसम, स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए, आइए हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं कि आयुर्वेक के अनुसार दिन में सोना किसके लिए सही और किसे लिए नुकसानदायक है?

किन लोगों के लिए दिन में सोना लाभदायक है?

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार कुछ परिस्थितियों में दिन के समय आराम करना या थोड़ी देर सोना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। गर्मी के मौसम में शरीर में ड्राईनेस और थकान बढ़ सकती है। ऐसे में सीमित समय की झपकी शरीर को एनर्जी देने और संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, जो लोग ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करते हैं, नियमित रूप से सख्त एक्सरसाइज करते हैं या ट्रैवल के कारण थक जाते हैं, उनके लिए दिन में थोड़ी देर आराम करना फायदेमंद हो सकता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, बीमारी से उबर रहे लोग और ज्यादा कमजोरी महसूस करने वाले लोग भी जरूरत पड़ने पर दोपहर में सोना सही माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति की रात की नींद पूरी नहीं हुई हो तो भी सीमित समय के लिए दोपहर में झपकी लेना शरीर को आराम दिला सकता है।

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किन लोगों को दिन में सोने से बचना चाहिए?

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा का कहना है कि आयुर्वेद के अनुसार हेल्दी व्यक्ति को नॉर्मल स्थिति में दिन में सोने से बचना चाहिए, खासकर सर्दियों और वसंत के मौसम में। इस समय शरीर में कफ दोष बढ़ा रहता है। दिन में सोने से कफ और ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे आलस, भारीपन, सुस्ती और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों की कफ प्रकृति होती है या जिन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम, वजन बढ़ना, सुस्ती या धीमा पाचन जैसी समस्याएं रहती हैं, उन्हें भी दिन में सोने से बचने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार दोपहर में भोजन करने के तुरंत बाद भी सोना सही नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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अगर दोपहर में सोना है तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा ने बताया कि अगर दिन में आराम करना जरूरी हो तो झपकी बहुत लंबी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, भोजन के तुरंत बाद सोने के स्थान पर कुछ समय का अंतर रखना बेहतर माना जाता है। अगर सिर्फ थकान महसूस हो रही है तो पूरी नींद लेने के बजाय कुछ देर योग निद्रा, मेडिटेशन या पैरों को दीवार पर टिकाकर आराम करने जैसे उपाय भी फायदेमंद हो सकते हैं। दोपहर में हल्की वॉक करने से भी शरीर में ताजगी महसूस हो सकती है।

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निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना न तो पूरी तरह अच्छा है और न ही पूरी तरह बुरा माना जाता है। इसका फायदा या नुकसान व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति, मौसम, उम्र और हेल्थ पर निर्भर करता है। अगर आप हेल्दी हैं और आपकी रात की नींद पूरी होती है तो नियमित रूप से दिन में सोने से बचना बेहतर माना जाता है। वहीं, गर्मी के मौसम, बीमारी, कमजोरी या ज्यादा थकान की स्थिति में सीमित समय तक आराम करना फायदेमंद हो सकता है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • दोपहर को कितने घंटे सोना चाहिए?

    दोपहर में 10 से 20 मिनट की छोटी झपकी लेना सबसे अच्छा माना जाता है। यह समय दिमाग को आराम देने और एनर्जी वापस पाने के लिए काफी है, जिससे आप तरोताजा महसूस करते हैं।
  • दोपहर में ज्यादा देर सोने के क्या नुकसान हैं?

    दोपहर में ज्यादा देर सोने से रात की नींद खराब होती है, जागने पर सुस्ती या चिड़चिड़ापन महसूस होता है और लंबे समय तक मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

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Disclaimer

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jun 29, 2026 21:38 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Jun 29, 2026 21:38 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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