Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

आयुर्वेदिक घड़ी देखकर बनाएंगे द‍िनचर्या, तो रहेंगे फोकस्ड और बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी, जानें कैसे

आयुर्वेदिक घड़ी के अनुसार दिनचर्या अपनाने से फोकस, एनर्जी और प्रोडक्टिविटी बढ़ सकती है। जानें कफ, पित्त और वात के समय में कौन-से काम करना शरीर और दिमाग के लिए सबसे फायदेमंद माने जाते हैं?

शरीर की एनर्जी पूरे दिन एक जैसी नहीं रहती। कुछ समय शरीर ज्यादा एक्टिव रहता है, तो कुछ समय आराम और क्रिएटिविटी के लिए बेहतर माना जाता है। अगर व्यक्ति अपने काम, खानपान और आराम को इस आयुर्वेदिक घड़ी के हिसाब से प्लान करे, तो वह ज्यादा फोकस्ड और एनर्जेटिक महसूस कर सकता है। यही कारण है कि आजकल कई लोग आयुर्वेदिक रूटीन को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार सही समय पर सही काम करने से शरीर पर कम दबाव पड़ता है और मानसिक संतुलन भी बेहतर बना रहता है। इससे न सिर्फ प्रोडक्टिविटी बढ़ सकती है, बल्कि नींद, पाचन और मूड पर भी अच्‍छा असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं आयुर्वेदिक क्लॉक के अनुसार दिनचर्या कैसे प्लान की जा सकती है? आयुर्वेदिक घड़ी के बारे में जानने के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

ayurvedic-clock

सुबह छह से दस बजे तक- कफ का समय

  • यह समय एक्‍सरसाइज, सेल्‍फ-केयर, घर के काम करने के ल‍िए देना चाह‍िए।
  • इस दौरान नाश्‍ता भी करना होता है।

यह भी पढ़ें- रोज सुबह खाली पेट 1 चम्मच घी खाने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं? आयुर्वेदाचार्य से जानें

सुबह दस से दोपहर दो बजे तक- प‍ित्त का समय

  • इस दौरान सन एनर्जी ज्‍यादा होती है।
  • इस दौरान ज्‍यादा फोकस वाले काम कर सकते हैं जैसे ऑफ‍िस का काम या अन्‍य जरूरी काम।
  • इस दौरान द‍िन का सबसे हैवी मील लें।

यह भी पढ़ें- गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं ये 5 मसाले, जानें कैसे करें इस्तेमाल

दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक- वात का समय

  • यह क्र‍िएट‍िव समय होता है।
  • इस दौरान ल‍िखना, ब्रेन एक्‍ट‍िवि‍टी या कोई नई चीज सीखने वाली एक्‍ट‍िव‍िटीज करनी चाह‍िए।
  • इस दौरान 15 से 20 म‍िनट पावर नैप भी ले सकते हैं।

यह भी पढ़ें- शरीर में किस दोष के कारण डायबिटीज होता है? जानें आयुर्वेदाचार्य से

शाम को छह बजे से रात दस बजे तक- कफ का समय

  • इस दौरान शरीर को र‍िलैक्‍स रखने की जरूरत होती है।
  • इस दौरान मेड‍िटेशन कर सकते हैं।
  • इस दौरान पर‍िवार के साथ समय ब‍िताएं।
  • इस दौरान द‍िन का सबसे लाइट मील लें।

यह भी पढ़ें- तरबूज खाने का सही समय क्या है? आयुर्वेदाचार्य ने बताए गलत समय पर खाने के नुकसान

रात को दस बजे से रात दो बजे तक- आराम का समय

  • यह सोने का सबसे अच्‍छा समय होता है।
  • इस दौरान शरीर को ड‍िटॉक्‍स करना चाह‍िए।
  • इस दौरान जगने से बचना चाह‍िए।

यह भी पढ़ें- यूरिक एसिड में नीम के पत्ते कितने फायदेमंद हैं? एक्सपर्ट से जानें सेवन का सही तरीका

रात दाे बजे से सुबह छह बजे तक- अध्यात्म का समय

  • रात दाे बजे से सुबह छह बजे तक अध्‍यात्‍म और मानस‍िक शांति‍ का समय होता है। इस दौरान अध्‍यात्‍म‍िक कार्य कर सकते हैं।
  • इस दौरान मेड‍िटेशन और प्राणायाम करना चाह‍िए।

न‍िष्‍कर्ष:

आयुर्वेदिक घड़ी के अनुसार दिनचर्या अपनाने से शरीर और दिमाग दोनों बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। सही समय पर काम, भोजन, आराम और नींद लेने से फोकस और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Read Next

खाना खाने के बाद पेट में होने लगती है जलन? आयुर्वेद के ये उपाय दिलाएंगे जल्‍द राहत

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    May 21, 2026 19:56 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 21, 2026 19:56 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content