आयुर्वेद के अनुसार डायबिटीज (Madhumeha or Diabetes Mellitus) 20 प्रकार के प्रमेह के अंतर्गत आता है जिनमें सात प्रकार के कफ प्रमेह, दस प्रकार के पित्त प्रमेह और तीन प्रकार के वात प्रमेह शामिल हैं। इसमें से वात दोष को डायबिटीज या मधुमेह के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया है। डायबिटीज की स्थिति में प्रमेह शुरू में कफ प्रधान होता है यानी शुरू में कफ दोष होता है, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी पुरानी और गंभीर होने लगती है, समय के साथ वात दोष अधिक गंभीर हो जाता है। डायबिटीज के लिए वात दोष क्यों जिम्मेदार है और इससे कैसे निपटें यह जानने के लिए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।
वात दोष डायबिटीज के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है
Dr. Shrey Sharma ने बताया कि डायबिटीज में पित्त दोष और कफ दोष का इलाज मुमकिन है, लेकिन वात दोष का इलाज नहीं हो सकता है इसलिए मुख्य रूप से वही डायबिटीज के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 2023 में Journal Of Indian System Of Medicine नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में वात दोष को डायबिटीज के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
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त्रिदोष भी बन सकता है डायबिटीज का कारण
डायबिटीज में अगर वात दोष का इलाज किया जाए, तो कफ दोष बढ़ जाता है। अगर कफ दोष का इलाज किया जाए, तो वात बढ़ जाता है। एक तरह से कहा जा सकता है कि डायबिटीज के पीछे त्रिदोष भी एक कारण हो सकता है। त्रिदोष के कारण शरीर में कमजोरी आ जाती है और शरीर उम्र के साथ ढलने लगता है।
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आयुर्वेदाचार्य ने बताए डायबिटीज में दोष को संतुलित करने के उपाय
Dr. Shrey Sharma ने बताया कि वात दोष या त्रिदोष के संतुलन के लिए कुछ आयुर्वेदिक हर्ब्स का इस्तेमाल किया जाता है। इन हर्ब्स का काम शुगर लेवल को कंट्रोल करना नहीं है बल्कि व्यक्ति को डायबिटीज में डिजनरेशन (Degeneration) से बचाना है। डायबिटीज के कारण आंखों, किडनी और हार्ट पर बुरा असर पड़ता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल असंतुलित हो जाता है और ब्लड सप्लाई बिगड़ सकती है इसलिए आयुर्वेदिक हर्ब्स का इस्तेमाल किया जाता है जैसे-
1. स्वर्ण भस्म (Swarna Bhasma) का इस्तेमाल आयुर्वेद में शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। इसकी मदद से अग्नि को मजबूत करने में भी मदद मिलती है।
2. शिलाजीत (Shilajit) शुगर लेवल को कंट्रोल करता है और मेटाबॉलिज्म को एक्टिव बनाता है।
3. हरिद्रा (Haldi) में करक्यूमिन होता है जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में मदद करता है।
4. मेहरी (Mehari) नामक जड़ी-बूटी कार्ब्स के अब्जॉर्ब होने की प्रक्रिया को कंंट्रोल करती है जिससे शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता।
5. गिलोय (Giloy) इम्यूनिटी बढ़ाकर शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। गिलोय के रस का सेवन किया जाता है।
6. विजयसार (Vijaysar) ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल पाउडर या काढ़े के फॉर्म में किया जाता है।
7. बेल पत्र (Aegle Marmelos) का इस्तेमाल डायबिटीज में किया जाता है। यह पैंक्रियाज की कार्यप्रणाली को सपोर्ट करके डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
निष्कर्ष:
आयुर्वेद में वात दोष को डायबिटीज के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया गया है। इसके अलावा त्रिदोष के कारण भी शुगर लेवल को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याओं को मैनेज करने के लिए स्वर्ण भस्म, शिलाजीत, हरिद्रा, मेहरी, गिलोय, विजयसार, बेल पत्र का इस्तेमाल किया जाता है।
FAQ
वात दोष क्या होता है?
वात दोष शरीर में मूवमेंट को कंट्रोल करता है। यह सांस, नर्वस सिस्टम और ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है।क्या आयुर्वेदिक उपायों से डायबिटीज ठीक हो सकती है?
आयुर्वेदिक उपायोंं से डायबिटीज के लक्षण कंंट्रोल हो सकते हैं और अन्य बीमारियों के खतरे को रोका जा सकता है, लेकिन पूरी तरह से बीमारी को ठीक करना संभव नहीं है।
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Apr 29, 2026 12:45 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 29, 2026 12:45 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma