आयुर्वेद में एक्ने को युवान पीडिका कहा जाता है। युवान का मतलब युवावस्था में होने वाली समस्या और पीडिका का अर्थ त्वचा पर निकलने वाले दाने या सूजन से है। आयुर्वेद के अनुसार यह समस्या मुख्य रूप से पित्त और कफ दोष के असंतुलन से जुड़ी मानी जाती है। जब शरीर में पित्त बढ़ता है, तो त्वचा में सूजन, रेडनेस और एक्ने की समस्या बढ़ सकती है। वहीं कफ असंतुलन ऑयली स्किन और बंद पोर्स की वजह बन सकता है। आयुर्वेद में कुछ ऐसे हर्ब्स हैं जिनकी मदद से एक्ने की समस्या को दूर क सकते हैं। PMOS में एक्ने की समस्या दूर करने वाली पांच जड़ी-बूटियों के बारे में जानने के लिए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।
1. अश्वगंधा
अश्वगंधा को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना जाता है। यह शरीर में स्ट्रेस और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। स्ट्रेस बढ़ने से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ सकता है, जिससे PMOS और एक्ने की समस्या ज्यादा हो सकती है। अश्वगंधा शरीर को रिलैक्स करने और ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है।
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2. आंवला
आंवला विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह पित्त शांत करने में मदद कर सकता है। आंवला शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन बेहतर बनाने और स्किन हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद करता है। नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन त्वचा को अंदर से हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है।
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3. त्रिफला

त्रिफला तीन फलों आंवला, हरड़ और बहेड़ा से मिलकर बना आयुर्वेदिक मिश्रण है। इसे शरीर को डिटॉक्स करने और पाचन सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद मानता है कि खराब पाचन और शरीर में जमा टॉक्सिन्स स्किन समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। साल 2017 में Journal Of Alternative And Complementary Medicine नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, त्रिफला में एंटीबैक्टीरियल गुण भी बताए गए हैं, जो त्वचा में बैक्टीरिया से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो त्वचा की सूजन कम करने में मदद करते हैं।
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4. चंदन
चंदन को ठंडी तासीर वाला माना जाता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल पित्त शांत करने और त्वचा को ठंडक देने के लिए किया जाता है। चंदन त्वचा की रेडनेस और जलन को कम करने में मदद कर सकता है। कई लोग इसका इस्तेमाल फेस पैक के रूप में भी करते हैं।
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5. सारिवा या अनंतमूल
सारिवा या अनंतमूल को ब्लड प्यूरिफिकेशन यानी रक्त शुद्धि के लिए फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह त्वचा को अंदर से साफ रखने और पित्त दोष को संतुलित करने में मदद कर सकता है। स्किन पर बार-बार होने वाली सूजन और गर्मी को शांत करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
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पित्त शमन क्यों है जरूरी?
आयुर्वेद के अनुसार PMOS एक्ने में पित्त दोष मुख्य भूमिका निभा सकता है। इसलिए पित्त शमन यानी शरीर की गर्मी और सूजन को कंट्रोल करना जरूरी माना जाता है। इसके लिए मसालेदार, तली-भुनी और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड चीजों से बचने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त पानी पीना, अच्छी नींद लेना और तनाव कम करना भी जरूरी माना जाता है।
निष्कर्ष:
PMOS एक्ने सिर्फ बाहरी समस्या नहीं, बल्कि शरीर के अंदर के हार्मोनल और मेटाबॉलिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। आयुर्वेद में अश्वगंधा, आंवला, त्रिफला, चंदन और सारिवा जैसी जड़ी-बूटियों को पित्त शांत करने और स्किन हेल्थ सपोर्ट करने के लिए असरदार माना गया है।
FAQ
PMOS एक्ने के कारण क्या हैं?
हार्मोनल बदलाव, बढ़ा हुआ ऑयल प्रोडक्शन, खराब मेटाबॉलिज्म और तनाव जैसी वजहों से चेहरे पर बार-बार पिंपल्स निकल सकते हैं।PMOS एक्ने से कैसे बचें?
हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस घटाएं। साथ ही ज्यादा चीनी, जंक फूड और ऑयली चीजों से दूरी बनाएं।
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May 28, 2026 19:10 IST
Modified By : Yashaswi Mathur May 28, 2026 19:10 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma