Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

शरीर को डिटॉक्स करने में कैसे मदद करती हैं नीम की पत्तियां? एक्‍सपर्ट से जानें

शरीर को ड‍िटॉक्‍स करने का मतलब है अंदर मौजूद गंदगी और अशुद्ध‍ियों को साफ करना। ड‍िटाॅक्‍स प्रक्र‍िया में नीम का इस्‍तेमाल फायदेमंद माना जाता है। जानें, आयुर्वेद के मुताब‍िक यह ड‍िटॉक्‍स में कैसे मदद करता है?

शरीर को ड‍िटॉक्‍स करने के ल‍िए नीम का इस्‍तेमाल फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद के मुताब‍िक, नीम रक्‍तशोधक होती है यानी इसके इस्‍तेमाल से खून को साफ करने में मदद मि‍लती है। शरीर में बढ़े हुए पित्त और कफ को संतुल‍ित करने में भी नीम फायदेमंद होता है। इसल‍िए गर्मि‍यों में इसका इस्‍तेमाल त्‍वचा संबंध‍ित समस्‍याओं में क‍िया जाता है। शरीर को ड‍िटॉक्‍स करने में नीम के फायदे जानने के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

शरीर को ड‍िटॉक्‍स करने में नीम क्‍योंं हैं फायदेमंद?

how-to-use-neem-for-body-detox

त्‍वचा संंबंध‍ित समस्‍याएं दूर होती हैं

शरीर में ज्‍यादा गर्मी है या त्‍वचा में खुजली है, तो नीम का इस्‍तेमाल करने की सलाह दी जाती है। एक्‍ज‍िमा जैसी गंभीर समस्‍या में भी नीम का इस्‍तेमाल फायदेमंंद माना जाता है। हालांक‍ि, एक्‍जि‍मा में डॉक्‍टर की सलाह के बगैर क‍िसी चीज को अप्‍लाई करने से बचना चाह‍िए।

खून साफ होता है

आयुर्वेद के मुताब‍िक, नीम खून में मौजूद अशुद्ध‍ियों को साफ करने में मदद करता है। इससे फोड़े-फुंसियां, मुंहासे, रैशेज और खुजली जैसी समस्‍याओंं से बचाव होता है।

कफ दोष संतुल‍न

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में कफ दोष बढ़ने के कारण शरीर में भारीपन और त्‍वचा से जुड़ी समस्‍याओं का खतरा बढ़ जाता है। नीम की मदद से कफ दोष को संतुल‍ित करने में मदद म‍िलती है।

पाचन को सपोर्ट म‍िलता है

नीम को जठराग्नि कहा जाता है यानी इसकी मदद से पाचन अग्नि को संतुल‍ित करने में मदद मि‍लती है। साथ ही शरीर में सूजन कम करने में भी सहायक है।

यह भी पढ़ें- क्या गर्मियों में पूरे दिन खीरे-पुदीने वाला डिटॉक्स वॉटर पीना सही है? जानें एक्सपर्ट से

ज्‍वरहर गुणोंं वाला होता है नीम

Dr. Shrey Sharma के मुताब‍िक, आयुर्वेद में नीम को ज्‍वरहर प्रकृत‍ि का माना जाता है। ज्‍वरहर का मतलब होता है शरीर में बढ़ी हुई गर्मी को शांत करने वाला। बुखार जैसी स्‍थ‍ित‍ि में इसका इस्‍तेमाल फायदेमंद होता है। नीम में कड़वाहट होती है, जिसे आयुर्वेद में शरीर की सफाई और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी माना जाता है। शरीर को ड‍ि‍टॉक्‍स करने में दो अंग अहम भूम‍िका न‍िभाते हैं- ल‍िवर और क‍िडनी। साल 2021 में The Scientific World Journal नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, नीम का सेवन करने से ल‍िवर और क‍िडनी फंंक्‍शन को सपोर्ट म‍िलता है ज‍िससे शरीर को ड‍िटॉक्‍स करने में मदद म‍िल सकती है।

यह भी पढ़ें- गर्मियों में ट्रैवेल के बाद शरीर को कैसे करें डिटॉक्स? एक्सपर्ट से जानें 5 आसान टिप्स

लंंबे समय तक नीम के इस्‍तेमाल से बचें

शरीर या त्‍वचा की समस्‍याओंं के ल‍िए सीमि‍त समय तक ही नीम का इस्‍तेमाल करना चाह‍िए। जरूरत से ज्‍यादा नीम का इस्‍तेमाल करेंगे, तो भूख में कमी, शरीर में ड्राईनेस जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। प्रेग्नेंसी में नीम के इस्‍तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है।

न‍िष्‍कर्ष:

आयुर्वेद के मुताब‍िक, नीम में ज्‍वरहर गुण होते हैं और यह रक्‍तशोधक होता है यानी यह खून को साफ करता है, शरीर की गर्मी शांत करता है और बॉडी को ड‍िटॉक्‍स करने में मदद करता है। गर्मि‍यों में त्‍वचा संबंध‍ित समस्‍याओं में नीम का इस्‍तेमाल फायदेमंद होता है।

FAQ

  • नीम का सेवन कैसे करें?

    सुबह चार से पांच नीम की पत्तियां धोकर चबा सकते हैं। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर, ड्र‍िंक की तरह सेवन कर सकते हैं या काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं।
  • नीम में मौजूद गुण कौन-कौन से हैं?

    नीम में एंटीबैक्‍टीर‍ियल, एंटीफंगल, एंटीऑक्‍सीडेंट गुण पाए जाते हैं। नीम कफ और पित्त को संतुल‍ित करने में मदद करता है।

Read Next

खाना खाने के बाद खाएं अजवाइन और काला नमक, गैस और ब्लोटिंग से मिलेगी राहत

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    May 20, 2026 11:44 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 20, 2026 11:44 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 20, 2026 11:44 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content