बच्चों को सोते समय खर्राटे लेते सुनकर कई माता-पिता को लगता है कि यह गहरी नींद आने का संकेत है। कभी-कभी सर्दी-जुकाम, नाक बंद होने या एलर्जी के कारण बच्चे खर्राटे लेते हैं, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो सकते हैं। लेकिन अगर बच्चा नियमित रूप से खर्राटे लेता है, सोते समय उसकी सांस में रुकावट आती है या वह मुंह खोलकर सांस लेता है, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। समय रहते इस समस्या की पहचान करना जरूरी है, क्योंकि इससे बच्चे के व्यवहार, पढ़ाई, विकास और दिनचर्या पर बुरा असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं बच्चे के खर्राटे लेने पर डॉक्टर को दिखाना कब हो जाता है जरूरी? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Yatish Singh, Consultant- Pediatrician And Neonatologist At Cloudnine Group Of Hospitals, Ghaziabad से बात की।
बच्चों में खर्राटे लेने के सामान्य और गंभीर कारण
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सामान्य स्थिति:
- बच्चों का कभी-कभी हल्के खर्राटे लेना आमतौर पर सामान्य होता है। जैसे-
- गहरी नींद आने पर ऐसा हो सकता है।
- सर्दी-जुकाम के दौरान नाक बंद होने के कारण।
गंभीर स्थिति:
मोटापा
कुछ बच्चे जो मोटापे का शिकार होते हैं, उनमें गले के आस-पास अतिरिक्त टिशूज जमा हो सकते हैं। इससे नींद के दौरान वायुमार्ग संकरा होने और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ सकता है।
टॉन्सिल का बढ़ना
बच्चों में लगातार खर्राटे आने का एक आम कारण टॉन्सिल का बढ़ जाना है। टॉन्सिल गले के दोनों तरफ मौजूद टिशूज होते हैं। इनका आकार बढ़ने पर वायुमार्ग संकरा हो सकता है, जिससे सोते समय सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
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डॉक्टर के पास जाना कब जरूरी है?
- अगर बच्चा हफ्ते भर से ज्यादा रातों में तेज और नियमित रूप से खर्राटे लेता है, तो इसे सामान्य नहीं मानना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच करवाएं।
- बच्चा तेज आवाज में और अक्सर खर्राटे लेता हो।
- सोते समय सांस लेने में रुकावट आए, बच्चा हांफे या उसका दम घुटता हुआ लगे।
- रात में बच्चा बेचैन रहे और बार-बार उठे।
- दिन में बहुत नींद आए, चिड़चिड़ापन रहे या ध्यान लगाने में परेशानी हो।
- बच्चे की लंबाई, वजन या विकास को लेकर चिंता हो।
खर्राटों का कारण ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया तो नहीं?
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) नींद से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें सोते समय सांस लेने का रास्ता बार-बार बंद या संकरा हो जाता है जिसके कारण बच्चा खर्राटे ले सकता है। इससे सांस रुक सकती है, ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल कम हो सकता है और बच्चे की नींद बार-बार टूट सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
American Academy Of Pediatrics के मुताबिक, स्लीप एपनिया की स्थिति में नींद के दौरान गले के पीछे मौजूद टिशूज शिथिल होकर हवा के फेफड़ों तक पहुंचने का रास्ता बंद कर देते हैं। स्लीप एपनिया की समय पर पहचान और इलाज कराना जरूरी है। इलाज न मिलने पर यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे हार्ट डिजीज, व्यवहार में बदलाव, सीखने में परेशानी और बच्चे के विकास से जुड़ी समस्याएं वगैरह।
बच्चों में खर्राटों की जांच
बच्चों में खर्राटों का कारण पता लगाने के लिए डॉक्टर ये तरीके अपना सकते हैं-
- सांस, ऑक्सीजन लेवल की जांच स्लीप स्टडी से की जाती है।
- नाक, कान, गले से संबंधित समस्या होने पर ईएनटी विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है।
- मेडिकल हिस्ट्री और टॉन्सिल, नाक, गले और वायु मार्ग की जांच हो सकती है।
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बच्चों में खर्राटों का इलाज कैसे किया जाता है?
- टॉन्सिल बढ़ने पर सांस लेने में रुकावट आ रही है, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
- मोटापे के कारण खर्राटे की समस्या हो रही है, तो बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि और अन्य तरीके से वजन कंट्रोल करने पर ध्यान दिया जाता है।
- स्लीप एपनिया होने पर कुछ बच्चों को सीपीएपी (CPAP) मशीन की जरूरत पड़ सकती है। यह मास्क के जरिए हवा का दबाव देकर सांस लेने का रास्ता खुला रखने में मदद करती है।
- सर्दी-जुकाम के कारण खर्राटे की समस्या है, तो डॉक्टर नेजल स्प्रे, कमरे में ह्यूमिडिफायर लगवाने की सलाह और एलर्जी की दवा दे सकते हैं।
बच्चों को खर्राटों से बचाने के लिए क्या करें?
- घर में धूम्रपान से बचें, क्योंकि तंबाकू के धुएं से सांस की नलियों में जलन हो सकती है।
- बच्चे को पर्याप्त नींद लेने दें और एलर्जी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे को खर्राटे रोकने वाली दवाएं, नींद की दवाएं या नाक खोलने वाले स्प्रे न दें।
- बच्चे के मुंह पर टेप लगाकर सोने जैसे घरेलू उपाय भी न अपनाएं, क्योंकि सांस लेने में रुकावट आ सकती है और यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।
निष्कर्ष:
बच्चों में कभी-कभार हल्के खर्राटे आना सर्दी-जुकाम या नाक बंद होने के कारण सामान्य हो सकता है। तेज और नियमित खर्राटे मोटापे या बढ़े हुए टॉन्सिल के कारण वायुमार्ग संकरा होने का संकेत हो सकते हैं। खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकना, हांफना, बेचैनी या दिन में चिड़चिड़ापन होना ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लक्षण हो सकते हैं।डॉक्टर बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री, नाक-गले की जांच और जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी से खर्राटों का कारण पता लगा सकते हैं। इलाज कारण के अनुसार किया जाता है। इसमें दवाएं, टॉन्सिल होने पर सर्जरी, वेट मैनेजमेंट या जरूरत पड़ने पर CPAP थेरेपी शामिल हो सकती है। बच्चों को तंबाकू के धुएं से दूर रखें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं या घरेलू उपाय न अपनाएं।
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FAQ
बच्चों को खर्राटे किस उम्र में आते हैं?
खर्राटे किसी भी उम्र में आ सकते हैं। टॉन्सिल बढ़ने के कारण छोटे बच्चों में भी यह समस्या हो सकती है। 2 से 8 वर्ष की उम्र में स्लीप एपनिया भी देखा जाता है।रोज रात को खर्राटे लेना किसी बीमारी का संकेत है?
जरूरी नहीं कि हर बच्चे को कोई बीमारी हो, लेकिन हफ्ते में कई रातों तक खर्राटे आना, खासकर सांस रुकने या नींद खराब होने के साथ, ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया या मोटापे का संकेत हो सकता है।
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Oct 30, 2026 11:53 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr. Yatish Singh
