Why Do Obese People Snore More Often?: मोटे लोगों में खर्राटे की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। मोटे लोगों में अगर पेट के आस-पास फैट ज्यादा है, तो छाती की वॉल पर प्रेशर पड़ सकता है और फेफड़ों की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे सोते समय एयर पैसेज ब्लॉक होने का खतरा रहता है जिससे खर्राटे की समस्या होती है। मोटे लोगों के गले के आस-पास भी फैट जमा हो सकता है जिससे सांस की ऊपरी नली संकरी हो सकती है और सांस लेने में परेशानी के कारण खर्राटे की समस्या होती है। जब हवा संकरे वायुमार्ग से गुजरती है, तो तेज आवाज पैदा होती है, जिसके कारण खर्राटे की आवाज आती है। खर्राटे के कारण सांस बार-बार रुकती है जिससे नींद बार-बार टूटती है और सुबह उठने पर थकान और दिन में अधिक नींद आने की समस्या हो सकती है। आइए जानते हैं खर्राटे के नुकसान और इसे दूर करने के उपाय। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।
Mayo Clinic के मुताबिक, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में खर्राटे लेने या स्लीप एपनिया होने की आशंका ज्यादा होती है। सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में अधिक वजन या मोटापे से पीड़ित लोगों में खर्राटे लेने या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया होने की आशंका ज्यादा देखी जाती है।
| खर्राटे की समस्या को कम करने के उपाय | |
| 1. वजन कम करें (हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं) | 2. CPAP मशीन की मदद लें |
| 3. करवट लेकर सोएं, पीठ के बल सोने से बचें | 4. नींद पूरी करें, अधिक थकान से बचें |
| 5. डॉक्टर की सलाह पर स्लीप स्टडी जांच कराएं |
गर्दन के आस-पास जमे फैट के कारण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का खतरा
मोटे लोगों में खर्राटे की समस्या ज्यादा देखी जाती है। खासकर जिन लोगों के गर्दन के आस-पास ज्यादा फैट जमा होता है उनमें ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का खतरा भी हो सकता है जो एक नींद से जुड़ी समस्या है जिसमें गले के भीतर मौजूद वायुमार्ग बार-बार संकरा या ब्लॉक होने से सांस रुकने और दोबारा शुरू होने लगती है।
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नींद में बाधा डालने तक सीमित नहीं होती खर्राटे की समस्या
अगर आप यह सोच रहे हैं कि खर्राटे लेने से आपकी या दूसरों की नींद प्रभावित होती है और इससे ज्यादा खर्राटे लेने का कोई नुकसान नहीं है, तो ऐसा नहीं है। जिन लोगों को खर्राटे की समस्या के साथ ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया होता है उन्हें दिन के समय अधिक नींद आती है। इसके साथ ही कुछ अन्य नुकसान भी हो सकते हैं जैसे-
- ध्यान न लगा पाना।
- बार-बार गुस्सा आना।
- स्वभाव में चिड़चिड़ापन।
- हाई बीपी।
- हार्ट की समस्याएं।
- स्ट्रोक का खतरा।
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मोटे लोगों में खर्राटे कम करने के उपाय
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1. वजन घटाएं
गर्दन, गले, पेट और शरीर के अन्य हिस्से में जमा फैट से वायु मार्ग, फेफड़ों पर दबाव पड़ता है जिससे सांस रुकती है और खर्राटों की समस्या होती है। इससे बचने के लिए हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और सेहतमंद लाइफस्टाइल अपनाएं ताकि वजन कम करने में मदद मिल सके।
2. CPAP मशीन का इस्तेमाल करें
अगर खर्राटों का कारण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया है, तो डॉक्टर CPAP मशीन की सलाह दे सकते हैं। यह मास्क के जरिए हवा का दबाव देकर सांस की नली खुली रखती है और सोते समय सांस रुकने की समस्या कम करती है।
3. करवट लेकर सोएं
पीठ के बल सोने से जीभ और गले के कोमल टिशूल पीछे की ओर खिसककर सांस की नली को संकरा कर सकते हैं। करवट लेकर सोने से कुछ लोगों में खर्राटे कम हो सकते हैं।
4. नींद पूरी करें
नींद की कमी से शरीर ज्यादा थका हुआ रहता है। नियमित नींद लेने से खर्राटों को बढ़ाने वाले कुछ कारकों को कम किया जा सकता है।
5. स्लीप स्टडी कराएं
तेज खर्राटों के साथ सांस रुकना, हांफना या दिन में ज्यादा नींद आना स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर स्लीप स्टडी अपनाने की सलाह दे सकते हैं। स्लीप स्टडी एक जांच है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस, ऑक्सीजन लेवल, हार्ट रेट और नींद के पैटर्न को रिकॉर्ड किया जाता है।
निष्कर्ष:
मोटे लोगों में खर्राटे की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। पेट के आस-पास जमा चर्बी के कारण छाती की वॉल पर प्रेशर पड़ सकता है और फेफड़ों की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे एयर पैसेज ब्लॉक होता है और खर्राटे की समस्या हो सकती है। इसी तरह गले के आस-पास चर्बी जमा होने से एयर पैसेज संकरा हो जाता है और सांस लेने में कठिनाई के कारण व्यक्ति खर्राटे लेने लगता है। जिन लोगों की गर्दन के आस-पास ज्यादा फैट जमा होता है उनमें ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का खतरा भी हो सकता है। खर्राटे लेने के कारण नींद प्रभावित होती है, ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है, बार-बार गुस्सा, चिड़चिड़ापन हो सकता है। ऐसे लोगों में हाई बीपी, हार्ट की समस्या और स्ट्रोक का खतरा भी अधिक रहता है। खर्राटे कम करने का सबसे आसान तरीका है वजन कम करें, नींद पूरी करें, हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल पर फोकस करें और एक्सरसाइज करें। पीठ के बल सोने के बजाय करवट लेकर सोएं। डॉक्टर की सलाह पर CPAP मशीन का इस्तेमाल करें और स्लीप स्टडी जैसी जांच कराएं।
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FAQ
क्या नाक बंद होने से भी खर्राटे आते हैं?
हां, सर्दी-जुकाम या एलर्जी होने पर जब नाक बंद हो जाती है, तो हवा का रास्ता संकरा हो सकता है और खर्राटे आ सकते हैं। सलाइन नेजल स्प्रे और दवाओं से ब्लॉक हुई नाक को खोलने में मदद मिलती है।क्या खर्राटों के लिए हर मरीज को स्लीप स्टडी करवाना जरूरी है?
नहीं, हर व्यक्ति को स्लीप स्टडी की जरूरत नहीं होती, लेकिन तेज और बार-बार खर्राटों की समस्या होती है और उसके साथ सांस रुकना, हांफना, दिन में बहुत नींद आने जैसे लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर स्लीप स्टडी की सलाह देते हैं। ये स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं।
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Oct 28, 2026 13:26 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry
