जो लोग रात में बहुत तेज और लगातार खर्राटे लेते हैं और सोते समय उनकी सांस बार-बार रुकती है, तो इसे सामान्य समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। अगर लगातार यह समस्या हो रही है, तो इसका असर हार्ट पर भी पड़ सकता है। इस बारे में Dr. Ujjawal Kumar, Senior Consultant - Cardiology, Sarvodaya Hospital, Faridabad ने बताया कि रात में सोते समय सांस रुकने के कारण नींद का बार-बार खुलना ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea-OSA) का संकेत हो सकता है। यह न सिर्फ नींद को प्रभावित करती है, बल्कि हार्ट हेल्थ से जुड़ी समस्याएं होने के रिस्क को बढ़ा सकती है। इसलिए खर्राटे लेने वाले लोगों को डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
नींद में सांस रुकने से हार्ट पर क्या असर पड़ता है?
Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं, “जिन लोगों को स्लीप एपनिया की समस्या होती है, उनकी नींद के दौरान सांस लेने के रास्ते में बार-बार रुकावट आ सकती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बार-बार नीचे जा सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में हार्ट को पूरे शरीर में पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। अगर समय पर स्लीप एपनिया का इलाज न किया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की धड़कन में अनियमितता (Arrhythmia), हार्ट अटैक, हार्ट फेल्यिर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।”
क्या कहती हैं रिसर्च?
Neurological Sciences में बताया गया है कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और हार्ट की बीमारियों के रिस्क के बीच कनेक्शन समझने के लिए कई अध्ययन किए गए हैं। हालांंकि, सभी के रिजल्ट एक जैसे नहीं थे, लेकिन 24 अध्ययनों के विश्लेषण में से 12 स्टडी में हार्ट की बीमारी के परिणाम दिए हैं, तो 11 अध्ययनों ने स्ट्रोक के परिणाम दिए हैं। वहीं, 8 अध्ययनों ने कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) के परिणामों की रिपोर्ट दी।
connection between Snoring due to sleep apnea
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खर्राटे आने पर किन लक्षणों पर रखें नजर?
Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं, “आमतौर पर व्यक्ति को सोते हुए पता ही नहीं चलता कि वह रात में खर्राटे मारता है और उसकी सांस रुक रही है। ऐसे में परिवार के सदस्य को नोट करना चाहिए और सोते हुए व्यक्ति की बार-बार सांस रुक रही है, तो उसे इन लक्षणों पर खास ध्यान देना चाहिए।”
- खर्राटे बहुत तेज आते हैं।
- कुछ समय के लिए सांस रुक जाती है।
- अचानक हांफते हुए आपकी नींद खुलती है।
- सुबह उठने पर सिरदर्द होने की शिकायत करना।
- दिनभर नींद आती रहती है।
- बिना ज्यादा काम किए बहुत ज्यादा थकान रहना।
- फोकस करने में परेशानी होना और चिड़चिड़ापन महसूस होना।
स्लीप स्टडी कराने की जरूरत कब पड़ सकती है?
Dr. Ujjawal Kumar ने बताया कि अगर डॉक्टर को लगता है कि मरीज को स्लीप एपनिया की समस्या है, तो स्लीप स्टडी या पॉलीसोमनोग्राफी की सलाह दी जा सकती है। इस जांच में मरीज की नींद के दौरान सांस लेने के पैटर्न और इससे जुड़ी कई बातों का विश्लेषण किया जाता है। इस जांच के बाद ही डॉक्टर तय करते हैं कि समस्या कितनी गंभीर है और किस तरह के इलाज की जरूरत है। अगर व्यक्ति के सिर्फ खर्राटों की आवाज ही आती है, लेकिन सांस रुकने या हांफने की समस्या नहीं होता, तो कई बार यह थकान की वजह से भी हो सकता है।
स्लीप एपनिया और हार्ट की बीमारियों के रिस्क को कैसे मैनेज करें?
Dr. Ujjawal Kumar ने सलाह दी है कि स्लीप एपनिया और हार्ट की बीमारियों के रिस्क को कम करने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करना जरूरी है।
- लोगों को अपना वजन कंट्रोल करना चाहिए।
- रोजाना फिजिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिए।
- स्मोकिंग और शराब से परहेज करना चाहिए।
- सोने से ठीक पहले बहुत भारी खाना खाने से भी बचना चाहिए।
- करवट लेकर सोने की आदत डालने की सलाह दी जा सकती है।
स्लीप एपनिया का इलाज कैसे किया जा सकता है?
Dr. Ujjawal Kumar ने कहा, “आमतौर पर जिन मरीजों को स्लीप एपनिया की समस्या होती है, उन्हें उनकी मेडिकल कंडीशन और उम्र को देखते हुए अलग-अलग इलाज के तरीके बताए जा सकते हैं। इसमें CPAP मशीन, ओरल डिवाइस और दूसरे इलाज के तरीके शामिल हो सकते हैं। कई लोग दूसरे के CPAP डिवाइस का असर देखकर खुद भी बिना डॉक्टर की सलाह लिए उसका इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। ऐसा करने से कई बार शरीर को गंभीर नुकसान भी हो सकता है। इसलिए किसी भी इलाज को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।”
निष्कर्ष
अगर कभी-कभार खर्राटे आते हैं, तो यह थकान का भी कारण हो सकता है। इसलिए इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, लेकिन अगर खर्राटों के बीच सांस रुकती है या फिर हांफकर उठता है, सुबह सिरदर्द या दिनभर थकान रहती है, तो जांच की जरूरत हो सकती है। ऐसी कंडीशन में समय पर जांच कराना बहुत जरूरी है।
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FAQ
क्या दुबले-पतले लोगों को भी स्लीप एपनिया हो सकता है?
हालांकि वजन और गले की चर्बी स्लीप एपनिया का मुख्य कारण है, लेकिन गर्दन या जबड़े की बनावट, बढ़े हुए टॉन्सिल्स या नेजल पॉलिप्स की वजह से दुबले-पतले लोगों की सांस लेने की नली ब्लॉक हो सकती है।CPAP मशीन का उपयोग न करने पर स्लीप एपनिया के मरीज में लॉन्ग-टर्म कॉम्प्लिकेशंस क्या हो सकते हैं?
अगर स्लीप एपनिया का इलाज न कराया जाए, तो अचानक दिल का दौरा, टाइप-2 डायबिटीज, डिप्रेशन, याददाश्त में कमी और गाड़ी चलाते समय एक्सीडेंट का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
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Sep 25, 2026 18:13 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Ujjawal Kumar
