सोते समय खर्राटे लेना कई लोगों को आदत होती है। कुछ लोग इसे थकान से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग गहरी नींद से, लेकिन अगर किसी को रोजाना खर्राटे आते हैं और बहुत तेज है या फिर व्यक्ति नींद से एकदम उठकर हांफने लगता है, तो इसकी वजह सिर्फ नींद से जुड़ी होना नहीं होता, बल्कि इसका कारण फेफड़ों से जुड़ा भी हो सकता है। इसलिए हमने Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, ENT Specialist and Sleep Expert, Founder, MedFirst, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि कई बार लगातार तेज खर्राटे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea यानी OSA) का संकेत हो सकते हैं और कई बार इसका कारण नाक बंद होना, एलर्जी, वजन बढ़ना, गले की बनावट या सोने की स्थिति जैसी वजहें भी हो सकती हैं।
तेज खर्राटे का फेफड़ों से कनेक्शन
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “सोते समय गले के आसपास की मांसपेशियां कुछ हद तक ढीली हो जाती हैं। अगर इस दौरान हवा के रास्ते में रुकावट आने लगती है, तो आस-पास के टिश्यू कंपन करने लगते हैं। इसी कंपन से खर्राटों की आवाज आती है। आमतौर पर खर्राटों का कारण नाक और गले से जुड़ा हो सकता है। जब सांस लेने में परेशानी होने लगती है, तो इसका असर फेफड़ों पर भी पड़ सकता है। अगर लगातार खर्राटों की समस्या रहती है, तो इसका असर फेफड़ों पर भी काफी ज्यादा पड़ सकता है।”
Respiratory Research के अनुसार, खर्राटे लेते समय जीभ और तालू के आपस में टकराने से कंपन पैदा होने से 5 माइक्रोन से भी छोटी बूंदे सांस की नली की सामान्य सफाई सिस्टम से बचकर सीधे फेफड़ों के हिस्से में पहुंच जाते हैं। इससे निमोनिया और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
क्या अस्थमा या COPD के रोगियों को परेशानी हो सकती है?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj का कहना है, “जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी (COPD) या फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बीमारी है, उन्हें रात में सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो सकती है। ऐसे लोगों में खर्राटों के साथ खांसी, घरघराहट, सांस फूलना या बार-बार नींद खुलने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए अगर किसी को सांस से जुड़ी परेशानी हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।”
खर्राटों के साथ ये लक्षण न करें नजरअंदाज
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा कि अगर परिवार में किसी व्यक्ति को तेज खर्राटे आते हैं, तो सोते समय और सुबह उठने के बाद इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
1. सोते समय सांस रुकना
व्यक्ति को खुद पता नहीं चलता कि नींद में उसकी सांस रुक रही है। परिवार का कोई सदस्य यह देख सकता है कि खर्राटों के बीच कुछ सेकंड तक सांस नहीं आ रही है और फिर अचानक सांस शुरू हो जाती है। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है।
2. रात में हांफकर या घुटन महसूस करके उठना
अगर सोते समय अचानक सांस लेने में परेशानी होती है और व्यक्ति हांफते हुए उठता है, तो इसे सामान्य खर्राटे समझकर टालना नहीं चाहिए। अगर लगातार ऐसा हो रहा हो, तो इससे फेफड़े प्रभावित हो सकते हैं।
Loud snoring and waking up connected to lungs
यह भी पढ़ें- सोते समय खर्राटे लेता है बच्चा? पहचानें गंभीर स्थिति और जानें कब डॉक्टर को दिखाना है जरूरी
3. दिनभर थकान और नींद आना
रात में पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद अगर दिनभर सुस्ती रहती है, काम में मन नहीं लगता या फोकस बनाए रखने में परेशानी होती है, तो इसकी वजह नींद पूरी न होना हो सकता है।
4. सुबह सिरदर्द होना
कुछ लोगों को सुबह उठने पर सिर भारी लग सकता है या सिरदर्द हो सकता है। अगर यह परेशानी लगातार तेज खर्राटों और दिनभर की थकान के साथ है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
5. रात में बार-बार नींद खुलना
अगर रात में कई बार नींद टूटती है और सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं होती, तो इसके पीछे सांस से जुड़ी समस्या हो सकती है।
खर्राटे कम करने के लिए क्या करें?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj लोगों को सलाह देते हैं कि खर्राटों को कम करने के लिए इन आदतों में बदलाव किया जा सकता है।
- पीठ के बल सोने पर कुछ लोगों में गले का हवा का रास्ता ज्यादा संकरा हो सकता है। ऐसे में करवट लेकर सोना खर्राटों को कम करने में मदद कर सकता है।
- अगर वजन ज्यादा है, तो उसे कंट्रोल करना चाहिए।
- शराब गले की मांसपेशियों को बहुत ढीला कर सकती है, जिससे कुछ लोगों में खर्राटे या सांस की रुकावट बढ़ सकती है। इसलिए सोने से पहले शराब नहीं पीनी चाहिए।
- अगर खर्राटों की वजह नाक बंद होना या एलर्जी है, तो इसका सही इलाज कराना जरूरी है।
यह भी पढ़ें- क्या ऊंचे तकिए पर सोने से खर्राटे आ सकते हैं? डॉक्टर से जानें
निष्कर्ष
यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति को खर्राटे आने का मतलब फेफड़ों से जुड़ा हुआ ही हो, लेकिन लगातार खर्राटे आने से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। अगर तेज खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकती है, व्यक्ति हांफकर उठता है या दिनभर थकान और नींद महसूस करता है, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
All Image Credit: Magnific
FAQ
क्या खर्राटे और स्लीप एप्निया से फेफड़ों की नसों में हाई बीपी हो सकता है?
बार-बार ऑक्सीजन की भारी कमी होने पर फेफड़ों की ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं। लंबे समय तक ऐसा होने से फेफड़ों की धमनियों में स्थायी रूप से हाई बीपी हो जाता है, जिसे पल्मोनरी हाइपरटेंशन कहते हैं।खर्राटों के दौरान सांस रुकने से डायाफ्राम और छाती पर क्या दबाव पड़ता है?
जब गला बंद होता है, तब भी फेफड़े और डायाफ्राम सांस अंदर खींचने की पूरी ताकत लगाते हैं। सांस की नली बंद होने के कारण फेफड़ों में खिंचाव हो सकता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Nov 06, 2026 14:08 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj
