Fri Nov 6, 2026 | 03:20 PM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

रात में तेज खर्राटे लेते हैं और अचानक हांफकर खुलती है नींद? डॉक्टर से जानें इसका फेफड़ों से क्या है कनेक्शन

रात को सोते समय खर्राटे लेते समय अचानक उठना सिर्फ नींद से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि ये फेफड़ों से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। अस्थमा और COPD के मरीजों को खर्राटों पर खास ध्यान देना चाहिए।
रात में तेज खर्राटे लेते हैं और अचानक हांफकर खुलती है नींद? डॉक्टर से जानें इसका फेफड़ों से क्या है कनेक्शनरात में तेज खर्राटे लेते हैं और अचानक हांफकर खुलती है नींद? डॉक्टर से जानें इसका फेफड़ों से क्या है कनेक्शन

सोते समय खर्राटे लेना कई लोगों को आदत होती है। कुछ लोग इसे थकान से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ लोग गहरी नींद से, लेकिन अगर किसी को रोजाना खर्राटे आते हैं और बहुत तेज है या फिर व्यक्ति नींद से एकदम उठकर हांफने लगता है, तो इसकी वजह सिर्फ नींद से जुड़ी होना नहीं होता, बल्कि इसका कारण फेफड़ों से जुड़ा भी हो सकता है। इसलिए हमने Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, ENT Specialist and Sleep Expert, Founder, MedFirst, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि कई बार लगातार तेज खर्राटे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea यानी OSA) का संकेत हो सकते हैं और कई बार इसका कारण नाक बंद होना, एलर्जी, वजन बढ़ना, गले की बनावट या सोने की स्थिति जैसी वजहें भी हो सकती हैं।

तेज खर्राटे का फेफड़ों से कनेक्शन

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “सोते समय गले के आसपास की मांसपेशियां कुछ हद तक ढीली हो जाती हैं। अगर इस दौरान हवा के रास्ते में रुकावट आने लगती है, तो आस-पास के टिश्यू कंपन करने लगते हैं। इसी कंपन से खर्राटों की आवाज आती है। आमतौर पर खर्राटों का कारण नाक और गले से जुड़ा हो सकता है। जब सांस लेने में परेशानी होने लगती है, तो इसका असर फेफड़ों पर भी पड़ सकता है। अगर लगातार खर्राटों की समस्या रहती है, तो इसका असर फेफड़ों पर भी काफी ज्यादा पड़ सकता है।”

Respiratory Research के अनुसार, खर्राटे लेते समय जीभ और तालू के आपस में टकराने से कंपन पैदा होने से 5 माइक्रोन से भी छोटी बूंदे सांस की नली की सामान्य सफाई सिस्टम से बचकर सीधे फेफड़ों के हिस्से में पहुंच जाते हैं। इससे निमोनिया और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

क्या अस्थमा या COPD के रोगियों को परेशानी हो सकती है?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj का कहना है, “जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी (COPD) या फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बीमारी है, उन्हें रात में सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो सकती है। ऐसे लोगों में खर्राटों के साथ खांसी, घरघराहट, सांस फूलना या बार-बार नींद खुलने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए अगर किसी को सांस से जुड़ी परेशानी हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।”

खर्राटों के साथ ये लक्षण न करें नजरअंदाज

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा कि अगर परिवार में किसी व्यक्ति को तेज खर्राटे आते हैं, तो सोते समय और सुबह उठने के बाद इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

1. सोते समय सांस रुकना

व्यक्ति को खुद पता नहीं चलता कि नींद में उसकी सांस रुक रही है। परिवार का कोई सदस्य यह देख सकता है कि खर्राटों के बीच कुछ सेकंड तक सांस नहीं आ रही है और फिर अचानक सांस शुरू हो जाती है। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है।

2. रात में हांफकर या घुटन महसूस करके उठना

अगर सोते समय अचानक सांस लेने में परेशानी होती है और व्यक्ति हांफते हुए उठता है, तो इसे सामान्य खर्राटे समझकर टालना नहीं चाहिए। अगर लगातार ऐसा हो रहा हो, तो इससे फेफड़े प्रभावित हो सकते हैं।

Loud snoring and waking up connected to lungsLoud snoring and waking up connected to lungs

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3. दिनभर थकान और नींद आना

रात में पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद अगर दिनभर सुस्ती रहती है, काम में मन नहीं लगता या फोकस बनाए रखने में परेशानी होती है, तो इसकी वजह नींद पूरी न होना हो सकता है।

4. सुबह सिरदर्द होना

कुछ लोगों को सुबह उठने पर सिर भारी लग सकता है या सिरदर्द हो सकता है। अगर यह परेशानी लगातार तेज खर्राटों और दिनभर की थकान के साथ है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

5. रात में बार-बार नींद खुलना

अगर रात में कई बार नींद टूटती है और सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं होती, तो इसके पीछे सांस से जुड़ी समस्या हो सकती है।

खर्राटे कम करने के लिए क्या करें?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj लोगों को सलाह देते हैं कि खर्राटों को कम करने के लिए इन आदतों में बदलाव किया जा सकता है।

  • पीठ के बल सोने पर कुछ लोगों में गले का हवा का रास्ता ज्यादा संकरा हो सकता है। ऐसे में करवट लेकर सोना खर्राटों को कम करने में मदद कर सकता है।
  • अगर वजन ज्यादा है, तो उसे कंट्रोल करना चाहिए।
  • शराब गले की मांसपेशियों को बहुत ढीला कर सकती है, जिससे कुछ लोगों में खर्राटे या सांस की रुकावट बढ़ सकती है। इसलिए सोने से पहले शराब नहीं पीनी चाहिए।
  • अगर खर्राटों की वजह नाक बंद होना या एलर्जी है, तो इसका सही इलाज कराना जरूरी है।

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निष्कर्ष
यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति को खर्राटे आने का मतलब फेफड़ों से जुड़ा हुआ ही हो, लेकिन लगातार खर्राटे आने से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। अगर तेज खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकती है, व्यक्ति हांफकर उठता है या दिनभर थकान और नींद महसूस करता है, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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FAQ

  • क्या खर्राटे और स्लीप एप्निया से फेफड़ों की नसों में हाई बीपी हो सकता है?

     बार-बार ऑक्सीजन की भारी कमी होने पर फेफड़ों की ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं। लंबे समय तक ऐसा होने से फेफड़ों की धमनियों में स्थायी रूप से हाई बीपी हो जाता है, जिसे पल्मोनरी हाइपरटेंशन कहते हैं। 
  • खर्राटों के दौरान सांस रुकने से डायाफ्राम और छाती पर क्या दबाव पड़ता है?

    जब गला बंद होता है, तब भी फेफड़े और डायाफ्राम सांस अंदर खींचने की पूरी ताकत लगाते हैं। सांस की नली बंद होने के कारण फेफड़ों में खिंचाव हो सकता है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 06, 2026 14:08 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj