गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान वजन बढ़ने, रक्त संचार में परिवर्तन और बढ़ते गर्भाशय के दबाव के कारण पैरों में दर्द और ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई महिलाओं को विशेष रूप से रात में सोते समय पिंडलियों में अचानक तेज खिंचाव महसूस होता है। कभी-कभी दर्द इतना अधिक होता है कि नींद खुल जाती है और कुछ समय तक पैर हिलाना भी मुश्किल लगता है। हालांकि, गर्भावस्था में पैरों में ऐंठन होना एक आम समस्या है, लेकिन इसके बार-बार होने पर कारणों को समझना और सही देखभाल करना जरूरी है।
वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "गर्भावस्था में पैरों की ऐंठन को हमेशा कैल्शियम या अन्य पोषक तत्वों की कमी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। इसके पीछे कई शारीरिक कारण हो सकते हैं। सही दिनचर्या, पर्याप्त पानी और चिकित्सकीय सलाह से इस परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है।"
गर्भावस्था में रात के समय पैरों में ऐंठन के कारण
What Causes Leg Cramps At Night During Pregnancy
साल 2024 में International Journal of Women's Health में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अध्ययन में शामिल महिलाओं में से लगभग 58% गर्भवती महिलाओं ने तीसरी तिमाही के दौरान पैरों में दर्दनाक ऐंठन का अनुभव किया, जिससे यह साबित होता है कि यह गर्भावस्था के अंतिम महीनों में होने वाली एक बेहद आम समस्या है। इसे जीवनशैली में कुछ बदलाव करके ठीक किया जा सकता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
1. बढ़ते गर्भाशय का दबाव
गर्भावस्था आगे बढ़ने के साथ गर्भाशय का आकार बढ़ता है। इससे पैरों से हृदय की ओर रक्त वापस पहुंचाने वाली नसों पर दबाव पड़ सकता है। इसके कारण पैरों में भारीपन, सूजन और असहजता महसूस हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर के वजन में वृद्धि भी पैरों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे ऐंठन की समस्या बढ़ सकती है।
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2. रक्त संचार में बदलाव
गर्भावस्था में शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और हार्मोन संबंधी बदलाव भी होते हैं। बढ़ते गर्भाशय के दबाव के कारण पैरों से रक्त की वापसी प्रभावित हो सकती है। रात के समय आराम करते हुए कुछ महिलाओं को पिंडलियों की मांसपेशियों में अचानक खिंचाव या दर्द महसूस होता है। हालांकि, रात में ऐंठन होने का सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता।
3. मांसपेशियों पर बढ़ता दबाव
गर्भावस्था में बढ़ते वजन के कारण पैरों और पिंडलियों की मांसपेशियों को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक खड़े रहने, अधिक चलने या शारीरिक थकान के कारण भी मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है। दिनभर की थकान के बाद रात में यह परेशानी अधिक महसूस हो सकती है।
4. पानी की कमी
गर्भावस्था में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर कमजोरी, थकान और मांसपेशियों में परेशानी हो सकती है। उल्टी, अधिक पसीना आने या पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं लेने से पानी की कमी का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए।
5. मिनरल्स का असंतुलन
कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे खनिज शरीर की मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाते हैं। इनके स्तर में गड़बड़ी होने पर मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, गर्भावस्था में रात को ऐंठन होने का अर्थ यह नहीं है कि महिला के शरीर में निश्चित रूप से कैल्शियम या मैग्नीशियम की कमी है। बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के इनकी अतिरिक्त गोलियां लेना उचित नहीं है।
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रात में पैरों की ऐंठन से राहत पाने के लिए क्या करें?
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, गर्भावस्था में कुछ आसान आदतें पैरों की ऐंठन को कम करने में मदद कर सकती हैं-
- हल्की मालिश करें: ऐंठन होने पर पिंडली की मांसपेशियों की धीरे-धीरे मालिश करें। इससे आराम मिल सकता है।
- पैरों को धीरे-धीरे खींचें: घुटने को सीधा रखते हुए पंजे को धीरे से अपनी ओर खींचें। इससे पिंडली की मांसपेशियों का खिंचाव कम हो सकता है। झटके से पैर खींचने से बचें।
- पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर नियमित रूप से पानी पिएं। यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित रखने की सलाह दी है, तो उसी का पालन करें।
- हल्की शारीरिक गतिविधि करें: डॉक्टर की अनुमति से नियमित रूप से टहलना और टखनों को धीरे-धीरे घुमाना उपयोगी हो सकता है।
- संतुलित आहार लें: दूध, दही, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और मेवे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ आहार में शामिल करें।
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें: देर तक खड़े रहने या लगातार बैठे रहने से बचें। आराम के समय पैरों को थोड़ा ऊंचा रख सकती हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
यदि पैरों में ऐंठन बार-बार हो रही है, दर्द बहुत तेज है या घरेलू उपायों से आराम नहीं मिल रहा है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। विशेष रूप से यदि एक पैर में अचानक सूजन, लालिमा, गर्माहट या लगातार दर्द हो, तो इसे सामान्य ऐंठन मानकर नजरअंदाज न करें। ये पैरों में खून का थक्का बनने यानी डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) का संकेत हो सकते हैं, जिसका खतरा गर्भावस्था में बढ़ जाता है। यदि इसके साथ सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
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निष्कर्ष
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "गर्भावस्था में शरीर के छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान देना मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। रात में पैरों में ऐंठन होना अक्सर सामान्य शारीरिक बदलावों से जुड़ा हो सकता है, लेकिन हर महिला में इसके कारण अलग हो सकते हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, हल्की गतिविधि और समय पर चिकित्सकीय सलाह को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।"
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FAQ
क्या रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाना पैरों की ऐंठन को कम करता है?
हां, सोने से पहले गर्म या गुनगुने पानी से नहाने पर ब्लड फ्लो बेहतर होता है, तनाव कम होता है और मांसपेशियां तुरंत रिलैक्स हो जाती हैं। इससे पैरों की ऐंठन भी कम हो जाती है।पैरों की ऐंठन से बचने के लिए सोते समय कौन-सी करवट लेटना चाहिए?
बाईं ओर करवट लेकर लेटने से पैरों में ऐंठन का एहसास कम होता है।क्या गर्भावस्था में गलत जूते या सैंडल पहनने से पैरों में खिंचाव बढ़ सकता है?
गर्भावस्था में हाई हील्स नहीं पहनने चाहिए इस तरह सपाट-कठोर सोल वाले जूते भी पिंडली के टेंडन पर अतिरिक्त खिंचाव डालते हैं, जिससे ऐंठन बढ़ सकती है।
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Oct 29, 2026 14:54 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
