दुनियाभर में लगातार फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। MOHFW 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब एक अरब लोग मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज MASLD (NAFLD) से पीड़ित हैं और भारत में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की व्यापकता लगभग 9% से लेकर 32% के बीच है। वहीं, साल 2019 में दुनियाभर में लिवर सिरोसिस (Cirrhosis) के 20.5 लाख नए मामले सामने आए और इससे 14.7 लाख मौतें हुईं। इस स्टडी में बताया गया कि साल 2010 से लेकर 2019 के बीच सिरोसिस की घटना दर प्रति 1,00,000 व्यक्ति पर 25.19 से बढ़कर 25.35 हो गई। मोटापा, डायबिटीज, अल्कोहल का बहुत ज्यादा सेवन, जंक और प्रोसेस्ड फूड खाने के साथ फिजिकल एक्टिविटी न करने से फैटी लिवर होने का रिस्क बढ़ जाता है। इस पेज पर फैटी लिवर से जुड़े हर पहलू की जानकारी मेडिकल रिव्यूड डॉक्टर्स आपको विस्तार से दे रहे हैं।
फैटी लिवर क्या है?
जब लिवर में फैट जमा होने लगता है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। Cleveland Clinic के अनुसार, लिवर पर थोड़ी मात्रा में फैट सामान्य है और यह एनर्जी के रूप में काम करता है, लेकिन अगर फैट 5% से ज्यादा होने लगता है, तो उसे फैटी लिवर की शुरुआत माना जाता है। NCBI में प्रकाशित पबमेड की रिपोर्ट के अनुसार, लिवर पर 5% से लेकर 33% तक फैट जमा होना फैटी लिवर की कैटेगरी में आता है। फैटी लिवर को चार कैटेगरी में बांटा गया है।
- अल्कोहोलिक फैटी लिवर (ALD)
- मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) जिसे पहले NAFLD कहा जाता था।
- मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोहेपेटाइटिस (MASH) जिसे पहले NASH कहा जाता था।
- MetALD - इसमें MASLD और ज्यादा शराब पीना शामिल हैं। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, लैप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जन डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं, “जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उनके लिवर पर फैट जमा होने लगता है। इस वजह से लिवर टॉक्सिन्स को फिल्टर नहीं कर पाता। दरअसल,लगातार शराब पीने से इम्यून सिस्टम असामान्य रूप से एक्टिव हो जाता है। इस वजह से न्यूट्रोफिल्स और इंटरल्यूकिन्स लिवर के टिश्यू को डैमेज करने लगते हैं, जो लिवर में सूजन का कारण बन सकता है।”
फैटी लिवर के कारण
फैटी लिवर होने के कई कारण हैं, जिनमें अल्कोहोलिक और नॉन-अल्कोहोलिक कारण शामिल हैं। फैटी लिवर कुछ खास दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से भी हो सकता है। अल्कोहोलिक फैटी लिवर उन लोगों में होता है, जो लंबे समय तक बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें अल्कोहलिक फैटी लिवर होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।
मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज MASLD (NAFLD) होने के कारण
NHS के अनुसार, जो लोग शराब का सेवन नहीं करते हैं, उनमें फैटी लिवर होने के कई कारण हैं।
- मोटापा होना, खासतौर पर पेट और कमर के आसपास बहुत ज्यादा फैट जमा होना
- अनहेल्दी डाइट लेना
- फिजिकल एक्टिविटी न करना
- टाइप 2 डायबिटीज
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)
- हाई ब्लड प्रेशर
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- 50 साल से ऊपर के लोग
फैटी लिवर के लक्षण
NHS के अनुसार, अल्कोहल से संबंधी लिवर की बीमारियों के लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते, जब तक लिवर गंभीर रूप से डैमेज न हो जाए। जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
- बीमार महसूस होना
- वजन कम होना
- भूख न लगना
- आंखों और स्किन में पीलापन
- टखनों और पेट में सूजन
- कन्फ्यूजन महसूस होना
- उल्टी में खून आना या स्टूल में ब्लड आना
नॉन-अल्कोहोलिक लिवर की बीमारियों के लक्षण
NHS के मुताबिक, नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर के इन लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत है।
- बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
- हमेशा बीमार महसूस होना
- लिवर में दर्द या बेचैनी
- पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द
फैटी लिवर के ग्रेड
फैटी लिवर को तीन ग्रेड में बांटा गया है।
फैटी लिवर ग्रेड 1
NCBI में प्रकाशित पबमेड रिपोर्ट के अनुसार, अगर लिवर सेल्स पर 5% से 33% फैट जमा होने पर इसे फैटी लिवर ग्रेड 1 में माना जाता है। इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते, लेकिन मरीज को थकान या पेट के ऊपरी दाहिने भाग में थोड़ा दर्द होता है। अगर इस तरह की परेशानी महसूस होती है, तो डॉक्टर डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह देते हैं।
फैटी लिवर ग्रेड 2
NCBI में प्रकाशित पबमेड की रिपोर्ट के अनुसार, लिवर सेल्स में 34% से लेकर 66% तक फैट जमा होने की कंडीशन को फैटी लिवर ग्रेड 2 में रखा जाता है। इसमें मरीज को भूख न लगना, पेट में सूजन और खाना न पचना जैसे लक्षण शामिल होते हैं। NIH में प्रकाशित StatPearls रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में बहुत ज्यादा प्यास लगना, ब्लोटिंग और नींद में दिक्कत होना शामिल है। फैटी लिवर ग्रेड 2 के मरीजों को डॉक्टर वजन कम करने, हेल्दी डाइट लेने और पोर्शन साइज कम करने की सलाह देते हैं।
फैटी लिवर ग्रेड 3
NCBI में प्रकाशित पबमेड के अनुसार, लिवर सेल्स में 67% से ज्यादा फैट जमा होने पर इसे फैटी लिवर ग्रेड 3 में रखा जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 3 काफी गंभीर स्थिति होती है। Cleveland Clinic के अनुसार, फैटी लिवर ग्रेड 3 में मरीज का बिना वजह वजन कम होने लगता है, हाथ, पैर और टांगों में सूजन दिखने लगती है और मतली जैसा महसूस होता है। डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं, “अगर मरीज का वजन बहुत ज्यादा है, ऐसे में अगर वह 10% भी वजन कम कर लेता है, तो इससे लिवर पर फैट कम होने लगता है। फैटी लिवर में दवाएं मरीज की कंडीशन देखकर दी जाती है। हर मरीज की स्थिति अलग-अलग होती है, ऐसे में कोई एक दवा या डोज नहीं बताया जा सकता। मैं सभी को सलाह दूंगा कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की दवा नहीं लेनी चाहिए।”
सिरोसिस
जब फैटी लिवर फिर चाहे अल्कोहोलिक हो या नॉन अल्कोहलिक, अगर इसका लंबे समय तक इलाज न किया जाए, तो यह सिरोसिस में बदल सकता है। आकाश हेल्थकेयर दिल्ली के सेंटर फॉर लिवर-जीआई डिजीज एंड ट्रांसप्लांटेशन विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक डॉ. सौरभ सिंघल बताते हैं, “फैटी लिवर की यह कंडीशन सबसे गंभीर मानी जाती है। इस कंडीशन में लिवर के अंदर बहुत ज्यादा स्कार टिशू बन जाते हैं, इस कारण लिवर का फंक्शन काफी कम हो जाता है और इसका असर पूरे शरीर पर पड़ने लगता है।” Mayo Clinic के अनुसार, इस बीमारी में लिवर के हेल्दी टिश्यू पर निशान बनने लग जाते हैं। जैसे-जैसे लिवर सिरोसिस बढ़ता है, वैसे-वैसे लिवर के लिए नॉर्मल काम करना मुश्किल हो जाता है। अगर लिवर सिरोसिस एडवांस स्टेज में हो जाए, तो यह जानलेवा हो सकता है।
सिरोसिस में मरीज की स्किन पर मकड़ी के जाले जैसी ब्लड वेसेल्स दिखने लगती हैं, स्किन में खुजली होने लगती है और पीलिया बढ़ जाता है। फैटी लिवर में लिवर के नुकसान को काफी हद तक रिवर्स किया जा सकता है, लेकिन सिरोसिस में लिवर के नुकसान को ठीक करना मुश्किल होता है। इसलिए अगर सिरोसिस की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो इसका इलाज करना आसान हो जाता है।
फैटी लिवर के टेस्ट
फैटी लिवर को चेक करने के लिए डॉक्टर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, जिसमें लिवर फंक्शन टेस्ट और फाइब्रोस्कैन टेस्ट मुख्य हैं।
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
Mayo Clinic के अनुसार, लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) में ब्लड टेस्ट के जरिए लिवर की कंडीशन को समझा जाता है। इस टेस्ट में ब्लड में मौजूद एंजाइम और प्रोटीन के लेवल को जांचा जाता है। रिपोर्ट में अगर ALT एंजाइम का स्तर खून में बढ़ जाता है, तो इसका लेवल बढ़ा हुआ आता है। इसे SGPT कहते हैं। इसके अलावा, AST का स्तर बढ़ा होने पर लिवर डैमेज या लिवर की बीमारी होने का लक्षण हो सकता है। इसे SGOT कहा जाता है। ALP, GGT और LDH के बढ़े स्तर लिवर और पित्त नली में डैमेज के संकेत हो सकते हैं।
फाइब्रोस्कैन
फाइब्रोस्कैन के जरिए डॉक्टर मरीज के फैटी लिवर और सिरोसिस की जानकारी लेते हैं। इसमें फाइब्रोसिस का आकलन किया जाता है। फाइब्रोस्कैन एक मशीन है, जो ट्रांजिएंट इलास्टोग्राफी तकनीक पर काम करती है। यह मशीन अल्ट्रासाउंड की तरह काम करती है, जिसमें मरीज के पेट के दाहिने हिस्से में जेल लगाया जाता है और फाइब्रोस्कैन डिवाइस के जरिए जांचा जाता है। मरीज स्किन में वाइब्रेशन महसूस करता है और यह शियर वेव होती है, जो लिवर में जाकर चेक करती है कि लिवर सेहतमंद है या नहीं। इस टेस्ट की रीडिंग कम से कम 10 बार की जाती है ताकि सही परिणाम आएं।
फैटी लिवर का इलाज
फैटी लिवर के इलाज में मरीज को डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। FDA ने सिर्फ MASH के साथ लिवर फाइब्रोसिस वाले केस के लिए रेजडिफ्रा (Rezdiffra) दवा को मंजूरी दी है। फैटी लिवर से जुड़ी किसी भी दवाई को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
फैटी लिवर में डाइट प्लान
फैटी लिवर के मरीजों को खानपान पर खास ध्यान देने की जरूरत है। मरीजों को डाइट में साबुत अनाज, मौसमी फल-सब्जियां, सोया, दही और दालें लेनी चाहिए। फैटी लिवर के मरीजों को नमक कम से कम लेना चाहिए। इसके अलावा, चीनी, प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड जूस और शराब से परहेज करना चाहिए। Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी बताती हैं, "ज्यादा तला-भुना खाने से लिवर में फैट बढ़ सकता है, क्योंकि फैटी लिवर में अतिरिक्त फैट को प्रोसेस करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, ऑयली और प्रोसेस्ड फूड्स इंसुलिन के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाते हैं। इस वजह से अतिरिक्त वसा लिवर में जमा होने लगती है।"
फैटी लिवर में लाइफस्टाइल बदलाव
फैटी लिवर के मरीजों को अपने लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना चाहिए। मरीज को कम से कम 30 से 45 मिनट तक रोजाना तेज वॉक करनी चाहिए। इसके साथ-साथ फैटी लिवर के मरीजों को डॉक्टर से जानकारी लेकर रोजाना एक्सरसाइज भी करनी चाहिए। फैटी लिवर को रिवर्स करने के लिए वजन कम करना जरूरी है। इसके अलावा, मरीज को कम से कम सात से आठ घंटे की नींद पूरी करनी चाहिए। स्ट्रेस को मैनेज करना जरूरी है। जीवनशैली में ऐसे बदलाव फैटी लिवर के मरीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
क्या फैटी लिवर को रिवर्स किया जा सकता है?
Liver Foundation के मुताबिक, फैटी लिवर को काफी हद तक रिवर्स किया जा सकता है। इस लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी को रिवर्स करने के लिए 7 से 10% तक वजन कम करना जरूरी है। इसके साथ, टाइप 2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, यूरिक एसिड और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना भी जरूरी है। फैटी लिवर ग्रेड 3 में लिवर को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल कंडीशन के अनुसार दवाई देते हैं।
निष्कर्ष
फैटी लिवर की समस्या बहुत गंभीर है, इसलिए समय रहते लक्षणों की पहचान करके इलाज कराना चाहिए। मरीज को अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने चाहिए ताकि दवाओं का असर सही तरीके से हो सके। अगर फैटी लिवर की पहचान जल्दी हो जाए, तो रिवर्स भी किया जा सकता है, लेकिन सिरोसिस या लिवर कैंसर की स्टेज पर इससे जुड़े लक्षणों को मैनेज करने के कोशिश की जा सकती है।
