Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Neeraj Dhamija , Senior Consultant – Laparoscopic, Laser & General Surgery

क्या फैटी लिवर में आम खा सकते हैं? डॉक्टर से जानें

फैटी लिवर के मरीजों को अपनी डाइट में हेल्दी और पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स शामिल करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में फैटी लिवर की समस्या होने पर आम का सेवन करना चाहिए या नहीं, आइए इस लेख में जानते हैं?

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वर्तमान समय में खराब डाइट, लाइफस्टाइल और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लिवर पर दबाव पड़ता है। ऐसे में लिवर से जुड़ी समस्याएं बढ़ना काफी आम हो गया है। खासकर लोगों में फैटी लिवर की समस्या होना एक आम लेकिन गंभीर परेशानी बन चुकी है। इस समस्या में आपके लिवर के अंदर ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है, खासकर मोटापा, डायबिटीज, खराब डाइट और लाइफस्टाइल के कारण। फैटी लिवर के मरीजों को अपनी डाइट में हेल्दी फूड्स को शामिल करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या फैटी लिवर के मरीजों को आम खाना चाहिए? आइए इस बारे में हम नई दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज धमीजा से जानते हैं।

क्या फैटी लिवर में आम खा सकते हैं?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज धमीजा का कहना है कि "हां, फैटी लिवर में आप आम खा सकते हैं, लेकिन मात्रा और तरीके का बहुत ध्यान रखना अहम होता है। आम में नेचुरल शुगर होती है जो लिवर द्वारा प्रोसेस होती है। ज्यादा मात्रा में आम खाने से लिवर पर तनाव बढ़ सकता है, अगर बाकी डाइट संतुलित न हो। आम में मौजूद मैंगिफेरिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट लिवर की सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। MDPI Foods Journal (2023) के अनुसार "मैंगिफेरिन एक नेचुरल चीज है, जो हमारे लिवर को हेल्दी रखने में बहुत मदद करता है। यह लिवर में होने वाली सूजन को कम करता है और टॉक्सिक पदार्थों से उसकी सुरक्षा करता है। इस रिसर्च से पता चलता है कि फैटी लिवर, शराब से होने वाले नुकसान और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में भी मैंगिफेरिन काफी असरदार होता है। यह शरीर के अंदरूनी हिस्सों को बेहतर बनाकर लिवर के काम करने की क्षमता को बढ़ाता है।" इसलिए, आम आपकी सेहत के लिए पूरी तरह बुरा नहीं है, लेकिन सही तरीके से सेवन करना जरूरी है।

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आम में मौजूद पोषक तत्व और लिवर का कनेक्शन

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज धमीजा ने बताया कि आम में मौजूद पोषक तत्व लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, अगर इन्हें सीमित मात्रा में खाया जाए।

1. फाइबर

आम फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन को बेहतर रखने के साथ ब्लड शुगर और इंसुलिन रिस्पांस को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है, जो फैटी लिवर डिजीज के लिए जरूरी है। Functional Foods in Health and Disease (2024) में हुई एक स्टडी के अनुसार, आम का फाइबर खासतौर पर लिवर में सूजन बढ़ाने वाले साइटोकिन्स को कम करने का काम करता है। शरीर के एंटीऑक्सीडेंट सिस्टम को एक्टिव करता है।

2. विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट

विटामिन C और अन्य एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स को कम करते हैं जो सूजन और लिवर डैमेज से जुड़े हैं। विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं, जो लिवर की सूजन और डैमेज से जुड़ा होता है। Nutrition, Metabolism and Cardiovascular Diseases (2022) के अनुसार लिवर के स्वास्थ्य के लिए आम में मौजूद विटामिन सी काफी फायदेमंद होता है। आम में मौजूद विटामिन सी और मैंगिफेरिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट लिवर की सूजन को कम करने और सेल्स को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद करते हैं।

फैटी लिवर के मरीज आम कैसे खाएं?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज धमीजा का कहना है कि, फैटी लिवर के मरीजों को आम का सेवन सही तरीके से करना जरूरी है। ऐसे में इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  • सीमित मात्रा में खाएं- एक दिन में आपको 80 ग्राम यानी 2 से 3 स्लाइस आम का सेवन करना चाहिए।
  • जूस पीने से बचें- आप पूरे आम का सेवन करें और जूस पीने से बचें, क्योंकि जूस में फाइबर की कमी होती है और शुगर की मात्रा ज्यादा होती है, जो लिवर पर ज्यादा दबाव डाल सकती है।
  • दूसरे फूड्स के साथ खाएं- आम का सेवन दूसरे फूड्स के साथ मिलाकर कर सकते हैं, जिससे ब्लड शुगर स्पाइक को कम करने या अचानक बढ़ने से रोका जा सके।

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आम खाने से किसे बिल्कुल परहेज करना चाहिए?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज धमीजा बताते हैं कि फैटी लिवर की समस्या में उन लोगों को आम खाने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए, जिनका शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं रहता है या जिनका वजन बहुत तेजी से बढ़ रहा होता है। पके आम में फ्रुक्टोज और कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है, जो लिवर में फैट को और ज्यादा बढ़ा सकता है। खासतौर पर ग्रेड-2 या ग्रेड-3 फैटी लिवर और मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के मीठे आम खाने से बचना चाहिए।

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क्या रात के समय आम खाना फैटी लिवर को बढ़ा सकता है?

रात के समय आम खाने से फैटी लिवर की समस्या बढ़ सकती है। दरअसल, आम में फ्रुक्टोज और कैलोरी की मात्रा भरपूर होती है। रात के समय हमारे शरीर की गतिविधियां कम हो जाती हैं, जिससे शुगर एनर्जी में बदलने के स्थान पर सीधे आपके लिवर में फैट के रूप में जमा होने लगती है। Harvard Health Publishing 2011 के अनुसार, "लिवर में फ्रुक्टोज के पहुंचते ही कई कॉम्प्लेक्स केमिकल बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिसमें लिवर इस कार्बोहाइड्रेट (चीनी) का इस्तेमाल फैट बनाने के लिए करने लगता है। इस प्रक्रिया को साइंस में 'लिपोजेनेसिस' कहा जाता है। जब लिवर को बहुत ज्यादा मात्रा में फ्रुक्टोज मिलता है, तो लिवर सेल्स में फैट की छोटी-सी बूंदें जमा होने लगती हैं, जिसे 'नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज' कहते हैं।"

ग्रेड के अनुसार किसी आम खाना चाहिए और किसे परहेज करना चाहिए? 

ग्रेड-1, 2 और 3 फैटी लिवर की स्थिति एक दूसरे से बिल्कुल अलग होती है। इसलिए, इन स्थितियों में आम खाने को लेकर अंतर समझना बहुत जरूरी है-

ग्रेड-1 फैटी लिवर

ग्रेड-1 फैटी लिवर की शुरुआती स्टेज होती है, जिसे लाइफस्टाइल और डाइट से रिवर्स किया जा सकता है। इस स्थिति में आम खाने से पूरी तरह परहेज करने के स्थान पर आप इसे सही तरह से और सीमित मात्रा में ले सकते हैं। आप कभी-कभी दिन के समय एक दो स्लाइस आम के खा सकते हैं। हालांकि, आप इसे रात के समय या मैंगो शेक के रूप में खाने से या पीने से बचें।

ग्रेड-2 फैटी लिवर 

फैटी लिवर ग्रेड-2 में आम का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि आम में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए, दिनभर में सिर्फ एक छोटा टुकड़ा या आधा कप कटा हुआ आम ही खाना सही रहता है। इसके अलावा मैंगो शेक या जूस पीने के स्थान पर आप सीधे फल खाने की कोशिश करें।

ग्रेड-3 फैटी लिवर

ग्रेड-3 की स्थिति में लिवर में काफी सूजन आ जाती है और लिवर पर पहले से दबाव पड़ता है। ऐसे में आम में मौजूद फ्रुक्टोज लिवर में जाकर सीधे लिपोजेनेसिस (फैट बनाने की प्रक्रिया) को तेज कर देता है। इसलिए, ग्रेड-3 के मरीजों को आम से पूरी तरह परहेज करना चाहिए, क्योंकि आम में मौजूद शुगर लिवर की सूजन और जख्म को और ज्यादा बढ़ा सकती है।

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डॉक्टर से कब मिलें?

फैटी लिवर की समस्या में आम का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन आपके लिवर के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए, अगर आपको फैटी लिवर की समस्या है और आप लगातार थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, पीलिया या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण नजर आएं तो बिना देर किए आप तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें और अगर आपको आम खाना पसंद है तो भी आम का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

निष्कर्ष

फैटी लिवर की समस्या में आम खाना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे सीमित मात्रा और सही तरीके से खाना चाहिए। आम में मौजूद मैंगिफेरिन लिवर को हेल्दी रखने में मदद करता है, जिससे लिवर में होने वाली समस्याओं को कम करने और उससे जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है। इसलिए, आप अपनी डाइट में डॉक्टर की सलाह पर आम शामिल कर सकते हैं।

Image Credit: Freepik

FAQ

  • फैटी लिवर में सबसे अच्छा फल कौन सा है?

    फैटी लिवर के लिए पपीता और आंवला सबसे बेहतरीन फल माने जाते हैं। पपीते में मौजूद पेपेन एंजाइम लिवर में जमे फैट को कम करने और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। आंवला अपने हाई विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण लिवर को डिटॉक्स करके सूजन को कम करता है।
  • फैटी लिवर में सबसे ज्यादा क्या खाना चाहिए?

    फैटी लिवर में सबसे ज्यादा हरी पत्तेदार सब्जियां, दलिया और फाइबर से भरपूर फल शामिल करने चाहिए। पालक, ब्रोकली और मेथी का सेवन लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करते हैं।
  • सूजे हुए लिवर में क्या नहीं खाना चाहिए?

    लिवर में सूजन की समस्या होने पर शराब, तली-भुनी चीजें, रेड मीट, मैदा, चीनी और पैकेट वाले फूड्स का ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए। ये फूड्स लिवर में फैट और सूजन की समस्या को बढ़ाते हैं।
  • फैटी लीवर के लिए सबसे अच्छा नाश्ता कौन सा है?

    फैटी लिवर की समस्या से राहत पाने के लिए आप अपने ब्रेकफास्ट में फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स सो शामिल कर सकते हैं, जिसमें ओट्स, मूंग दाल का चिल्ला, पोहा या ड्राई फ्रूट्स शामिल कर सकते हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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