Fri Sep 11, 2026 | 08:58 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gunjan Sarin , Obstetrics and Gynaecology

क्या थायराइड में प्रेग्नेंसी रिस्की हो जाती है? मां और बच्चे की सेहत पर होने वाले असर को समझें

आजकल महिलाओं में थायराइड की समस्या काफी आम हो गई है, ऐसे में जब थायराइड से जूझ रही महिला प्रेग्नेंसी प्लान करती है या अचानक प्रेग्नेंट हो जाती है, तो मन में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या थायराइड होने पर प्रेग्नेंसी रिस्की हो जाती है?

आजकल थायराइड की समस्या महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है, खासकर 20 से 40 की उम्र के बीच। कई बार यह समस्या हल्के लक्षणों के साथ होती है, तो कई बार बिना किसी लक्षण के भी सामने आती है। वजन बढ़ना या कम होना, थकान, बाल झड़ना, मूड स्विंग, इन लक्षणों को अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है लेकिन जब बात प्रेग्नेंसी की हो, तो थायराइड का संतुलन बेहद अहम हो जाता है। जब किसी महिला को पहले से थायराइड की समस्या हो, तो यह खुशी कई सवालों और चिंताओं के साथ आने लगती है जैसे कि क्या मेरी प्रेग्नेंसी सुरक्षित रहेगी?, क्या थायराइड का असर बच्चे पर पड़ेगा? इस तरह के सवालों का जवाब जानने के लिए हमने, आनंद निकेतन में स्थित गायनिका: एवरी वुमन मैटर क्लीनिक की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन से बात की-

क्या थायराइड में प्रेग्नेंसी रिस्की हो जाती है?

डॉक्टर गुंजन मल्होत्रा सरीन बताती हैं कि थायराइड होने का मतलब यह नहीं कि प्रेग्नेंसी असंभव या बहुत खतरनाक है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना जरूर जोखिम भरा हो सकता है। जब यह हार्मोन ज्यादा यानी हाइपरथायराइडिज्म या कम यानी हाइपोथायराइडिज्म बनने लगता हैं, तो शरीर की कई प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान मां का थायराइड हार्मोन बच्चे के शुरुआती विकास, खासकर उसके दिमाग के विकास के लिए बेहद जरूरी होता है। इसलिए यदि थायराइड असंतुलित है, तो इसका असर प्रेग्नेंसी पर पड़ सकता है।

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हाइपोथायराइडिज्म का असर

अगर महिला को हाइपोथायराइडिज्म है और उसका इलाज या कंट्रोल ठीक से नहीं हो रहा, तो मिसकैरेज, समय से पहले डिलीवरी, हाई ब्लड प्रेशर और बच्चे के कम वजन के साथ जन्म लेने का खतरा बढ़ सकता है। डॉ. सरीन के अनुसार, सही समय पर दवा और नियमित जांच से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ज्यादातर महिलाएं दवा की सही खुराक के साथ हेल्दी प्रेग्नेंसी पूरी कर सकती हैं।

हाइपरथायराइडिज्म का असर

हाइपरथायराइडिज्म में दिल की धड़कन तेज होना, वजन कम होना और घबराहट जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अगर यह अनियंत्रित रहे, तो प्रीमैच्योर डिलीवरी या प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, डॉक्टर की निगरानी में दवा और नियमित थायराइड प्रोफाइल टेस्ट से स्थिति को सुरक्षित रखा जा सकता है।

thyroid in pregnancy risks

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क्या थायराइड के साथ प्रेग्नेंसी प्लान की जा सकती है?

डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन का कहना है कि अगर किसी महिला को पहले से थायराइड है, तो प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले TSH टेस्ट कराकर हार्मोन लेवल को कंट्र्रोल कर लेना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान भी हर 6-8 हफ्ते में थायराइड की जांच करानी पड़ सकती है, क्योंकि इस समय हार्मोन की जरूरत बदलती रहती है।

निष्कर्ष

थायराइड होने का मतलब यह नहीं कि प्रेग्नेंसी बहुत ज्यादा रिस्की है। असली जोखिम तब होता है जब समस्या की अनदेखी की जाए। नियमित जांच, सही दवा और डॉक्टर की निगरानी में ज्यादातर महिलाएं सुरक्षित और हेल्दी प्रेग्नेंसी कर सकती हैं। इसलिए घबराने की बजाय जागरूक रहना जरूरी है।

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FAQ

  • थायराइड की जांच कैसे होती है?

    ब्लड टेस्ट के जरिए TSH, T3 और T4 की जांच की जाती है। TSH लेवल असामान्य होने पर आगे की जांच और इलाज किया जाता है।
  • क्या थायराइड पूरी तरह ठीक हो सकता है?

    ज्यादातर मामलों में थायराइड को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन सही दवा और नियमित मॉनिटरिंग से इसे कंट्रोल रखा जा सकता है।
  • क्या थायराइड का असर प्रेग्नेंसी पर पड़ता है?

    अगर थायराइड असंतुलित हो तो प्रेग्नेंसी पर असर पड़ सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले और दौरान नियमित जांच जरूरी है।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Akanksha Tiwari
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