आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जिनके नाम तो आम लोगों ने सुने होते हैं, लेकिन उनके असली गुणों और उपयोग के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। नाग केसर भी उन्हीं औषधियों में से एक है। नाम सुनते ही अक्सर लोग सोचते हैं कि इसका संबंध या तो नाग से होगा या फिर महंगे केसर से, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। न तो नाग केसर का नाग से कोई लेना-देना है और न ही यह केसर का विकल्प है। इसके बावजूद आयुर्वेद में इसे एक बेहद प्रभावशाली औषधि माना गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि नाग केसर का उपयोग खासतौर पर उन बीमारियों में किया जाता है, जिनमें शरीर के अंदर रक्तस्राव की समस्या होती है। चाहे वह खून वाली बवासीर, महिलाओं में अत्यधिक ब्लीडिंग, बार-बार नकसीर आना या शरीर में किसी भी तरह की इंटरनल ब्लीडिंग हो। आरोग्य विद आयुर्वेद के इस लेख में हम रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल, सिरसा के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से नाग केसर के फायदे, नुकसान और उपयोग के बारे में जानेंगे।
नाग केसर क्या है?
आयुर्वेद में नाग केसर का उपयोग सदियों से कई आम और गंभीर बीमारियों में किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि नाग केसर का नाम सुनकर अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन इसका न तो नाग से और न ही केसर से कोई संबंध होता है। यह एक अलग प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो शरीर में रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग को रोकने और वात-पित्त को संतुलित करने में मदद करती है।
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नाग केसर की पहचान क्या है?
नाग केसर दिखने में लाल रंग के छोटे-छोटे बीज या कली जैसे होते हैं। इसकी बनावट सूखी होती है और रंग गहरा लाल या भूरा-लाल दिखाई देता है। आयुर्वेद में शुद्ध नाग केसर का चयन बहुत जरूरी माना गया है, क्योंकि मिलावटी या नकली नाग केसर से लाभ नहीं मिलता।
नाग केसर की तासीर कैसी होती है?
आयुर्वेदिक दृष्टि से नाग केसर की तासीर शीत यानी ठंडी मानी जाती है। डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार नाग केसर वीर्य में भी शीतल होता है, इसलिए यह शरीर की गर्मी, रक्तस्राव और पित्त विकारों को शांत करने में मदद करता है। यही कारण है कि इसे बवासीर, नकसीर और महिलाओं के अत्यधिक रक्तस्राव में विशेष रूप से उपयोग किया जाता है।
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नाग केसर के फायदे क्या हैं?
- नाग केसर ब्लीडिंग पाइल्स यानी खून वाली बवासीर में खासतौर पर लाभकारी माना जाता है।
- इसके सेवन से मल के साथ आने वाला खून धीरे-धीरे कम हो सकता है।
- इसके अलावा महिलाओं में रक्त प्रदर यानी अत्यधिक मासिक रक्तस्राव की समस्या में भी नाग केसर उपयोगी होता है।
- नाक से बार-बार खून आना यानी नकसीर की समस्या में भी नाग केसर का उपयोग किया जाता है।
- आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर की इंटरनल ब्लीडिंग को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।
- साथ ही यह शरीर में जमा टॉक्सिन को कम करके अंदरूनी सफाई में सहायक होता है।
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बवासीर के लिए नाग केसर का उपयोग कैसे करें?
आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार जिन लोगों को ब्लीडिंग पाइल्स की समस्या है, उनके लिए नाग केसर काफी फायदेमंद हो सकता है। नाग केसर चूर्ण को शहद या मिश्री के साथ मिलाकर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि मात्रा और सेवन की अवधि व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है। डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि नाग केसर बवासीर में सूजन और जलन को शांत करने के साथ-साथ खून बहने की समस्या को भी कम करता है।
नाग केसर के नुकसान क्या हैं?
आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार नाग केसर के कोई गंभीर नुकसान नहीं बताए गए हैं लेकिन जिन लोगों को बहुत अधिक या पुरानी कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें नाग केसर का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन करने पर पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को भी किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से सलाह लेकर ही इसका उपयोग करना चाहिए।
निष्कर्ष
नाग केसर आयुर्वेद की एक प्रभावशाली औषधि है, जिसका उपयोग ब्लीडिंग पाइल्स, नकसीर, महिलाओं के रक्त प्रदर और इंटरनल ब्लीडिंग जैसी समस्याओं में किया जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह वात-पित्त को शांत करने में मदद करता है। हालांकि इसके नुकसान बहुत कम बताए गए हैं, फिर भी कब्ज या अन्य गंभीर समस्याओं में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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Feb 03, 2026 14:31 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Feb 03, 2026 14:31 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Shrey Sharma