अक्सर पुरुष प्रीमैच्योर इजैकुलेशन यानी शीघ्रपतन से संबंधित बात करने से बचते हैं। शीघ्रपतन एक ऐसी समस्या है, जिसमें यौन संबंध बनाने के दौरान पुरुष का बहुत जल्दी और बिना अपनी इच्छा के डिस्चार्ज हो जाना या वीर्य निकल जाना शामिल है। इससे जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो सच नहीं हैं। जैसे लोगों को लगता है कि प्रीमैच्योर इजैकुलेशन एक स्थायी समस्या है। इसकी रिकवरी संभव नहीं है। यह महज एक मिथक है। इस लेख में नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से हम ऐसे ही मिथकों की सच्चाई के बारे में जानेंगे।
प्रीमैच्योर इजैकुलेशन से जुड़े मिथक और सच्चाई
myths and facts about premature ejaculation
मिथकः प्रीमैच्योर इजैकुलेशन एक स्थायी समस्या है
सच्चाईः प्रीमैच्योर इजैकुलेशन जैसी समस्या किसी भी पुरुष के साथ हो सकती है। आमतौर पर अपने जीवनकाल में पुरुषों को कभी न कभी इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसा अत्यधिक तनाव, काम का दबाव, परफाॅर्मेंस एंग्जाइटी आदि कारणों से हो सकता है। NCBI के अनुसार, प्रीमैच्योर इजैकुलेशन पुरुषों में होने वाला सबसे सामान्य सेक्शुअल डिसऑर्डर है।
इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रीमैच्योर इजैकुलेशन शरीर के यौन अंगों की कार्यप्रणाली में कोई खराबी या नुकसान नहीं होता है। इसलिए, यह कोई वास्तविक बीमारी भी नहीं है। इसी वजह से, इसमें कोई सर्जरी भी नहीं होती है। प्रीमैच्योर इजैकुलेशन क्यों हो रहा है, इसका मूल कारण जानकर समस्या का समाधान संभव है।
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मिथकः प्रीमैच्योर इजैकुलेशन सिर्फ बुजुर्ग पुरुषों की बीमारी है
सच्चाईः प्रीमैच्योर इजैकुलेशन सिर्फ बुजुर्ग पुरुषों से संबंधित बीमारी नहीं है। असल बात यह है कि कम उम्र के युवकों में भी यह बीमारी देखी गई है। साल 2024 में Sexual Medicine में प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ पुरुष प्रीमैच्योर इजैकुलेशन को लेकर मानसिक रूप से कम चिंतित या तनावग्रस्त महसूस करते हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट के निष्कर्ष में यह भी बताया गया है कि अधिक उम्र तथा शीघ्रपतन के बीच और अध्ययन किए जाने की जरूरत है।
मिथकः प्रीमैच्योर इजैकुलेशन सिर्फ और सिर्फ साइकोलॉजिकल समस्या है
सच्चाईः डॉ. विजय दहिफले कहते हैं कि यह सच है कि प्रीमैच्योर इजैकुलेशन एक तरह की साइकोलॉजिकल यानी मनोवैज्ञानिक समस्या है। इसमें एंग्जाइटी और स्ट्रेस भी अहम रोल अदा करते हैं, लेकिन बायोलॉजिकल कारक जैसे हार्मोनल असंतुलन, नर्व सेंसिटिविटी और न्यूरोट्रांसमीटर इंबैलेंस भी इसमें जरूरी भूमिका निभाता है। डॉ. विजय दहिफले आगे कहते हैं, "ब्रेन केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन डिस्चार्ज होने के समय पर नियंत्रण रखने में मदद करता है। जब न्यूरोट्रांसमीटर इंबैलेंस होता है, तो ऐसे में सेरोटोनिन का स्तर प्रभावित हो जाता है, जिससे पुरुषों में डिस्चार्ज की समस्या हो सकती है।"
मिथकः शराब का सेवन करने से स्खलन को रोकने में मदद मिलती है
सच्चाईः Cleveland Clinic के अनुसार, यह सच है कि शराब का सेवन करने से डिस्चार्ज में देरी हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि शराब दिमाग और नसों के असर को सुस्त कर देती है। इसी वजह से डिस्चार्ज होने में ज्यादा समय लगता है, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं समझना चाहिए। Indian Journal of Medical Research के अनुसार शराब पीने के कारण कई सेक्शुअल समस्याएं हो सकती हैं। इसमें यौन इच्छा में कमी और प्रीमैच्योर इजैकुलेशन शामिल हैं।
मिथकः प्रीमैच्योर इजैकुलेशन का मतलब है कि पुरुष यौन संबंध बनाने में सक्षम नहीं है
सच्चाईः डॉ. विजय दहिफले स्पष्ट करते हैं, "प्रीमैच्योर इजैकुलेशन पुरुषों से संबंधित एक बीमारी है, जो कि मेंटल या फिजिकल कारणों से हो सकती है। इसे पुरुषों की यौन संबंध बनाने की काबिलियत, स्टैमिना या स्किल से जोड़कर देखना सही नहीं है। तमाम चिकित्सीय शोध से भी यह पता चलता है कि शीघ्रपतन एक शारीरिक या मानसिक स्थिति है, जिसमें डिस्चार्ज होने की प्रक्रिया पर व्यक्ति का खुद का नियंत्रण नहीं रहता। इसलिए इसे किसी पुरुष की व्यक्तिगत नाकामी या कमजोरी नहीं कहा जा सकता है।"
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निष्कर्ष
प्रीमैच्योर इजैकुलेशन को लेकर लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां आज भी मौजूद हैं। अगर समय रहते उनकी सच्चाई का पता न चले, तो अक्सर पुरुषों के लिए अपना समय पर इलाज कराना मुश्किल हो जाता है। वहीं, कुछ पुरुष इसे अपनी मर्दाना ताकत से जोड़कर देखने लगते हैं। यह सही नहीं है। अगर किसी को प्रीमैच्योर इजैकुलेशन है, तो इसके मिथकों पर यकीन करने के बजाय सीधे डॉक्टर से मिलें और अपना इलाज करवाएं। डाॅक्टर मरीज की स्थिति को देखते हुए काउंसलिंग कर सकते हैं या जरूरी उपचार की सलाह दे सकते हैं।
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FAQ
क्या पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज (Kegel Exercises) शीघ्रपतन की समस्या को ठीक करने में मदद कर सकती हैं?
हां, पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां अगर मजबूत हों, तो पुरुषों को अपने इजैकुलेटरी रिफ्लेक्स पर बेहतर नियंत्रण मिलता है। प्रतिदिन 10-15 मिनट कीगल एक्सरसाइज करने से 3 से 6 महीने के अंदर समस्या में सुधार होने लगता है।क्या कंडोम का इस्तेमाल करने से शीघ्रपतन की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है?
कंडोम का उपयोग करने से लिंग की सेंसिटिविटी थोड़ी कम हो जाती है, जिससे स्खलन के समय को कुछ हद तक बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए शीघ्रपतन की समस्या में आप कंडोम का उपयोग कर सकते हैं।
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Sep 23, 2026 17:41 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale
