Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस ब‍िगाड़ सकती है मॉर्डन लाइफस्‍टाइल, इन 5 गलत‍ियों को तुरंत सुधारें

शरीर के नर्व स‍िस्‍टम, मसल मूवमेंट, हार्ट की सेहत और शरीर के फ्लूइड बैलेंस को कंट्रोल करने के ल‍िए इलेक्‍ट्रोलाइट का सही संतुलन होना जरूरी है, लेकि‍न आजकल की लाइफस्‍टाइल में कई ऐसी गलति‍यां हैं ज‍ि‍से करने से इलेक्‍ट्रोलाइट्स का संतुल‍िन ब‍िगड़ सकता है। डाइट एक्‍सपर्ट से जानते हैं ऐसी पांच गलत‍ियों के बारे में।

आजकल की लाइफस्‍टाइल बहुत फास्‍ट हो गई है। मॉडर्न लाइफस्‍टाइल में सेहत और बेहतर ज‍िंदगी बनाने की भागदौड़ में अक्‍सर सेहत के प्रत‍ि हम लापरवाह हो जाते हैं। फास्‍ट लाइफस्‍टाइल में हम कई ऐसी आदतें अपना लेते हैं जो धीरे-धीरे शरीर के इलेक्‍ट्रोलाइट बैलेंस को प्रभाव‍ित करने लगता है। इलेक्‍ट्रोलाइट्स जैसे सोड‍ियम, पोटैश‍ियम, कैल्‍श‍ियम, मैग्नीशियम शरीर के ल‍िए जरूरी हैं। इन इलेक्‍ट्रोलाइट्स का संतुल‍न प्रभाव‍ित होने पर मांसपेश‍ियों में ऐंठन, चक्‍कर, कमजोरी, स‍िर में दर्द जैसी समस्‍याएं होने लगती हैं। शुरू में ये लक्षण सामान्‍य लगते हैं, लेक‍िन लंबे समय तक इन्‍हें नजरअंदाज करने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं मॉर्डन लाइफस्‍टाइल की पांच ऐसी गलत‍ियां जो इलेक्‍ट्रोलाइट्स का संतुलन खराब कर सकती हैं।

electrolyte-imbalance-main

1. हाइड्रेशन के बगैर इंटेंस वर्कआउट करना- Intense Workouts Without Hydration

Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि जब हम ज्‍यादा या इंटेंस वर्कआउट करते हैं, तो शरीर से पसीने के जर‍िए पानी के साथ-साथ सोड‍ियम और पोटैश‍ियम जैसे इलेक्‍ट्रोलाइट्स भी न‍िकल जाते हैं। अगर इस समय पर्याप्‍त मात्रा में पानी नहीं प‍िएंगे, तो इलेक्‍ट्रोलाइट्स की कमी पूरी नहीं होती है, इससे शरीर में असंतुलन हो सकता है। हाइड्रेशन के बगैर इटेंस वर्कआउट करने से मांसपेश‍ियों में क्रैम्‍प, कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है।

यह भी पढ़ें- हाइड्रेशन के लिए नॉर्मल पानी पीना बेहतर है या इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पानी? एक्सपर्ट से जानें

2. बार-बार कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स लेना- Consuming Excess Coffee Or Energy Drinks

कॉफी या एनर्जी ड्र‍िंक्‍स में मौजूद कैफीन एक डाइयूरेटिक (Diuretics) की तरह काम करता है ज‍िससे बार-बार यूर‍िन जाने की इच्‍छा होती है। इससे इलेक्‍ट्रोलाइट्स बाहर न‍िकल जाते हैं। ज्‍यादा कैफीन लेने से ड‍िहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है ज‍िससे इलेक्‍ट्रोलाइट्स का असंतुलन होने लगता है। इस वजह से थकान, बेचैनी और द‍िल की धड़कन तेज होने जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

National Library Of Medical Science की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ज्‍यादा मात्रा में कैफीन लेने से इलेक्‍ट्रोलाइट्स कम होने की प्रक्र‍िया बढ़ती है। ज्‍यादा समय पर हाई कैफीन इंटेक से सोड‍ियम और पोटैश‍ियम जैसे तत्‍वों की कमी हो सकती है। छह एमजी प्रत‍ि बॉडी वेट की मात्रा में कैफीन का सेवन करने से इलेक्‍ट्रोलाइट्स ज्‍यादा मात्रा में शरीर से बाहर न‍िकल जाते हैं। वहीं दूसरी ओर कम मात्रा में लगभग तीन एमजी प्रति‍ क‍िलो की मात्रा से इलेक्‍ट्रोलाइट बैलेंस पर कोई खास फर्क नहीं देखा गया है।

3. सख्त लो-कार्ब या लो-सॉल्ट डाइट लेना- Strict Low Carb Or Low Salt Diet

अगर आपकी डाइट लो कार्ब या कम नमक वाली है, तो इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। सोड‍ियम और कार्ब्स, शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाने में मदद करते हैं। जब इनका सेवन बहुत कम हो जाता है, तो शरीर से पानी और इलेक्‍ट्रोलाइट्स तेजी से न‍िकल जाते हैं। इस वजह से चक्‍कर, कमजोरी और लो एनर्जी महसूस होती है।

यह भी पढ़ें- रनिंग के बाद पिएं इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, मिलेंगे 5 जबरदस्त फायदे

4. मील्‍स स्किप करना- Skipping Meals

आज के समय में अपने ल‍िए समय न‍िकालना एक मुश्‍क‍िल चैलेंज है, लेक‍िन काम को सेहत से ऊपर प्राथम‍िकता न दें। इससे इलेक्‍ट्रोलाइट्स का लेवल धीरे-धीरे कम हो सकता है। जब शरीर को लंबे समय तक एनर्जी नहीं म‍िल पाती है, तो थकान, स‍िर दर्द, फोकस करने में परेशानी हो सकती है।

5. मिनरल रिच फूड न लेना- No Mineral Rich Food

अगर डाइट में म‍िनरल र‍िच फूड्स की कमी है, तो इलेक्‍ट्राेलाइट्स का असंतुलन बना रहेगा। डाइट में फल, सब्‍ज‍ियां, दही, नार‍ियल पानी और अन्‍य म‍िनरल र‍िच फूड्स को शाम‍िल करें।

यह भी पढ़ें- डायबिटीज में नारियल पानी vs नींबू पानी: शुगर कंट्रोल के लिए कौन है बेहतर?

इलेक्‍ट्रोलाइट बैलेंस बनाने के ल‍िए क्‍या करें?

  • द‍िनभर पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करें।
  • अगर इंटेंस वर्कआउट कर रहे हैं, तो इलेक्‍ट्रोलाइट्स की कमी को जरूर पूरा करें।
  • कैफीन जैसे चाय या कॉफी का सेवन कम करें।
  • संतुल‍िन और पौष्टिक आहार लें और तय समय पर रोजाना खाने की आदत बनाएं।
  • भूखे न रहें, इससे शरीर में कमजोरी और इलेक्‍ट्रोलाइट्स का असंतुलन हो सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

मॉर्डन लाइफस्‍टाइल की गलत‍ियां, इलेक्‍ट्रोलाइट संतुल‍न को खराब कर सकती हैं। मील्‍स स्‍क‍िप करना, म‍िनरल र‍िच फूड्स न खाना, लो कार्ब या लो सॉल्‍ट डाइट, बार-बार कॉफी का सेवन जैसी आदतों के कारण संतुल‍िन खराब हो सकता है इसल‍िए इनसे बचना चाह‍िए।

उम्‍मीद करते हैं क‍ि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर करना न भूलें। सेहत से जुड़ी अन्‍य जानकारी के ल‍िए ओनलीमायहेल्‍थ के साथ जुड़े रहें।

Read Next

खाने के अलावा किन चीजों से बढ़ता है बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL)? न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Mar 02, 2026 10:05 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Mar 02, 2026 10:05 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Mar 02, 2026 10:05 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content