Fri Sep 11, 2026 | 09:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

क्या सपाट तकिए पर सोना, ऊंचे तकिए से बेहतर है? जानें इसे लेकर क्या है एक्सपर्ट की राय

Flat pillow vs raised pillow: तकिए को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं जैसे कि ऊंचे तकिए सोएं या सपाट तकिए पर? आइए जानते हैं इस बारे में एक्सपर्ट की राय।

Flat pillow vs raised pillow: सही तकिए पर सोना न सिर्फ आपकी नींद को बेहतर बनाता है बल्कि, आपके पूरे शरीर को आराम देता है। दरअसल, तकिए से जुड़ी गलतियां आपके शरीर के कई हिस्सों की सेहत को प्रावित कर सकती है। इसकी वजह से जहां गर्दन में दर्द हो सकता है, पीठ दर्द की दिक्कत हो सकती है वहीं खाना पचाने तक में मुश्किल आ सकती है। ऐसी स्थिति में एक सवाल आता है कि क्या हमें ऊंचे तकिए पर सोना चाहिए या सपाट तकिए पर सोना चाहिए? किस तकिए पर सोने के क्या फायदे और नुकसान हैं और अच्छी सेहत के लिए आपको किसका चुनाव करना चाहिए, जानते हैं इस बारे में Dr. Pooja Pillai, Consultant-Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangalore से।

Dr. Pooja Pillai बताती हैं कि ऊंचे तकिए पर खर्राटे आने की समस्याएं अधिक होती है। डॉक्टर ऐसे तकिए का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं जो सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को एक सीधी रेखा में रखे, ताकि सोते समय सांस लेने में कोई परेशानी न हो। हालांकि, दोनों ही तकिए के इस्तेमाल क लेकर आपको ध्यान से सोचना चाहिए। जैसे आइए एक बार समझ लेते हैं सपाट तकिए और ऊंचे तकिए में कौन सा बेहतर है?

सपाट तकिया-Flat Pillow

सपाट तकिया यानी फ्लैट पिलो 3 इंच से कम ऊंचाई वाली है और पेट और पीठ के बल सोने वालों के लिए ये ठीक है और इसका इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि पीठ के बल सोने वालों के लिए गर्दन को आगे की ओर झुकने से बचाता है, गर्दन पर स्ट्रेस कम करता है और पेट के बल सोने वालों के लिए पीठ और गर्दन पर तनाव कम करता है जिससे आप आराम महसूस कर सकते हैं। हालांकि, करवट लेकर सोने वालों के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि यह कंधे और गद्दे के बीच जगह छोड़ देता है, जिससे गर्दन में तकलीफ हो सकती है। इसके अलावा इस तकिए पर सोना कई बार एसिड रिफ्लक्स या स्लीप एपनिया का कारण बन सकता है।

raised pillow

इसे भी पढ़ें: क्या बस सीधा बैठने से खत्म हो सकता है एसिडिटी और GERD का दर्द? डॉक्टर से जानें

ऊंचे तकिए पर सोना-Raised pillow

ऊंचे तकिए का मतलब होता है 5 इंच से अधिक ऊंचाई वाला तकिया जिस पर सोना कई बार कुछ लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है। करवट लेकर सोने वालों के लिए के लिए तो ये सही है क्योंकि ये सिर और गद्दे के बीच की जगह भरता है। इसी तरह एसिड रिफ्लक्स या स्लीप एपनिया को कम करने के लिए सिर को ऊपर उठाता है इसलिए ये उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जिन्हे सोने के बाद एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो जाती है। ये मजबूत सहारा देता है, करवट लेकर सोने वालों के लिए रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में रखता है।

इसे भी पढ़ें: स्लीप एपनिया (सोते समय सांस में रुकावट) का समय पर इलाज न कराने से हो सकती हैं ये 6 परेशानियां

हालांकि, पेट और पीठ के बल सोने वालों के लिए बहुत ऊंचा है, जिससे गर्दन में दर्द हो सकता है। इसलिए इन दोनों लोगों को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।

इस प्रकार से आप इन दोनों ही अलग-अलग कंडीशन में तकिए का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ज्यादा ऊंचे तकिए पर सोना आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है इसलिए अगर आपकी सेहत सही है तो आप ऊंचे तकिए का चुनाव करने से बचें क्योंकि इससे आपकी सेहत को नुकसान हो सकता है और पॉश्चर से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। इसके अलावा आप बिना तकिए के सोने पर भी विचार कर सकते हैं जिसे सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।

FAQ

  • क्या फ्लैट तकिए के साथ सोना बेहतर है?

    फ्लैट तकिए के साथ सोना बेहतर है हो सकता है क्योंकि इससे आपके गले या रीढ़ की हड्डी पर कोई प्रेशर नहीं पड़ता और न ही ये दिल से जुड़ी बीमारियों की वजह बनता है।
  • सोने के लिए कौन सा तकिया नहीं लगाना चाहिए?

    सोने के लिए आपको ऊंचे तकिए से बचना चाहिए क्योंकि इससे खर्राटे आने के साथ पॉश्चचर से जुड़ी कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऊंचे तकिए पर सोने से बचें।
  • दाहिनी ओर करवट क्यों नहीं सोना चाहिए?

    दाहिनी ओर करवट करके सोने से दिल पर प्रेशर पड़ता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के उल्ट दिल को ब्लड पंप करना पड़ता है। इसके अलावा ये डाइजेशन को भी नुकसान पहुंचाता है और कई बार शरीर में सूजन पैदा कर सकता है।

Read Next

हार्मोनल बैलेंस के ल‍िए सुबह करें ये 3 काम, थकान और च‍िड़च‍िड़ापन होगा कम

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Pallavi Kumari

Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Feb 01, 2026 18:57 IST

    Modified By : Pallavi Kumari
  • Feb 01, 2026 18:57 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr. Pooja Pillai

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content