जामुन एक ऐसा मौसमी फल है जिसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है और यह न केवल खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद में जामुन को औषधीय गुणों से भरपूर फल बताया गया है, जिसका उपयोग पाचन सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और शरीर की कई आंतरिक प्रक्रियाओं को संतुलित करने के लिए किया जाता है लेकिन इसके बावजूद लोगों के बीच जामुन की तासीर को लेकर अक्सर भ्रम बना रहता है कि यह ठंडी है या गर्म। इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, सिरसा स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से बात की।
जामुन की तासीर ठंडी होती है या गर्म?
आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, जामुन की तासीर पूरी तरह से ठंडी होती है। कई लोग यह सोचते हैं कि जो चीज पाचन शक्ति को बढ़ाती है उसकी तासीर गर्म होती है, लेकिन यह धारणा सही नहीं है। आयुर्वेद में जामुन को अग्निवर्धक और दीपनीय कहा गया है। अग्निवर्धक का अर्थ यह नहीं है कि जामुन शरीर में गर्मी पैदा करता है, बल्कि इसका मतलब है कि यह पाचन अग्नि को बेहतर बनाता है और भोजन को पचाने की क्षमता में सुधार करता है।
इसे भी पढ़ें: क्या नीम, करेला और जामुन का जूस लिवर के लिए फायदेमंद है? आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानें
1. पाचन अच्छा करे
डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि जामुन एक दीपनीय फल है, यानी यह पाचन तंत्र को एक्टिव करने में मदद करता है। इसका सेवन करने से भूख बेहतर लग सकती है और भोजन के प्रति रुचि बढ़ सकती है। जिन लोगों को भूख कम लगती है या पाचन कमजोर रहता है, उनके लिए जामुन फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, इसका यह गुण इसकी ठंडी तासीर को नहीं बदलता। यानी जामुन एक ऐसा फल है जो ठंडी प्रकृति का होने के बावजूद पाचन क्षमता को बढ़ाने का काम करता है।
इसे भी पढ़ें: हाई बीपी में जामुन खाना सही है? जानें एक्सपर्ट की राय

2. रक्तपित्त को शांत करे
आयुर्वेद में जामुन को रक्तपित्त नाशक भी कहा गया है। रक्तपित्त ऐसी स्थिति को कहा जाता है जिसमें शरीर में पित्त दोष बढ़ने लगता है और गर्मी से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। चूंकि जामुन की तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर में बढ़े हुए पित्त को शांत करने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में जामुन का सेवन कई लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है।
आम और जामुन का संबंध
डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, जामुन और आम की तासीर एक-दूसरे के विपरीत मानी जाती है। जहां आम की तासीर गर्म मानी जाती है, वहीं जामुन ठंडी प्रकृति का फल है। आयुर्वेद में माना जाता है कि जामुन का सेवन आम की गर्म तासीर के प्रभाव को संतुलित करने में मदद कर सकता है।
निष्कर्ष
आयुर्वेद के अनुसार, जामुन की तासीर ठंडी होती है और इसे शरीर में बढ़े हुए पित्त को शांत करने वाला फल माना जाता है। हालांकि यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है और भूख में सुधार करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसकी तासीर गर्म है। जामुन अग्निवर्धक और दीपनीय गुणों वाला ठंडी प्रकृति का फल है, जो पाचन को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर को संतुलित रखने में भी मदद कर सकता है। इसलिए गर्मियों और बरसात के मौसम में सीमित मात्रा में जामुन का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद है।
All Image Credit- magnific
FAQ
रात में जामुन खाना चाहिए कि नहीं?
आयुर्वेद के अनुसार किसी भी फल का सेवन सुबह या दिन के समय करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। रात में खाने से यह पेट पर दवाब डाल सकता है।क्या जामुन गर्मियों में खाना अच्छा होता है?
जामुन की ठंडी तासीर के कारण यह गर्मियों में फायदेमंद माना जाता है।शुगर पेशेंट को जामुन कब खाना चाहिए?
शुगर पेशेंट को जामुन सुबह या दिन के समय खाना चाहिए।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jun 22, 2026 16:33 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Jun 22, 2026 16:33 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Shrey Sharma