Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

क्या आप भी बार-बार गर्दन चटकाते हैं? डॉक्टर से जानें क्या ये सुरक्षित है

गर्दन चटकाने की आदत को डॉक्टर सेफ नहीं मानते हैं, क्योंकि यह जोड़ों की अस्थिरता बढ़ा सकती है और गंभीर चोट का कारण बन सकती है। गर्दन चटकाने के बजाए गर्दन में अकड़न और कई अन्य परेशानियां हो सकती हैं।

कई बार लोगों को गर्दन में अकड़न और भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में कई लोग गर्दन चटकाने की कोशिश करते हैं। गर्दन चटकाने पर आने वाली आवाज कई लोगों को रिलैक्सिंग एहसास देती है। कुछ लोगों को लगता है कि गर्दन हल्की और ज्यादा खुली हुई महसूस होती है। इसी कारण से लोगों को धीरे-धीरे गर्दन चटकाने की आदत पड़ जाती है। ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या बार-बार गर्दन चटकाना सही है? आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV hospital, Bangalore से जानें।

क्या बार-बार गर्दन चटकाने की आदत सेफ है?

डॉ. अरविंद एस एन के अनुसार, अक्सर लोग गर्दन चटकाने की आदत को आम समझकर दोहराते हैं, लेकिन गर्दन चटकाने की आदत को बार-बार दोहराना सही नहीं माना जाता है। गर्दन शरीर के सेंसिटिव हिस्सों में से एक है। ऐसे में व्यक्ति को गर्दन को लेकर थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।

Cleveland Clinic के अनुसार, बार-बार गर्दन को चटकाने की आदत सही नहीं है। इससे निकलने वाली आवाज हमेशा अच्छी नहीं होती है।

गर्दन चटकने पर आवाज क्यों आती है?

डॉ. अरविंद बताते हैं, गर्दन चटकने की आवाज आमतौर पर जोड़ों के अंदर गैस के बुलबुले के तेजी से फूटने पर होती है। इस प्रक्रिया को कैविटेशन कहा जाता है। हालांकि, कभी-कभार, धीरे से गर्दन चटकाना ज्यादातर स्वस्थ व्यक्तियों के लिए नुकसानदायक नहीं हो सकता है, लेकिन बार-बार या जोर से गर्दन चटकाने से गंभीर खतरे हो सकते हैं।

चटकाने से थोड़ी देर राहत क्यों मिलती है?

डॉ. अरविंद का कहना है, अक्सर लोगों को गर्दन चटकाने के बाद कुछ समय के लिए आराम महसूस होता है, क्योंकि स्ट्रेचिंग से जोड़ों की गतिशीलता बढ़ती है और आसपास की मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं। हालांकि, यह राहत अक्सर अस्थायी होती है। बार-बार खुद से गर्दन चटकाने से गर्दन के दर्द का मूल कारण दूर नहीं होता है और समय के साथ जोड़ों की अस्थिरता और भी बढ़ सकती है।

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बार-बार गर्दन चटकाने में क्या नुकसान हो सकता है?

डॉ. अरविंद बताती हैं, गर्दन को जोर से घुमाने या मोड़ने से मांसपेशियों, लिगामेंट और गर्दन के छोटे जोड़ों पर दबाव पड़ सकता है। खासतौर पर जब कोई व्यक्ति गर्दन को तेजी से एक तरफ मोड़ता है, तो चोट का खतरा बढ़ सकता है। जिन लोगों को पहले से गर्दन की हड्डियों या जोड़ों से जुड़ी समस्या है, उनके लिए यह खतरा ज्यादा हो सकता है। गठिया, हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरोसिस), लिगामेंट की कमजोरी या डिस्क से जुड़ी बीमारी होने पर बिना सलाह के गर्दन की तेज मैनिपुलेशन नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से गर्दन चटकाने से स्थिति और बिगड़ सकती है।

हालांकि, बहुत रेयर मामलों में गर्दन की जोरदार मैनिपुलेशन को गर्दन की ब्लड वेसल्स में चोट से भी जोड़ा गया है। ये ब्लड वेसल्स ब्रेन तक खून पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए गर्दन को बहुत ज्यादा जोर से मोड़ने या झटके से चटकाने से बचना बेहतर है।

किन लोगों को गर्दन नहीं चटकानी चाहिए?

डॉ. अरविंद के अनुसार, अगर गर्दन में तेज दर्द है, हाल ही में चोट लगी है या गर्दन की समस्या के साथ हाथ-पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो रही है, तो खुद से गर्दन चटकाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। चक्कर आने जैसी समस्या होने पर भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जिन लोगों को गर्दन की हड्डियों की अस्थिरता, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, कुछ तरह की कनेक्टिव टिश्यू समस्या या पहले गर्दन की सर्जरी हो चुकी है, उन्हें बिना एक्सपर्ट की सलाह के गर्दन की मैनिपुलेशन या इसको चटकाने से बचना चाहिए।

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गर्दन की अकड़न से राहत के हेल्दी तरीके

डॉ. अरविंद के अनुसार, गर्दन को बार-बार चटकाने की जगह कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं। जैसे -

  • हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें।
  • पोस्चर में सुधार करें।
  • गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करें।
  • काम की जगह पर एर्गोनॉमिक बदलाव करें।
  • हीट थेरेपी और फिजियोथेरेपी करें।

इन आदतों को अपनाने से कई समस्याओं से राहत मिलती है। दिन भर नियमित रूप से हिलने-डुलने से लंबे समय तक बैठने के कारण होने वाली अकड़न कम होती है।

डॉ. अरविंद के अनुसार, अगर गर्दन चटकाना एक नियमित आदत बन जाती है या सिर्फ अस्थायी राहत देती है, तो यह मांसपेशियों के असंतुलन, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस या खराब पोस्चर जैसी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। इन स्थितियों में एक्सपर्ट से सलाह लेने की जरूरत होती है।

कब डॉक्टर से जांच करानी चाहिए?

डॉ. अरविंद का कहना है, कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक रहने वाला लगातार गर्दन का दर्द, बार-बार होने वाला सिरदर्द, बांह में दर्द या न्यूरोलॉजिकल लक्षणों की जांच किसी ऑर्थोपेडिक स्पाइन एक्सपर्ट या न्यूरोलॉजिस्ट से करानी चाहिए। ऐसा करने से इस समस्या के मूल कारण का पता लगाया जा सकता है।

इसके अलावा, अगर गर्दन चटकाने की आदत बार-बार हो रही है या चटकाने के बाद मिलने वाली राहत बहुत कम समय तक रहती है, तो समस्या की वजह जानना जरूरी है। लगातार गर्दन दर्द, बार-बार होने वाला सिरदर्द, हाथ में फैलता हुआ दर्द, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

गर्दन चटकाने से कुछ लोगों को थोड़ी देर के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन इसे गर्दन के दर्द या अकड़न का स्थायी इलाज नहीं माना जाना चाहिए। खासतौर पर गर्दन को जोर से या बार-बार मोड़कर चटकाने से बचना बेहतर है। गर्दन के लचीलेपन को बनाए रखने के लिए आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करना, सही पोस्चर में बैठने और लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठना ज्यादा सेफ तरीके हैं। अगर दर्द लगातार बना रहे या उसके साथ सुन्नपन, कमजोरी, चक्कर या हाथ में फैलने वाला दर्द हो, तो खुद से गर्दन चटकाने के बजाय समय पर डॉक्टर से जांच कराना बेहतर विकल्प है।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • गर्दन चटकाने के क्या नुकसान है?

    गर्दन चटकाने की समस्या होने पर व्यक्ति को नसों पर दबाव पड़ने, लिगामेंट के कमजोर होने और ब्लड वेसल्स में चोट लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • गर्दन का दर्द क्यों होता है?

    शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होने, गलत पॉस्चर में बैठने, मांसपेशियों में खिंचाव आने, उम्र बढ़ने, स्ट्रेस, चोट लगने, नस दबने और हड्डियों की घिसाव की समस्या होने पर दर्द में दर्द होने की समस्या हो सकती है।
  • गर्दन के दर्द के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

    गर्दन दर्द की समस्या होने पर व्यक्ति को गर्दन में हल्की जकड़न होने, मांसपेशियों में खिंचाव होने, सिर घुमाने और सिर के पीछे हल्का भारीपन महसूस होने जैसी समस्याएं होती हैं। 

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Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 16, 2026 16:01 IST

    Published By : Priyanka Sharma
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