सर्दियों में बर्फबारी देखने के लिए मनाली, शिमला, औली या लद्दाख घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो बर्फबारी और ठंड का मजा लेने के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। ऊंचाई वाले इलाकों में जाने पर कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर, उल्टी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस स्थिति को एल्टीट्यूड सिकनेस (Altitude Sickness) कहा जाता है। KIMS हॉस्पिटल्स, महादेवपुरा बेंगलुरु के लीड और सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, पहाड़ों पर ट्रैवल के दौरान सेहत से जुड़ी सावधानियां बरतना और शरीर को ऊंचाई के अनुसार ढलने का समय देना जरूरी है। ट्रैवल प्लानिंग बनाते समय अपनी सेहत, ठहरने की जगह की ऊंचाई को ध्यान में रखें। आइए जानते हैं कि एल्टीट्यूड सिकनेस के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें और सर्दियों में पहाड़ों पर घूमते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षण क्या हैं?
प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज बताते हैं कि एल्टीट्यूड सिकनेस को एक्यूट माउंटेन सिकनेस (AMS) भी कहा जाता है। यह समस्या ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में होती है। दरअसल, ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा में ऑक्सीजन का दबाव कम हो जाता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षण (Altitude sickness symptoms) एक जैसे नहीं होते।
पहाड़ों पर पहुंचने के कुछ घंटों बाद एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें सिरदर्द, भूख कम लगना, उल्टी, थकान, चक्कर आना और नींद न आना शामिल हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को ठंड, ट्रैवल की थकान या पानी की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ऊंचाई वाली जगहों में पहुंचने के बाद ऐसी परेशानियां होने पर इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। अगर सिरदर्द के साथ उल्टी या असामान्य थकान हो रही है, तो आगे ज्यादा ऊंचाई पर जाने के बजाय आराम करें और इमरजेंसी में डॉक्टर की सलाह लें।
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पहाड़ों पर एल्टीट्यूड सिकनेस से कैसे बचें?
- प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, पहाड़ों पर एल्टीट्यूड सिकनेस से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अगर किसी ऊंचाई वाली जगह जैसे कि लद्दाख जा रहे हैं तो एक दिन सिर्फ होटल में रहें ताकि आपका शरीर वहां के मौसम में ढल सके।
- इसके अलावा अपने साथ पोर्टेबल ऑक्सीजन किट भी रखें और जरूरत पड़ने में इसका इस्तेमाल करें।
- प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज सलाह देते हैं कि बहुत कम समय में कम ऊंचाई से काफी ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचने से बचें। यदि संभव हो, तो रास्ते में रुककर शरीर को नई ऊंचाई के अनुकूल होने का समय दें।
- पर्याप्त पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें। ट्रैवल के दौरान बैलेंस डाइट लें और शुरुआत में बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से बचें। शराब और नींद लाने वाली दवाओं से भी बचना चाहिए, क्योंकि ये परेशानी बढ़ा सकती हैं।
- अगर पहाड़ों पर पहुंचने के बाद सांस फूलने लगे, चलने में लड़खड़ाहट हो, कंफ्यूजन की स्थिति बने या आराम करते समय भी सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे सामान्य थकान न समझें।
- ये गंभीर ऊंचाई संबंधी बीमारी के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लें और जरूरत पड़ने पर कम ऊंचाई वाले स्थान पर उतरें।
- गंभीर लक्षणों में नीचे उतरने और इलाज में देरी करना खतरनाक हो सकता है। केवल दर्द की दवा लेकर या कुछ देर आराम करके दोबारा चढ़ाई शुरू न करें।
साल 2026 में Frontiers in Medicine में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, ज्यादा ऊंचाई पर होने वाली बीमारियों का मुख्य कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) है। हर व्यक्ति का शरीर इसके प्रति अलग तरह से रिएक्ट करता है। इसलिए, इन समस्याओं से बचने और इलाज के लिए हर व्यक्ति की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत रणनीतियां (Personal Strategies) अपनानी चाहिए।
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निष्कर्ष
सर्दियों में पहाड़ों पर ट्रैवल यादगार बनाने के लिए केवल होटल, कपड़े और घूमने की जगहों की तैयारी करना पर्याप्त नहीं है। एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षणों की जानकारी रखना, धीरे-धीरे ऊंचाई पर जाना, पर्याप्त पानी पीना और शरीर को आराम देना भी जरूरी है। यदि आपको पहले से दिल या फेफड़ों से जुड़ी कोई बीमारी है, तो ट्रैवल से पहले डॉक्टर से सलाह लें। सही सावधानियां बरतकर आप ऊंचाई से जुड़ी परेशानियों का जोखिम कम कर सकते हैं।
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FAQ
क्या कम उम्र के लोगों को भी एल्टीट्यूड सिकनेस हो सकती है?
हां, बच्चों और युवाओं को भी यह समस्या हो सकती है। कम उम्र या अच्छी फिटनेस होने से एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा खत्म नहीं होता।क्या एल्टीट्यूड सिकनेस से बचने के लिए पहले से कोई दवा लेनी चाहिए?
कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर दवा लेने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, इसे खुद से शुरू न करें। ऊंचाई वाली जगह और अपनी सेहत के आधार पर डॉक्टर से सलाह लें।क्या पहाड़ों पर पहुंचने के बाद तुरंत ट्रेकिंग करना सेफ है?
अगर आप तेजी से ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचे हैं, तो तुरंत कठिन ट्रेकिंग शुरू करना सही नहीं है। शरीर को वातावरण के अनुकूल होने का समय दें और शुरुआत में ज्यादा मेहनत करने से बचें।
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Oct 19, 2026 16:21 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Prof Dr S M Fayaz
